अक्षय तृतीया

akshay-tritiya पर्व को कई नामों से जाना जाता है। इसे अखतीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 9 मई 2016 को मनाया जाएगा।

सनातन धर्म में अनेक पर्व और त्योहार मनाए जाते हैं। उनमें से एक है वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि। इस तिथि को अक्षय तृतीया पर्व के रुप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गये पूजा-पाठ और दान का अक्षय पुण्य मिलता है। इसके साथ ही अक्षय तृतीया तिथि को स्वयं सिद्ध तिथि बताया गया है। यानि इस तिथि में कोई भी मांगलिक कार्य, गृह प्रवेश, विवाह, मुंडन, व्यापार आदि करने के लिए किसी मुहूर्त पर विचार करने की आवश्यकता नहीं होती।

अक्षय तृतीया तिथि से जुड़ी विशेष घटनाएं

पौराणिक ग्रंथों में इस तिथि की महिमा का विशेष गुणगान किया गया है। पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से अनेक घटनाएं जुड़ी हुई हैं। आइए जानते है अक्षय तृतीया तिथि से जुड़ी विशेष घटनाएं…

भविष्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया तिथि से ही सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ। इसीलिए इस तिथि को युगादि तिथि कहा जाता है।

भगवान विष्णु ने छठवें अवतार भगवान परशुराम जी का जन्म अक्षय तृतीया को ही हुआ था।

भगवान विष्णु के स्वरुप नर-नारायण और हयग्रीव का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था।

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते हैं।

इस पावन अवसर पर वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी जी महाराज के भक्तों को चरण दर्शन साल में एक ही बार होते हैं। बाकी दिनों में पूरे साल चरण वस्त्रों से ढके रहते हैं।

मां अन्नपूर्णा का जन्म भी अक्षय तृतीया के पावन अवसर हुआ था।

इसी तिथि में भगवान कृष्ण ने द्रोपदी को चीरहरण से बचाया था।

भगवान कृष्ण और सुदामा जी का मिलन भी इस पावन तिथि में हुआ था।

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ही ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण हुआ था।

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ही महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था।

क्या क्या करना चाहिए अक्षय तृतीया पर?

धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा-यमुना या किसी पवित्र कुंड-सरोवर में स्नान करना चाहिए।

स्नान के बाद भगवान लक्ष्मीनारायण के साथ अपने ईष्टदेव और गुरुदेव का पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजन करना चाहिए।

भक्तों को फल, बर्तन, वस्त्र, सत्तू, जल आदि वस्तुएं सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों और गरीबों को दान देनी चाहिए।

मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर जो लोग भगवत आराधना के साथ दान देते हैं उन्हें भगवत कृपा के साथ अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

Loading...
%d bloggers like this: