अगर मधेशी भी नेपाली है तो संविधान की ताकत मधेसियों के पास क्याें नहीं ?डा. शशि यादव

 मनाेज बनैता, १३ माघ ।
इस वर्ष का ठंड बहुत ही बेरहम रहा । ठिठुरते ठंड अाैर बेवस गरीबी के कारण सैकडाें मधेसी दम तोडने को मजबूर हो गए। डा. शशि कुमार यादव के अनुसार एक महीने से कोहरे की सफेद चादर और शीतलहर के सितम ने मधेशीयों को जीना दुष्बार कर रखा था । शीतलहर के सितम और कोहरे की सफेद चादरों ने मधेश मे कोहराम मचाकर दर्जनों मधेशीयों को मौत की नीन्द सुलादिया इस मौत का पहला जिम्मेबार नेपाल सरकार और दुसरा मधेश सरकार इन दोनो मे से कोई नही सुने इन निमुखा  मधेशीयों का फरीयाद !!! – जल , जमीन , और जंगल सबकुछ मधेशीयों के पास रहते हुवे भी ठंड मे आग तापने के लिए लकडियां उपलब्ध नहीं थी । जिसके चल्ते ठिठुरकर दर्जनों मधेशी की मौत हो गयी । घरसे बेघर रहे, लेकिन उम्मीद और भरोसे के दिये जलाने कोई नही अाए । नेपालका नागरिकता रहते हुवे भी मधेसी नेपालका नागरिक नही कहला पाते है । ईसिलिए अपने पहचान के लिये बिकल्प हमे खुद ढुंढना पडेगा । अगर अपनी पहचान बनानी है तो एक ही रास्ता है ” आजाद मधेश अपना देश ” और दूसरा रास्ता है ही नही । मधेश अपने आप में एक सक्षम् राष्ट्र है तो हमे दुसरे देश की नागरिकता क्यु चाहिये ? डा. यादव अागे ये लिखते है “मधेशी नेतागणसे मेरा बिनम्र अनुरोध है कि अभी भी आपके पास समय है और समय का सदुपयोग जीबनकी सफलता होती है लौट आयें अपने वतन ! हम सब मिलकर एक शुन्दर शांत मधेश देशका निर्माण करे । फिरगीं कभी भी मधेशीयोंको मधेशी नहीं समझा है सदियोसे मधेशीको मबेशी ही समझा है इसलिये जब चाहे गोलियां बरसाकर मधेशीयोंको मौतका घाट उतार देता है क्योकि शासन और प्रशासन उनके हाथ मे है । । बिहारी , यूपी , धोती , इंडियन , मर्सिया , भेले सैकडौं उपनाम देकर कोसता रहा , फिरभी मधेशी चुपचाप सुनता रहा , क्योकि मधेशीयोंकी पहुंच न्यून है ।मधेश के दिग्गज  नेताअाें को यही मधेशी जनता अपना अमूल्य मत देकर इन्हे भारी बहुमत से बिजय बनाते है और कहते है जबतक तुम्हारा काम है तो तेरा नाम है नही तो दूर से सलाम है ” अन्त मे डा. यादव एक सवाल मधेशी नेतागण तथा माओबादी, एमाले , कांग्रेस मे लगे हुये नेतासे पुछते है कि अगर मधेशी भी नेपाली है तो ” संबिधान की ताकत मधेशीयो को क्यो नही” ?

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
%d bloggers like this: