अन्तत: उपेन्द्र यादब ने अपनी सभी गल्ती स्वीकार की ।

मधेशी जनाधिकार फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादब ने अपनी बिभिन्न कमी-कमजोरी के कारण राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति मे पिछे परने की बात बतायी है।

१- राजधानी से प्रकाशित दैनिक नयाँ पत्रिका के साथ हुई बातचित मे उन्होने कहा कि कम्युनिस्ट आन्दोलन को समय पर नही पहचान पाना अपनी पहली गलती  है। ऊन्हे बाद मे पता चला कि यह आन्दोलन तो उन्ही का आन्दोलन था ।

२- दुसरी गलती के रुप मे उन्होने बताया कि अपने व्दार गठित पार्टी मधेशी जनअधिकार फोरम मे जथाभावि राजनैतिक नियुक्ती करके भ्रष्ट और चरित्र हिन व्यक्ति को पाटी मे सामिल करना था जिसके कारण उन्हे वदनाम होना परा । उनके अनुसार इनलोगो को सामिल कराना पार्टी मे गन्दगी इकट्ठा करना था ।

३- मधेश आनदोलन के विरोधी लोगों तथा जनता व्दारा तिरस्क्रित नेताओं को टिकट देना वा पार्टी मे कार्यभार देना अपनी तिसरी गल्ती के रुप मे श्री यादव ने स्विकार किया।

४- एक अजिबोगरिव गल्ती स्वीकारते हुये उन्होने कहा कि भ्रष्ट और बदनाम नेताओं का चरित्र सुधार करने मे उन्होने अपना समय बर्बाद कर दिया । नेताओं को पार्टी से नही निकलना भी उनकी गलती थी।

५- जल्दबाजी मे सरकार मे सामिल होना भी उनकी गल्ती थी । पार्टी की यह अवधारणा की सरकार मे सामिल नही होने पर पार्टी का अस्तित्व ही समाप्त हो जायगा तथा कुछ लोगों को पद देकर आखिर पर्टी को कुछ लाभ नही हुआ यह पाँचवी गल्ती के रुप मे उन्होने लिया ।

६- सभी नेताओं के महत्वाकांक्षा को गलत तरिका से पुरा नही करना जैसे पैसा नही देना, घर नही खरिद देना तथा पार्टी बिभाजन मे पैसा नही खर्च करना भी उनकी कमजोरी हो सकती है ।

७- सरकार पर विश्वास करना अपनी सातवीं कमजोरी बताया । सरकार से हुई समझौता का पालन नही कारा पाना ।उनके अनुसार मधेश आन्दोलन के क्रम मे सरकार मधेशी जनता के सामने झुकी लेकिन बाद मे धोका दे दी ।

८- गलत व्यक्ति को समिलकर लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा बनाना भी एक गल्ती थी  यादब ने बताया । मधेशी जनता के अधिकार  संरक्षण के लिए गठित मोर्चा ने मधेशी जनता के हीत- अधिकार के लिए कोई  काम नही कर सकी ।

९ – यादब ने कहा कि संघीयता सहित के संविधान को समय पर नही समझ पाना तथा इसकेलिएआन्दोलन की स्थिति नही तैयार कर पाना भी उनकी कमजोरी थी ।

१०- अपनी दशवीं गल्ती के रुप मे श्री यादव ने स्वीकार की कि गलत विचार से प्रेरित लोगों को समय पर नही पहचानना उनकी गल्ती थी । राजनीति मे व्यक्ति का विचार, उसका चरित्र और पृष्टभुमि को भी समय पर ही अन्दाजा लागाना बहुत जरुरी होता है जो की उन्होने नही किया। भ्रष्ट पृष्ठभूमी, गलत विचार और गलत व्यक्ति को ईकट्ठा करके कोई भी मन्जिल पर नही पहुँच सकता है ऐसा विचार है श्री यादव का ।

 

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