अपना हाथ जगन्नाथ, बेचारा एसएसपी कैसे बताएगा ३४किलो सोना खाने वाली बडी मछली कौन है

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बिम्मी शर्मा (व्यग्ंय), वीरगंज , ७ फरवरी |पद, पैसा और पावर वह त्रिवेणी जिस पर नहाने के बाद हर कोई अपना हाथ जगन्नाथ करने के लिए उतावला होता है । यह पैसा, पद और पावर वह पवित्र त्रिवेणी नदी है जिसमें नहाने के बाद हर कोई अपना हाथ जगन्नाथ करके पुण्य कमाता है । सभी को इस त्रिवेणी में नहाने का मौका नहीं मिलता और जिसको मौका मिलता है उसका तो वारे–न्यारे हो जाते हैं । यह पावर है ही ऐसी चीज जिसे पाने के बाद गधा भी खुद को घोड़ा समझने लगता है । क्योंकि उसके हाथ में अलादीन का चिराग जो आ जाता है । इसी लिए वह बहती गंगा में हाथ धो कर अपना हाथ जगन्नाथ करने लगता है ।

इस का सबसे अच्छा उदाहरण हमारे देश की सरकार है । सरकार पर जिस पार्टी का राज चलता है उसी के पौ बारह हो जाते हैं और बांकी सब नौ दो ग्यारह हो जाते हैं । और जिसके हाथ में पद की कड़ाही और पैसा का चूल्हा आ जाता है वह पावर के चम्मच से उसको हिलाने और चलाने लगता है । सार्वजनिक लेखा समीति के सभापति किसी विपक्षी दल के नता को बनाने का नियम है पर इस सरकार ने नियम के खिलाफ जा कर अपना हाथ जगन्नाथ करते हुए अपनी ही पार्टी के नेता को सार्वजनिक लेखा समीति का सभापति बना दिया । पद और पावर का इससे बडा “सदुपयोग” और क्या होगा ? जब पांचो उगंली घी में और सिर कड़ाही में हो ।

यह सरकार ही नहीं इससे पहले की और बाद में आने वाली सरकार और उसके मंत्रीगण जब सत्ता सम्हालते हैं तब उनका आंख और दिमाग अपने मातहत के मंत्रालय और विभाग के कर्मचारी पर रहता है और मातहत के विभाग में कार्यरत कर्मचारियों का ट्रान्फसर करवा कर अपने दल और खुद के प्रति झुकाव रखने वाले कर्मचारियों को ले आते हैं जिससे पार्टी और अपना घर गुलजार रहे । जब अपना उपदेशक कर्मचारी खुद भी भ्रष्टाचार का तर माल उड़ा कर मंत्री और नेताओं को भी खिलाता है तब पता चलता है अपना हाथ जगन्नाथ किसे कहते हैं । पावर का चम्मच चलाना बहुत मजेदार होता है ।

कोई भी नेता मंत्री प्रधान मंत्री बनते ही अपना हाथ जगन्नाथ करने के लिए हैं । जब तक सत्ता में है वह खुद भी खाते है और अपने परिवार, कार्यकर्ता और दल को भी खिला, पिला कर हृष्ट पुष्ट करते हैं । अभी ३४ किलो सोना जो राजधानी के विमान स्थल में कुछ दिन पहले पकडाया था, वह भी तो अपना हाथ जगन्नाथ का ही परिणाम है । उसमे हमारे बेचारे अर्थ मंत्री ने खुद को छोटी मछली बता कर बडी मछली को पकड़ने के लिए इशारा किया । पर पकडे गए बेचारे एसएसपी । किसी बडी रसुख वाले नेता नें अपने पावर और पैसा का सदुपयोग करते हुए अपना हाथ जगन्नाथ कर ही लिया ।

विमान स्थल में कार्यरत किसी एसएसपी को पकड़ना मतलब सांप के निकल जाने के बाद लकीर पीटने जैसा ही है । अब बेचारा एसएसपी कैसे बताएगा कि कौन है ३४ किलो सोना खाने वाली बडी मछली । मछली तो शायद इस दरिया से निकल कर दूसरे में चली गई । पकड़ा गया कांटे में अड़का छोटा सा मेढ़क जैसा बेचारा एसएसपी । ३४ किलो सोने का बिस्किट खाने वाली मछली कितनी बड़ी होगी ? हम कल्पना भी नहीं कर सकते और मछली सब कुछ हजम करके किसी और दरिया में डुबकी लगाने चली गई । ऐसा ही होता है अपना हाथ जगन्नाथ होने पर ।

यह देश ऐसे ही भ्रष्ट देशों की सूची में अग्रणी स्थान पर नहीं है । यहां जिस को जहां मिला वह बहती गंगा मे हाथ साफ कर के खुद को शुद्ध और गंगा को भ्रष्ट बना देता है । पद में जाने या पावर मिलने का मतलब ही इस देश में उसका गलत प्रयोग करना है । इसी लिए सभी पद पाने के लिए लालायित रहते हैं । क्योंकि जब तक पद और पावर पास में नहीं है तब तक पैसा भी पास में नही आएगा । पद और पावर के कारण ही तो हमारे वर्तमान पीएम ने अपने पहले कार्यकाल में डेढ़ लाख रुपए के पलंग मे सोने की हिम्मत की थी । वैसे वह १७ हजार देश के नागरिकों के शव पर पहले ही सो चुके हैं तो डेढ लाख का पलंग कौन सी बड़ी बात है । यह तो अपना हाथ जगन्नाथ का कमाल है भई ।

और ओली जी ने भी तो वही किया जब वह प्रधान मंत्री थे । उन्होने भी तो हर सरकारी महकमें मे अपने दल के कार्यकता और चमचों को बिठाया ताकि तर माल उड़ाया जा सके । श्री केपी शर्मा ओली जी का तो नाश्ते का बिल ही ९ लाख रुपए का आया था । अब बताइए उन्होंने कितना अपना हाथ जगन्नाथ किया होगा ? विभिन्न दल के बीमार नेता को विदेशों में इलाज कराने के लिए देश के राज कोष से करोड़ों रुपए बांटा । यह भी तो अपना हाथ जगन्नाथ ही है । देश की मौजूदा राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने अपनी छोटी बेटी की शादी राष्ट्रपति भवन से कर के अपना हाथ जगन्नाथ किया । यह भी तो बहती गंगा में हाथ धोने जैसा ही है । हमारी लोक सभा स्पीकर श्रीमती ओनसरी घर्ती मगर नें तो सरकारी खर्च में ही एक पूरे विमान को ही अपने रिश्तेदारों से भर कर विदेश ले उंड़ी ।

यहां अपना हाथ जगन्नाथ तो एक अदना सा सरकारी कर्मचारी भी करता है । जब मालपोत या किसी सिडिओ आफिस में आप अपने किसी काम से जाईए वहां का क्लर्क या बाबु भी हाकिम बन कर सर पर खड़ा हो जाता है और जब तक पैसै नहीं ऐंठ लेता तब तक वह जोंक की तरह चिपका रहेगा । व्यापारी अपनी मन मर्जी से सामानों का भाव रखता है । आपको मन हो खरीदिए नहीं तो चलते बनिए । वह तो चार गुना भाव से ही सामान बेचेगा अपना हाथ जगन्नाथ करके । कर्मचारी हो या व्यापारी सभी को इस समाज और परिवार ने यही सिखाया है कि मौके में चौके और छक्के लगाओ । यानी कि अपना हाथ जगन्नाथ कर लो । कल किस ने देखा है आज में जियो और मौज करो और खुश रहो ।

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