Thu. Sep 20th, 2018

अजब मिथिला गजब मैथिली : बिनोद पासवान

प्रदेश २ के मैथिली बिद्वानों के नाम एक पत्र :

श्रीमान महान मैथिल विद्वानगण !
आप में से कोई बताएगें की आपलोग हम जैसे आम आदमीको कौन सा मैथिली सिखाएंगे ?
६०० साल पहलेवाला संभ्रांत बिद्यापति ठाकुर कालीन तिरहुतिया /पुरोहितिया मैथिलीआपलोग सिखाएंगे की दरभंगा राज वाला राजकीय मैथिली सिखाएंगे ? आखिर मैथिली का परिभाषा क्या है आपके नजर मे ? और मैथिली का टेक्स्ट बुक सब दरभंगा प्रकाशन से छपवाएंगे ? गणित,बिज्ञान सारा मैथिली में ही पढ़वाएंगे क्या ? वैसे हम भी समझ रहे हैं कि कथित मैथिल बिद्वान बन के आपलोग अपनी रोजी-रोटी चमकाने का चक्कर में किस तरह लगे हुए हैं।
आपको बतादें, हम साधारण स्थानीय ठेठी बोली समझते हैं जिसे आपलोग अशुद्ध समझते है, शायद अपवित्र भी समझते होंगे, इसीलिए मैथिली-मैथिली बोलकर आप स्थानीय भाषा का अनादर और उसे समाप्त करने में लगे हुए हैं। खैर, आपलोगों को राजा-महाराजा राज का राजकीय भाषा आपको ही मुबारक हो।
यहां पहाड़ के लोग १९५० के संधि मुताबिक़ भारतीय सरकारी सेवा का भी लाभ उठा रहे हैं, लेकिन प्रदेश २ के दो जिल्ला के पुरबिहा संभ्रांत लोगोंको बस छणिक तूस्टी मे मजा आ रहा है। आपलोगों को सामान्य जनता के जन-जीविका से सरोकार रखनेवाला भविष्य के बारे मे सोचने से तो पाप लगेगा । बस सिर्फ आपलोगों को अपने अगड़े लोग ही आगे बढ़ते रहें, यही तो आपलोग चाहते हैं। सरकारी सेवा के पदपूर्ति मे खुल्ला पद तो होगा लेकिन केवल वो स्पेशल आपलोगों के लिए आरक्षित क्योंकि आपकी पारिवारिक भाषा मे कामकाजी भाषा हो तो और क्या चाहिए ?
दिख रहा है कि कैसे भारत के मिथिलाराज वाले वहाँ फेल हो गए तो अब मधेश मे आग लगा रहे हैं। खुद भारत को धर्म निरपेक्ष रखेंगे लेकिन नेपाल को एक कट्टर हिन्दू राष्ट्र बनाएंगे। आखिर कब तक हम उनके झांसे में आते रहेंगे ? आखिर बर्तमान में जीना कब सीखेंगे ?
अगर नेपाल के शाशक लोग मध्यकालीन समय के भानुभक्त कालीन या मोतीराम भट्ट कालीन खस-भाषा को लागू किये होते तो हम आज किस तरह का खस भाषा स्कूल में पढ़ रहे होते आप अंदाजा लगा सकते हैं। क्या आपलोग भी मैथिली कहकर वही मध्यकालीन लबज का पुनरावृत्ति करेंगे ?

आपलोग जिस तरह का मैथिली बोली और लिखावट का वकालत कर रहे हैं, वो यथार्थ धरातल से दूर है, लेख्य भाषा और कथ्य भाषा मे कोई तारतम्य है ही नहीं । लेकिन फिर भी आपलोग अपने महाकवि बिद्यापति और ललका पाग को सारा मध्य-मधेश में लादना चाह रहे हैं।
अपने घर के बच्चों को आधुनिक शिक्षा अंग्रेजी, हिंदी, नेपाली में पढ़ाएंगे लेकिन दूसरों को भरमाने के लिए मैथिली-मिथिला बोलकर उकसायेंगे ?
“ओना ब्यक्तिगत रुपस कैह दी जे हमरा अपन गाम घर में बोलइवाला हमर मातृभाषा-बोली के हम बिरोधी नै छिए मुदा बात रैह गेलै बर्तमानमे कामकाजी भाषाके रूपमे एकर उपयोगिता आ सांदर्भिकता के बारे मे। आई-काइल्ह जई तरिका स मैथिली कैहके जोन बोली आ लेखावट के बिकास करके प्रयास हो’रहल है से भाषा बिज्ञान के हिसाब से सेहो बहुते त्रुटिपूर्ण छै।”
एक बात याद रखिये, मधेश आंदोलन केवल प्रदेश २ को मिथिला-राज बनाने के लिए नहीं हुआ था, सारा मधेश को “एक मधेश – एक प्रदेश” का नारा देकर उपेंद्र यादव जी राजनीति के शिखर पर पहुंचे थे। अब वह दूसरे रास्ते चले गए तो क्या सारा जनताको भी उनके ही पीछे भटके हुए रास्ता में चले जाना चाहिए ?

हम सभी मधेश के सारे लोग टूटकर नहीं जुटकर राज्यसत्ता से संघर्ष करेंगे तो ही सफल हो सकेंगे। बस टुकडों मे बंटकर एकल भाषा और एकल जातीय आधारपर राजनीति करेंगे तो आप केंद्र सत्ताको ही खुस करने का काम करेंगे। उनका काम आसान करेंगे। वो चाहते ही तो यही हैं।
यह जो भी मेरा हिंदी प्रस्फुटन है, कोई औपचारिक अध्यन बिना है, अगर औपचारिक अध्यन ही हिन्दी मे होता तो शायद और ज्यादा अच्छा प्रयास होता। आज के समयमे हिंदी की उपयोगिता जैसे सब्जीमे मसाला का होता है वैसे ही हमारे दैनिक बोली-ब्यवहार में है, यह स्वीकार करनेमे हिचकिचाने की जरुरत नहीं।
सभी मित्रोंसे निवेदन है कि हम सभी छणिक स्वार्थ त्यागकर, बिबिधाता मे एकता युक्त मधेश के बारेमे संकल्प करें। पूरब-पश्चिम मधेश को एक करने के बारेमे सोचें।

जय मातृभूमि !

 

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janakBinod Yadav Recent comment authors
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Binod Yadav
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Binod Yadav

Thanks Sir for this mindblowing heart touching contextual and relevant article.
Thank you so much from core of my heart
Please keep writing on Madhesh issues

janak
Guest

mind blowing article….. keep writing!!