अन्र्तराष्ट्रीय नारी दिवस के सन्दर्भ, नेपाल में महिला अधिकार की स्थिति : साबित्रि गिरी (प्रशिक्षार्थी पत्रकार)

साबित्रि गिरी (प्रशिक्षार्थी पत्रकार)

साबित्रि गिरी (प्रशिक्षार्थी पत्रकार)

नेपालगंज , बाँके, साबित्रि गिरी (प्रशिक्षार्थी पत्रकार) । अन्र्तराष्ट्रीय महिला दिवस महिला जागरूकता सम्बन्धी दिवस है । यह ८ मार्च के दिन में विश्वभर मनाया जाता है । राजनीतिक तवर से शुरु हुआ है तो भी अभी महिला अधिकार, महिला सशक्तिकरण और समानता आदि सवालें अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस की बिषय होती रहती है । यह सर्वप्रथम सन् १९०९ फरवरी २८ तारीख में मनाया गया था । सन् १९१० में महिलाए“ को मताधिकार सुनिश्चित करने की उदेश्यों के साथ इस को अन्तराष्ट्रीय दर्जा प्रदान किया गया था । सन् २०१५ में आकर बिश्वभर १०५ वा“ं अन्तर्राष्ट्रीय नारी दिवस भी मनाया गया । यह मार्च महीने भर ही मनाया जता है । प्रत्येक वर्ष मार्च ८ तारीख के दिन मनाने वाला नारी दिवस कोई खुशीयाली के उत्सव न होकर आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक एवम् समाज और राष्ट्र के हर तह तप्का में नारीयों को पुरुष सरह समान हक अधिकार मिलना चाहियें लैंगिक विभेद की अन्त्य करते हुयें हर पक्षों से राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुनिश्चित करने के साथ महिला सशक्तिकरण की अभियान को विश्वव्यापी रूप में बुलन्द करते हुयें मनाने वाला महान सङ्कल्प और अठोट लेकर निरन्तर जारी रखना अनन्तकालीन महायात्रा है । अन्र्तराष्ट्रीय नारी दिवस विशेष करके नारी अधिकारों सम्बन्धी चर्चा होने की मुख्य दिवस है । श्रमिक महिलाए“ ने पुरुष सरह समान मजदूरी और छुट्टी मिलना चाहियें, नारी के उपर सदियौं से हरेक क्षेत्र में होते आ रहा विभिन्न प्रकार की अन्याय, अत्याचार, शोषण, दमन, हिंसा, विभेद जैसा अनगिनत अमानवीय व्यवहारों के प्रति खुलकर सङ्घर्ष की श्रृङखला को आगे बढाने की जैसी महान कार्य को साहसी महिलाए“ से शुरुवात किया गया था । जस का फलस्वरूप लैङ्गिक विभेद, राजनैतिक, शैक्षिक, सामाजिक, सा“स्कृतिक, आर्थिक जैसा क्षेत्र में असमान हक अधिकार के विरुद्ध में आवाज उठाते हुयें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक उन लोगों ने चेतना फैलाने में सफल हुयें । सन् १९७७ में संयुक्त राष्ट्र संघ ने नारी दिवस मानने सभी देशों के नारी प्रतिनिधियों को बोलाकर ८ मार्च के दिन प्रत्येक वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय नारी दिवस मनाने की निर्णय करते हुयें आधिकारिक रूप में घोषणा किया गया था ।
महिलाए“ के उपर हो रही यौन दुव्र्यवहार विश्व व्यापी रूप में विद्यमान रही है । यह अपराध मानवअधिकार विरोधी कार्य माना गया है तो भी इस अपराध में कोई भी कमी नही आयी हैं । नयें नयें रूप में यौन दुव्र्यवहार की घटनाए“ दिखाई पडती है । यह समस्या विश्वव्यापी रूप में विद्यमान होने के बाद भी यह विषय सभी के लियें सरोकार की विषय नही थी और यह विषय को सामान्य रूप में लिया जाता था । महिलाए“ भी अपने उपर हुआ यौन दुव्र्यवहार को सहकर बैठती थी और अपनों में मात्र सीमित रखती थी इस तरह की दुःख कुष्ट झेलती रहती थी ।
संयुक्त राष्ट्रसंघ की महिला के उपर हो रही सभी प्रकार की भेदभाव उन्मूलन विरुद्ध की महासन्धि का धारा १९ ने महिला के उपर हो रही सभी प्रकार की हिंसा, यौन दुव्र्यवहार, बेइज्जतीविरुद्ध महिलाए“ को संरक्षण करने की बात कुरा उल्लेख किया है । इसी तरह संयुक्त राष्ट्रसंघ का सन् १९६६ के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृति सन्धि की दफा ७ ने भी सभी ईशानों ने एक काम करने की अनुकूल वातावरण होने की बातों पर जोड दिया है लेकिन महिला के उपर होने वाली यौन दुव्र्यवहारों में कोई भी कमी नही आई है । सडकों से लेकर शिक्षण संस्था, धार्मिक स्थल, विभिन्न सरकारी कार्यालय, उद्योगधन्दों में महिलाए“ के उपर यौन दुव्र्यवहार हुआ समाचारे आ रही है । महिलाए“ के उपर हो रही यौन दुव्र्यवहार की अधिक कारक तत्व है । जिस की निवारण करने के लियें प्रभावकारी कार्यक्रम की आवश्यकता है । राज्य के हरेक निकायों से प्रदान हो रही विभिन्न सेवा सुविधाए“ में भी महिलाए“ को समान पह“ुच तथा सहभागिता बढाना ही महिला की अधिकार है । महिला अधिकार के बारे में हम सभी को पता ही है , लेकिन व्यवहारिक रुप में कार्यान्वयन नही हुआ है । हमारे देश में विभिन्न कानून तथा नितिया“ ने स्पष्ट किया है तो भी व्यवहारिक रुप में कार्यन्वयन किया गया है नही किलता है , कहीं कहीं तो लिखितम तथा मौखिक रुप में मात्र प्रयोग किया गया मिलता है । समान सहभागिता की बात भी वैसे ही है । महिला और पुरुष के वीच भेदभाव किया गया अधिकारवादीयों की सिकायत भी है । अभी भी हमारे समुदाय में लैगिंक हिंसा सम्बन्धी विभिन्न घटनाए“ हो रही है । विभिन्न कारणों से स्थानीय स्तर की महिलाए“ आगे समेत बढ नही सकने की अवस्था रही है । कही महिलाए“ तो न्याय की तलाश में है तो कहीं तो दुःख सहकर समाज स बहिष्कृत की अवस्था में रहकर बैठती मिलती है । हमारे गा“व समुदाय की महिलाए“ में जागरुकता फैलाने की अवस्था रही है उन लोगों को महिला अधिकार, सहभागिता तथा पह“ुच के बारे में जागरुक बनाकर इस के बिरुद्ध अवाज उठाने के लियें शसक्त बनाने की अवस्था रही । अभी इस विषय पर सरकारी तथा गैरसरकारी निकायों ने विभिन्न प्रयास शुरु करने लगे है लेकिन प्रभावकारी नही है सम्बद्धों की कहना है । मुलुक के हरेक नेतृत्व तह में अधिका“श पुरुÈों की सहभागिता बढने की अवस्था है । योग्यता, Ôमता के आधारों में पुरुÈ और महिलाए“ ने समान अवसर मिला है तो भी उस का पुर्ण रुप में कार्यान्वयन नही हुआ है । नेपाली समाज में महिला सन्तान उत्पादन करना , तथा घर चलाना और सेवा करने की प्रवृति रही है । यैसी प्रवृत्ति हरेक देश की समस्या जैसे बनी है । इस अवस्था में महिला के उपर शोषण बढते गया है । महिला अधिकार के लियें विश्वव्यापी रुप में नारा जितना लगे भी उस की पुर्ण रुप में कार्यान्वयन हुआ है नही मिलता है । महिला अधिकार नारा के भितर कैद किया गया है । महिलाए“ अपना जागरुक न होने से भी विभिन्न हिंसा की शिकार होती रहती है । हमारे समुदाय में प्राय पुरुषों की नेतृत्व तथा निर्णायक भुमिका होती है । घर की सम्पत्ती से लेकर विभिन्न तह में महिलाए“ की अधिकार मिला है नही मिलता है । पुरुषों के शहारे में रहना सामाजिक संस्कार अभी भी कायम ही है । वार्षिक नारी दिवस, जैसे विभिन्न महिला अधिकार सम्बन्धी दिवस मनाया जाता है । उस दिवस के सन्दर्भ में लेगिंक हिंसाविरुद्ध तथा महिला अधिकार के पक्ष में शसक्त अवाज उठाया जाता है । लेकिन प्रभावकारी कार्यान्वयन नही होती है महिला अगुवा लोगों की सिकायत है । कार्यन्वयन तह में रहने वाले भी बोली और भाषणों में बात करते है तो भी व्यवहार में नही करते है । सामाजिक तथा परम्परागत संस्कार, गरीबी, अशिक्षा, दहेज, बालविवाह जैसे प्रमुख समस्याओं से भी महिला हिंसा की घटनाए“ बृद्धि होती है । लेकिन अभी् पिछले समय में सरकारी तथा गैरसरकारी निकायों ने विभिन्न चेतनामूलक अभियान से समुदाय की महिलाए“ आवाज उठाना शुरु किया है । महिलाए“ के उपर हो रही यौन दुव्र्यवहार के विरुद्ध सरकार होशियार होना उतना ही जरुरी है आवश्यक है । महिलाए“ को सडक में चलते समय यौन दुव्र्यवहार करने वालो के उपर प्रहरी ने कडा निगरानी रखना जरुरी है और आवश्यक पडा तो तत्काल कारवाही भी होना चाहियें । यैसा होने पर मात्र अपराध नियन्त्रण होने की वातावरण सिर्जना हो सकती है महिलाए“ भी अपने उपर दुव्र्यवहार हुआ तो तत्काल परिवार, साथीभाई व सम्बन्धित निकायों में जानकारी करना प्रयास चाहियें । महिला के उपर होने वाली हिंसा देखने वाले निकायों ने पीडित की उजुरी को लेना और गोप्यनीयता को कायम रखना चाहियें । यैसा हुआ तो उजुरी करने की संख्या में तीव्र वृद्धि हो सकती है । यौन दुव्र्यवहार सम्बन्धी कानुून पुनरावलोकन करके समयसापेक्ष कानुून बनाना चाहियें । महिलाए“ ने निर्धक होकर चल फिर करने की वातावरण सिर्जना होना चाहिए, तब मात्र उन लोगों ने अपनी व्यक्तित्वों को विकास कर सकती है अभी सब से पहले यौन दुव्र्यवहार सम्बन्धी प्रभावकारी कानुून और उस की कार्यान्वयन होना आवश्यक है । पारिवारिक जिम्मेवारीया“ और श्रम की बात करें तो नेपाल में पुरुÈों के तुलना में महिलाए“ अधिक श्रम करती है । घर परिवारों की देखभाल से लेकर बाहर कमाने तक की जिम्मेवारी महिलाए“ के रहती है । हिंसा महिलाए“ के उपर हो य पुरुÈ के उपर वो दण्डनीय अपराध है । यैसी अपराध करने वालो के उपर कानून बमोजिम कारवाही हरना चाहियें । नागरिक की मौलिक हक को सुनिश्चित करके मानवअधिकार की रक्षा करना चाहियें । समुदाय में अनमेल विवाह, बाल विवाह, बहु विवाह, जवर्जस्ती करण्ँी, बोक्सी के आरोप, चरित्रहीन की आरोप लगाकर महिलाए“ के उपर अनेक प्रकार की सामाजिक यातना देनी की क्रम अभी नही हटी है । विभिन्न कार्यस्थल में भी महिलाए“ प्रति करनेवाली व्यवहार के बारे में प्रशस्त जानकारी करना आवश्यक है । मर्यादा उल्लंघन करने वालों को सजाय भी देना चाहियें । यौन दुव्र्यवहार होती है तो हम महिलाए“ को घर के कमरें की अन्दर करके रख नही सकते है और रखना भी नही चाहियें । यह भी मानव अधिकार विरोधी कार्य है लेकिन कैसे महिलाए“ सरक्षित हो सकती ही प्रयत्न करना जरुरी है ।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz