अगर प्रधानमंत्री के.पी.ओली बने तो देश विखण्डन की ओर जा सकता है : अमरेश कुमार सिंह

amreshकाठमांडू, २७जुन २०१५ | नेपाली कांग्रेश के बरिस्ट नेता एवं सांसद अमरेश कुमार सिंह ने आज हिमालिनी के साथ व्यक्त किये गये विचार में कहा है कि नेपाल की राजनीति में आज जो परिदृश्य दिख रहा है उससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है । आए दिन जिम्मेदार नेताओं की जो अभिव्यक्ति आ रही है वह निःसन्देह दुखद और गैरजिम्मेदार है । नेता देश के लिए होता है, देश की जनता के लिए होता है किन्तु अफसोस कि हमारे नेता इस बात को भूल कर सिर्फ अपनी महत्वाकांक्षा को देख रहे हैं । जबकि उनकी सोच, उनकी महात्वाकांक्षा देश के लिए होनी चाहिए, देश की जनता के लिए होनी चाहिए । पर आज ऐसी विडम्बना हो गई है देश की कि, देश के माननीय राष्ट्रपति महोदय, न्यायालय, न्याय व्यवस्था और प्रधान न्यायधीश महोदय पर ही सत्तासीन नेतागण आरोप लगा रहे हैं, और यह सर्वथा अनुचित, है इससे देश अराजकता की ओर बढ़ेगी । देश की स्थिति इतनी भयावह है कि अगर देश के प्रधानमंत्री के.पी.ओली बने और उनके हाथों में देश की बागडोर सौंपी गई तो इस देश के विखण्डन की पूरी तैयारी देश के नेता ही कर रहे हैं । जो व्यक्ति मधेश और वहाँ की जनता की कद्र करना नहीं जानता वो वहाँ का भला कर ही नहीं सकता है, यह मैं दावे के साथ कहूँगा । क्योंकि मधेश ओली जैसे खसवादी मानसिकता एवं मधेश विरोधी व्यक्ति को देश के प्रधानमन्त्री के रूप में कभी स्वीकार नही करेगा |               प्रस्तुत है सांसद अमरेश कुमार सिंह व्दारा व्यक्त किये गये विचार का अंश————देश की अव्यवस्था का यह आलम है कि सर्वोच्च के फैसला को नहीं माना जा रहा है और यह अत्यन्त दुखद है । संघीयता के मसले को अनदेखा कर जिस तरह संविधान बनाने की प्रक्रिया जोर–शोर से जारी है वह यह बता रही है कि भविष्य में भी संघीयता मिलने वाली नहीं है और मधेश की जनता को पूरी तरह ठगा और धोखा दिया जा रहा है । नए संविधान से जनता आशान्वित थी, उसमें देश का हर समुदाय अपने आपको देखना चाहता था । परन्तु आज जो हो रहा है, जैसा संविधान लागु करने की कोशिश की जा रही है इससे मधेश की जनता, जनजाति, दलित, महिला, मुस्लिम वर्ग सभी के अधिकारों का हनन हो रहा है । सभी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं ।

मैं सत्तापक्ष से हूँ परन्तु जो नियम और नीति जनता के पक्ष और हित में नहीं है, मैं उसका विरोध करता आया हूँ और करता रहूँगा । मैं अपनी बात मौखिक और लिखित रखता आया हूँ यह सबको पता ही है । आज मधेश की जनता और जो कमजोर वर्ग हैं, शोषित हैं उन सबको एकजुट होने की आवश्यकता है । और अगर सरकार इन्हें अनदेखा करती है तो देश की एकता और अखण्डता खतरे में पड़ सकती है । आज सिर्फ एक समुदाय का वर्चस्व हम देख रहे हैं और यह वर्षों से होता आया है । किन्तु यही चलता रहा तो लोकतंत्र कमजोर होगा और देश टूटेगा । एक समुदाय के वर्चस्व पर जब दूसरा समुदाय सवाल उठाता है तो उसे शक की निगाहों से देखा जाता है, उस पर अविश्वास किया जाता है और यह अविश्वास और शक की स्थिति देश की एकता और अखण्डता को प्रभावित करती है । आज जो मनमानी करने पर ये तुले हुए हैं तो इन्हें यह जिम्मेवारी लेनी होगी कि कल जो इसके फलस्वरूप दुष्परिणाम होनेवाला है वह इन सत्ताधारियों की बदौलत होगा । आज सर्वोच्च के फैसले को मानने से ये इन्कार कर रहे हैं और मधेशी मूल का आरोप लगाया जा रहा है तो मैं यह स्पष्ट कहूँगा कि ये मधेशियों को राह दिखा रहे हैं कि मधेशी भी कल पहाड़ी मूल के आदेश को मानने से इनकार करेगा और यह सत्ता की गलत नीति की वजह से होगा । यह संविधान मधेश को अधिकारों से वंचित करने का संविधान है, देश को मुठभेड़ की दिशा में प्रेरित करने का संविधान है । जिसका खामियाजा इन तथाकथित नेताओं की वजह से देश और जनता आगे के दिनों में भुगतने वाली है  | प्रस्तुति : श्वेता दीप्ति

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