“अग्रपंथी लोकतंत्र” में आधारित संविधान

आप के पार्ट नाम “नेपाल परिवार दल” क्यों रखा गया –
– विश्व एक घर है और मानवजाति एक परिवार है । नेपाल के सर्न्दर्भ में उनका कहना था कि अनेकता के भीतर एकता का होना और इसी मान्यता को जीवन्त बनाए रखना ही परिवार है, इसलिए पार्टर्ीीा नाम ‘नेपाल परिवार दल’ रखा है ।
इस दलका उद्देश्य क्या है –
– यह दल समाजिक संस्था है । इस में हरके वर्ग समाविष्ट है । यह दल देश की आवश्यकता है । तर्राई, पहाड, हिमाल सभी को समेटकर चलने वाली पार्टर्ीीै ।
आपके विचारानुसार सेना समायोजन की क्या प्रक्रिया होनी चाहिए –
– हमारी पार्टर्ीीतिवाद तानाशाह के विरुद्ध आवाज उठाती आ रही है । देश में शान्ति स्थापित करने के लिए एक ही सेना होनी चाहिए । सेना समायोजन कार्य अन्तर्रर्ाा्रीय नियम कानून अनुरुप होना चाहिए । व्यक्तिगत मानवाधिकार का मापदण्ड होना चाहिए । सुरक्षा निकाय के अनुसार मापदंड निर्धारण होना चाहिए । जितने हथियार हैं, उनते ही सैनिक अर्थात केटोन्मेन्ट में ३५०० हथिायर है, उतने ही सैनिकों का समायोजन होना चाहिए । सेना में मेधशी थारु एवं मुस्लिम समुदायों के लिए भी बन्द दरवाजे खोलकर उनको सेना में समावेश करना चाहिए । वैसे तो हमारे देश में अधिक संख्या में सेना की आवश्यकता नहीं है । दोनों पडÞोसी देशों के बीच सौहादर््रता बनायी रखनी चाहिए मेरी मान्यता है । मापदण्ड मीट होने की आवस्था में यदि व्यक्ति अपनर्ीर् इच्छाअनुसार रुपये लेकर जाना चाहता है तो उसे निर्धारित पैसे देकर विदाई कर देना चाहिए । ने.काँ. के अनुसार प्रति व्यक्ति ३ लाख, एमाले के अनुसार प्रतिव्यक्ति ५ लाख, माओवादी के अनुसार १० लाख, “परिवार दल” के अध्यक्ष के अनुसार भी १० लाख रुपये लेकर यदि जाना चाहता है तो १० लाख देकर विदाइ कर देना चाहिए ।
प्रमुख तीन दल के अनुसार ९० प्रतिशत काम विगत वर्षो में हो चुका है मात्र १० प्रतिशत काम बाँकी है । दश प्रतिशत काम कौन-कौन से बा“की है –
– इस प्रश्न के उत्तर में ढकाल का कहना था कि २७ दल का संयत्र ने असहमति बिन्दुओं को सहमति विन्दुओं के रुप में लाने की कोशिश करेगा, वैसे तो अधिकांश काम अन्तरिम संविधान -आठ बार के अन्तरिम संंशोधन) द्वारा निर्धारण हो गया है जैसे गणतन्त्र, संघीयता, लोकतन्त्र, धर्मनिपेक्षता । बाँकी कामों में संघीयता का स्वरुप, शासकीय स्वरुप, राष्ट्रपतीय प्रणाली या अन्य, निर्वाचन प्रणाली का स्वरुप संघ और प्रान्त का अधिकार कितना – सुरक्षा प्रणाली का स्वरुप तथा राज्य पुनसंरुचना का स्वरुप आदि ।
क्या नेपाल को नेपाली जनता की इच्छा विपरित हिन्दू राष्ट्र से धर्म निरपेक्षता राष्ट्र बनाना न्यायोचित था –
– तीन दल मिलकर जो धर्म निरपेक्षता का घोषणा किया, वह मेरे विचरा से गलत था । यह अधिकार संविधान सभा को देना चाहिए था ।
नेपाल की आर्थिक अवस्था एवं संघीयता के सम्बन्ध में आप की योजना क्या है –
– नेपाल में पर्ूव स्थापित एकात्मक राज्यसत्ता से आम नेपाली जनता को समान अधिकार मिलना असम्भव था । आर्थिक विकास तथा राजधानी अनुरुप जिलास्तर में स्थानीय विकास के लिए एकात्मक सत्ता को मूल प्रवाह में लाया गया । “परिवार दल” भविष्य में १० हजार डाँलर प्रति व्यक्ति आय को मुख्य लक्ष्य लेकर संघीयता में जाने का पक्षधर है । संघीयता का आधार भाषा, स्रोत, जनसंख्या, प्राकृतिक स्रोत, भौगोलिक बनावट तथा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आदि बनाना चाहिए । जातिया, भाषायी आधार पर संघीयता में जाना अनुचित होगा । विश्व में ४६सौं गरीब राष्ट्र नेपाल है, इस स्थिति में नेपाल को सात प्रदेश के रुप में उत्तर-दक्षिण के रुप में विभाजित होना चाहिए । ऐसा करने से सभी प्रदेश में विविधता का समावेश होगा । ऐसी मान्यता “परिवार दल” का है ।
हिन्दी भाषा के सर्न्दर्भ में आपका क्या विचार है –
– इसके उत्तर में उनका कहना था कि “परिवार दल” की मान्यता है कि कोई भी भाषा किसी भाषा को अतिक्रमण करके उस भाषा को दबाने का काम करना अनुचित है । क्षेत्रीय भाषा या सर्म्पर्क भाषा के रुप में हिन्दी भाषा का अस्तित्व स्थापित है । हिन्दी भाषा विश्वस्तर पर तृतीय भाषा के रुम में हो चुकी है । इस में कोई शंका नहीं है । नेपाल के पर्रि्रेक्ष में हिन्दी भाषा सर्म्पर्क भाषा है, इस में कोई दो मत नहीं है ।
संविधान न बनाने में आप किस को प्रमुख बाधक तत्व मानते है । या संविधान बनाने की प्रक्रिया में प्रमुख तीन दल की भूमिका को आप कैसे देखते है –
– ये तीनों दल पर्ूण्ातः सत्तामुखी बनते आ रहे हैं । ने.काँ., एमाले पार्टर्ीीवसरवादी दिखाई देती है तो माओवादी पार्टर्ीीत्ता प्रति विशेष आकषिर्त दिखार्य देती है । ये तीनों दल आज तक जनता की आकांक्षा अनुरुप इमान्दारिता, क्रियाशीलता तथा राष्ट्रीयता दिखाने में असफल रहा है । अन्य २५ दल अच्छी क्रियाशीलता दिखाई है । पर प्रतिशत के रुप में इन दलों की न्यूनता होने के कारण इनका काम नहीं देखा जा रहा है । तीन वर्षके भीतर संविधान न बनाने में तीनों दल के विचार बाधक है । माओवादी जनतान्त्रिक संविधान बनाना चाहता है तो ने.कां., एमाले लोकतान्त्रिक संविधान बनाना चाहते है । “नेपाल परिवार दल” ‘अग्रपंथी लोकतन्त्र’ में आधारित संविधान बनाना चाहता है । शाश्वत, परिष्कृत, व्यावहारिक, वैज्ञानिक आदि तथ्यों को स्वीकारते हुए परिवर्तन का द्वारा खोलते हुए “परिवार दल” संविधान जारी करने का विचार रखता है । यह विचार संवैधानिक समिति में दर्ता भी कर चुका है ।
पार्टियों में व्याप्त फूट को आप कैसे लेते है –
– इस सर्न्दर्भ में अध्यक्ष ढकाल का कहना है कि सत्ता में जाने के लिए छोटी-छोटी पार्टियों में फूट होना नितान्त चिन्ता का विषय है । पार्टर्ीीें फूट आना राष्ट्र की शक्ति फूटना है । शक्ति के फूटने से राष्ट्र को हानि होती है । “परिवार दल” का नारा है कि- ‘जुटौं र राष्ट्र को सेवा गरौं ।”
जेष्ठ १४ के बाद आप का दल आगे कैसे बढÞेगा –
– इसके जबाब में उनका कहना था कि हमलोगों का “परिवार दल” मानव विकास को आधार बनाकर आगे बढेगा । देश में लागू शिक्षा नीति में व्यापक फेरबदल करना होगा । युनानुकूल शिक्षा नीति लागू करनी होगी । आर्थिक विकास की नीति लाकर २०२० साल के भीतर गरीबी हटाना होगा । पर्यटन क्षेत्र का विकास करना होगा । इसके लिए पर्ूवाधार तैयार करना जरुरी है । पर्ूवाधार के रुप में पशुपति, लुम्बिनी, जनकपुर जैसे धार्मिक क्षेत्र में हजार-हजार रुम वाले होटल का निर्माण करना होगा । शैक्षिक रिर्सच, मेरिटेशन केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र जैसे पर्ूवाधार की योजना बनानी होगी । -२) जलविद्युत योजनाओं को उचित एवं अविलम्ब समायोजन करने की आवश्यकता है, इसी आधार पर नेपाल का विकास हो सकता है । -३) कृषि को आधुनिकीकरण करके नेपाल को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है । -४) प्राविििधक शिक्षा लागू करने के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकीकरण के क्षेत्र में युग सापेक्ष लगानी करने की ओर ध्यान जाना जरुरी है ।
अन्तम में नेपाल के विकास के सर्न्दर्भ में आप क्या कहना चाहते है –
– इस पर उन्होंने कहा कि कोई भी देश आज के युग में अपने बलबूते पर विकास नहीं कर सकता है । हमारे देश में क्षेत्रीय स्थायित्व लाने के लिए परराष्ट्र नीति और अपनी सुरक्षा नीति को दूरगाामी बनाना होगा । चीन और भारत के बीच स्थापित मित्रता को सौहादर््रतापर्ूण्ा बनाना होगा । किन्तु आज तक जो भी सरकारें आयी है, सब के सब किसी न किसी दृष्टि से एक देश के प्रति विशेष झुकाव दिखाई है, जो गलत है । मानव विकास एवं आर्थिक विकास जब तक नहीं होगा, तब तक नेपाल का विकास संभव नहीं है । हमारे दोनों पडÞोसी देश के सर्न्दर्भ में नेपाल में यदि कोई विभेदकारी राजनीति किया जा रहा है तो उसे सरकार की ओर से दमन होना चाहिए ।
यू.एन.ओ. में दो बार हमारी हार हो चुकी है । इससे साबित होता है कि हमारी परराष्ट्र नीति पर्ूण्ा रुप से असफल है । आज तक जो भी सरकार बनी है, वो सामर्थ्यवान के लिए मात्र बनी है नकि र्सवसाधारण जनता के लिए । जो निश्चय ही चिन्ता का विषय है । िि
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