अपनी जनशक्ति का प्रबन्धन

कुमार कौशल :आज के विश्व में पुरुष या महिला प्रबन्धक के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण और अक्सर अत्यन्त कठिन कार्य होता है, अपने कर्मचारियों के साथ काम करना या उन्हें अपने नियन्त्रण में रखना । इस कार्य के लिए कोई निश्चित फॉर्मूला बनाया नहीं गया है । लेकिन इस शताब्दी के अन्त तक समस्त विश्व इस तथ्य से अवगत हो जाएगा कि हर एक वस्तु के विकास में मानव ही एक संसाधन है । अतः आज मानव संसाधन विकास (एचआरडी) के सम्बन्ध में उल्लेख करना आवश्यक नहीं है । फिर भी प्रश्न उठता है कि हम लोग इसे किस प्रकार उपयोगी बनाएँ । किसी भी संगठन, वह बीमा कम्पनी हो या बैंकिंग या वित्तीय संस्था, सरकारी कार्यलय हो या गैर सरकारी संगठन (एनजीओ), औषध उद्योग हों वा उपभोक्ता के चिरकालिक उपयोग की सामग्रियाँ बनाने वाली या दैनिक उपभोग की सामग्री बनाने वाली कम्पनियाँ, शैक्षिक संस्थान, लघु एवं वृहत स्तरीय उद्योग, समाचार माध्यम हों या प्रकाशक वर्ग, यहाँ तक की राजनीतिक दलों की भी मुख्य सम्पदा जनशक्ति ही होती है । अतः सर्वप्रथम हमें उन्हें अपने अनुकूल बनाने और दिल एवं दिमाग से उन्हें अपनी जिम्मेदारी से अवगत कराने की आवश्यकता होती है ।
जनशक्ति को व्यवस्थित करने के कार्य में जो प्रक्रिया अपनाई जाती है, उसमें हमारे लोग, श्रमिक अधीनस्थ कर्मचारी, यहाँ तक कि वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य सस्दयों के लिए उपर्युक्त प्रशिक्षण की व्यवस्था का प्रावधान होता है । जिससे कि वह सभी संचार, समन्वय, नेतृतव, अनुशासन और नीति के कार्यान्वयन के महत्व को समझ सकें । इन सभी विषयों के प्रति सजग रहने पर ही हम स्वयं को एक कुशल प्रबन्धक या उद्यमपति के रूप में स्थापित कर सकते हैंं । इसका यह भी अर्थ हुआ कि एक उद्यमी या प्रबन्धक यदि अपने अधीनस्थ लोगों का सम्मान पाने में असमर्थ होता है तो उसके सामने प्रतिकूल स्थिति बने रहने का खतरा बना रहता है ।
अतः आगे बढ़ने के उपाय (सोपान) क्या हैं ?
पहला उपाय
हमें व्यवसायनुकूल चयन प्रक्रिया अपनानी चाहिए । इसके लिए अपनी परियोजना के लिए अत्यन्त उपर्युक्त जनशक्ति का चयन करें । इसका अर्थ हुआ– आवेदक के विगत कार्य की समीक्षा करना, अनुमोदनार्थ उल्लेखित नामों से जानकारी प्राप्त करना और पहले के नियोक्त के साथ पूछताछ करना । इसके अतिरिक्त वाञ्छित क्षेत्र में आवेदक के प्राप्त ज्ञान, उसका अनुभव और उस सम्बन्ध में उनके दृष्टिकोण एवं व्यक्तित्व को जानने के लिए उसके आमने–सामने बैठकर बातें करना अर्थात् इंटरव्यु लेना ।
दूसरा उपाय
हमे अपने नये कर्मचारी या श्रमिक को तालीम देनी चाहिए । प्रत्येक कर्मचारी या श्रमिक को कम्पनी, इसके उत्पादन, इसकी सेवाएँ, नीतियाँ और कार्यप्रणाली से अवगत कराने हेतु उन्हें प्रशिक्षित की जानी चाहिए । प्रत्येक श्रमिक के साथ यह पूछताछ की जानी चाहिए कि उन्होंने अपनी भूमिका, जिम्मेदारी और उनसे मिलने वाली सेवाओं के सम्बन्ध में प्राप्त उम्मीदों के बारे में ज्ञान प्राप्त कर ली है । इसके अलावा उन्हें यह भी स्पष्ट बता दी जानी चाहिए कि कम्पनी के मानक और नीति के अनुरूप यदि समय पर काम पूरा नहीं किया गया तो इसके क्या परिणाम होंगे ।
तीसरा उपाय
एक सुनियोजित कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए, जिसमें प्रत्येक श्रमिक या कर्मचारी हर एक परियोजना के प्रति अपनी विशेष जिम्मेदारी से अवगत हों । यदि कर्मचारीगण एक टीम के रूप में काम करते हैं तो इस बात को सुनिश्चित कर लें कि उनकी पृष्ठभूमि और योग्यता एक दूसरे के पूरक हैं और सदस्यों के बीच कोई व्यक्तिगत संघर्ष की भावना न हो ।
चौथा उपाय
हमें श्रमिकों को हर वक्त कुशल और सुरक्षित वातावरण में काम करने के लिए आवश्यक संसाधन और उपकरण उपलब्ध करानी चाहिए ।
पाँचवाँ उपाय
एक लक्ष्य और मापदण्ड की सृजना करें । अपनी कार्ययोजना के अंग के रूप में अपनी जनशक्ति का नियमित रूप में मूल्यांकन करें और पता करें कि आपका लक्ष्य पूरा हो पा रहा है या नहीं । यदि इस मामले में समस्या उत्पन्न हो रही हो तो इस पर तत्काल ही ध्यान दें और स्थिति को सुधारने की दिशा में सही कदम उठाएँ ।
छठा उपाय
समस्या को यथाशीघ्र निपटाएँ । यदि कर्मचारियों के बीच समस्या विद्यमान है तो प्रत्येक व्यक्ति के साथ विवाद समाधान के सिलसिले में बातें करें ताकि वह अपनी–अपनी शिकायतें या उलझनों को सामने रख सकें । उनकी बातों पर गौर करें, समस्या समाधान की दिशा में कम्पनी की नीति को देखें और कर्मचारियों से पुनः विचारविमर्श करें कि समस्या का निराकरण किस प्रकार की जाए ।
सातवाँ उपाय
यह भी सुनिश्चित करें कि कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के एवज में समय पर पूरी–पूरी भुक्तानी हो ।
आठवाँ उपाय
अपने श्रमिक एवं कर्मचारियों के लिए सुलभ रहें । उन्हें यदि अपने कार्यों के सम्बन्ध में कुछ पूछताछ करनी हो या अपने सहकर्मियों के सम्बन्ध में कुछ कहने की आवश्यकता महसूस हो तो वे आपसे किस प्रकार मिलें, इसके सम्बन्ध में भी उन्हें जानकारी होनी चाहिए ।
नौवाँ उपाय
उच्च स्तर के कार्यसम्पादक को सम्मान और पुरस्कृत करें । यह दृष्टिकोण हमारी नजरशक्ति को उच्चतम स्तर तक काम करने और समस्त कर्मचारियों के मनोबल को ऊँचा रखने में प्रेरक हो सकता है ।
हमें यह नहीं समझना चाहिए कि जनशक्ति का प्रबन्धन एक सामान्य कार्य है । इस में उपर्युक्त निगरानी, पर्याप्त अनुभव और इन सबसे ऊपर कठोर परिश्रम और लगनशीलता की आवश्यकता होती है ।
(अंग्रेजी से अनुदित)
अनुवादक ः प्रकाशप्रसाद उपाध्याय

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