अधिकार ! किसे चाहिए ? ..

ग‌गेश मिश्र
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°chair1
नेता को,
कुर्सी से प्यार है।
जनता का,
कुंठित अधिकार है।
अब बताएँ,
अधिकार !
किसे चाहिए,
नेता को या जनता को ?
क्या टोपी, क्या धोती ?
बस एक लक्ष्य है, कुर्सी।
मधेश की,
बात ही न्यारी है;
जातीयता !
सबसे बड़ी बीमारी है।
यहाँ,
तिलक है, तराजू है, तलवार है,
अहिर है, पासी है, कलवार है।
इसमें मधेशी कौन ?
समझ में, नहीं आता;
इसे;
बस नेता ही समझाता है।
जो रहता है, मौके की तलाश में,
अवसर मिलते ही,
कुर्सी पर, काबिज़ हो जाता है।

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