अधिकार प्राप्ति हेतु एकजुटता की जरुरत : गोविन्द चौधरी,संदर्भ १० वीं बलिदानी दिवस

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विनोदकुमार विश्वकर्मा,काठमांडू, माघ ६ । संदर्भ १० वीं बलिदानी दिवस तथा श्रद्घांजली सभा

मधेश आंदोलन का पहला पड़ाव समाप्त हो चुका है । हमारी यात्रा कहां जाकर विराम लेगी, यह कहा नहीं जा सकता है । पहले पड़ाव में बहुत उपलब्धियां भी हुई हैं । लेकिन संदेह है कि यह उपलब्धियां भी हाथ से निकल न जाए । इसलिए हमें एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए । ये बातें १० वीं बलिदानी दिवस के मौके पर पूर्व मंत्री गोविन्द चौधरी ने कहीं ।

उन्होंने कहा कि अपने अधिकार की प्राप्ति हेतु पुनः आंदोलन करने की आवश्यकता है । और उससे पहले हमें आंदोनल के चरित्र तय करना होगा ।

राष्ट्रीय मधेश समाजवादी पार्टी के महासचिव केशव झा ने कहा कि विगत के एक दशक में बहुत राजनीतिक उतार चढ़ाव हुआ है । असंख्य उपलब्धियां भी हुईं । लेकिन जो उपलब्धियां होनी चाहिए थीं, वह नहीं हो सका है ।

बताया कि हमारे नेतृत्व वर्ग में भी सची लगन, सही अड़न और नेतृत्व क्षमता में कमी होने की वजह से हमारी समस्याएं ज्यों का त्यों रही हैं । इसलिए हम दृढ़ संकल्प से आगे बढें ।

अधिवक्ता सुरेन्द्र महतो ने कहा कि रमेश महतो की बलिदानी से मधेशियों को बहुत उपलब्धियां भी हुई हैं । लेकिन संदेह है कि वे उपलब्धियां भी हाथ से निकल न जाए । उन्होंने कहा कि पिछले दिनों सभी मधेशी पार्टियां सरकार में भागीदारी हो चुकी हैं । लेकिन विडम्बना है कि शहीदों का सपना साकार नहीं हो सका है ।

संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के केन्द्रीय सदस्य अशोक यादव ने कहा कि मधेश जनविद्रोह के क्रम में जिन शहीदों ने अपनी बलिदानी दीं, उन्हें कभी भी भूलाया नहीं जा सकता है । उन शहीदों के बदौलत ही आज विश्व में मधेश और मधेशियों की पहचान स्थापित हो सकी है ।

समृद्घ मधेश युवा विद्यार्थी नागरिक अभियान के संयोजक योगेन्द्र देव ने कहा कि अपने अधिकार की प्राप्ति हेतु दस दर्जन से अधिक मधेशी सपुतों ने बलिदानी दीं लेकिन उन शहीदों का सपना अभी तक साकार नहीं हो सका है ।

मौके पर मधेशी नागरिक समाज के अध्यक्ष गणेश मंडल ने कहा कि मधेश की कोई भी पार्टियां एक भी शहीद के परिजनों को संविधान सभा में प्रतिनिधित्व नहीं करवाई । यही मधेश का दुर्भाग्य है । उन्होंने कहा कि सभी पार्टियां जातिवाद के गोलबंद में अड़ी हुई हैं । एसलिए जातिवाद से ऊपर उठकर आदिवासी जनजाति, दलित, पिछड़ावर्ग, अल्पसंख्य समुदायों के अधिकार के लिए आवाज उठाएं ।

बुद्घिजीवी डॉ. ललन चौधरी ने कहा कि देश में नस्लवादी सत्ताधारियों ने संविधान को हरण किया है । आदिवासी जनजाति, दलित, पिछड़ावर्ग, अल्पसंख्यक कभी आगे नहीं बढेÞ, सदियों से यही उनकी मानसिकता रही है ।

मौके पर हिमालिनी के सहसम्पादक विनोदकुमार विश्वकर्मा, मधेश पत्रकार समाज के अध्यक्ष मोहन सिंह, लोकतांत्रिक पार्टी नेपाल के जीवन शाह, बुद्घिजीवी मनोज बच्चन इंजीनियर सुभाष शाह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए थे ।

अवसर पर मैथिली एवं भोजपुरी गायक एवं गायिका अंजु पटेल ने जाग मधेश बहिन भैया हो, जाग न सबेरा हो गइल गित के बोल से सहभागियों को दिल जीत लिया । इसी प्रकार सहभागियों ने शहीदों की तस्वीरों पर पूmल व अबीर चढ़ाकर श्रद्घांजली दीं । मैतिदेवि मंडला में भी मोमबति प्रज्ज्वलित कर ज्ञात–अज्ञात शहीदों को श्रद्घांजली दीं ।

दसवीं बलिदानी दिवस तथा श्रद्घांजली सभा समृद्घ मधेश युवा विद्यार्थी नागरिक अभियान, मधेश उत्थान फाउन्डेसन तथा मधेश सांस्कृतिक फोरम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन किया गया था । कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता आनन्द गुप्ता ने किया था और आभार ज्ञापन समृद्घ मधेश युवा विद्यार्थी नागरिक अभियान के अध्यक्ष योदेन्द्र देव ने किया था ।

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