अपराध अनुसन्धान में पुलिस का रवैया टाइम पास, फाइल बन्द

binay dikshitपिछले १० वर्षों से जिले में दर्जनों ऐसे अपराध के घटनाक्रम सामने आए हैं, जिसमें कई घटनाओं में अभी तक पुलिस अनुसन्धान जारी है । दोषियों का पता नहीं, घटना विवरण भी पर्ूण्ा रूप से पुलिस के पास नहीं, जिनके लोग इन घटनाओं में मारे गए, उनकी उम्मीद अभी तक इस बात पर अटल है कि उनका अपना अभी तक जीवित है ।
पुलिस ने घटना अनुसन्धान के नाम पर सिर्फटाइम पास किया, घटना के बाद फिर कभी पुलिस ने अनुसन्धान का कोई तथ्य र्सार्वजनिक नहीं किया । लोगों की उम्मीद फिर भी पुलिस से नहीं हटी लेकिन अब जब कुछ बांकी नहीं बचा तो लोगों ने पुलिस के खिलाफ मुँह खोला । घटना के तत्काल बाद होने वाले तोडÞफोडÞ विवादों से बचने और अपनी कमी को छिपाने के लिए पुलिस नें विभिन्न हथकण्डे अपनाए, जैसे अनुसन्धान जारी है, पुलिस की नई टीम नियुक्त की गई, तहकीकात अन्तिम चरण में है, हम बिलकुल अपराधी के करीब हैं, लेकिन अन्ततः कोई तथ्य बाहर नहीं आता । लोगों का अक्रोश और गुस्सा जब बढÞने लगा तो हिमालिनी ने पिछले १० वर्षों की घटना क्रमपर नजर दौडÞाने की कोशिश की है ।
लोग दिन बीतने के साथ घटना को भुलाते रहते हैं लेकिन हिमालिनी ने उन सभी घटनाओं को फिर जनता के सामने लाने की कोशिश की है जिनकी फाइल पुलिस ने करीब-करीब बन्द कर दिया है ।
२०६२ साल फाल्गुन २२ गते नेपालगन्ज के ज्वैलरी ब्यवसायी दीपक हेमकार के पूरे परिवार की गला काट कर निर्मम हत्या कर दी गयी थी । दीपक के माता पिता, दादी, नौकर, कुत्ता, और तोता सभी का गला धडÞ से अलग पाया गया था । घटना में दीपक पत्नी भारत लखनउ निवासी अकेली बची थी, क्योंकि वारदात के समय वह मैके गई हर्ुइ थी ।
उनका मैके जाना और उसी समय घटना हो, यह किसी योजना की विसात तो नहीं, यह कहना उस समय कठिन था । लेकिन घटना के महीना भर के भीतर पत्नी सारी सम्पत्ति घर आदि बेचकर लखनउ चली गई । अपराधियों ने घटना के दौरान करीब २० लाख की नगदी तथा सोना चाँदी भी दुकान से लूटा था । पुलिस ने तत्काल पोष्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कहा था कि परिवार के सभी सदस्य को कोई नशीली पदार्थ खिला कर पहले बेहोश किया गया और फिर बाद में सभी का गला काट दिया गया ।
घटना की जाँच के लिए व्यापारियों ने नेपालगन्ज में हंगामा खडÞा किया और केन्द्रीय अनुसन्धान ब्यूरो ने जाँच का ठेका लिया । कुत्ते सहित की टीम ने घटना स्थल को सिल किया और हप्तों तक अनुसन्धान किया । लेकिन घटना को हुए एक दशक होने को है, पुलिस घटना के किसी भी पक्ष को उजागर करने में नाकाम रही है ।
आम लोगों के जेहन में अभी भी वह दिल दहला देने वाला मंजर घूँमता रहता है, आखिर कौन था हत्यारा, क्या दीपक की पत्नी का हाथ था – या किसी और की साजिश – लेकिन पुलिस का वही रटा रटाया जबाब है कि ‘अनुसन्धान जारी है ।’
दूसरी घटना है- नेपालगन्ज न्यूरोड स्थित एक होटल में २८ दिसम्बर २०१२ में  नक्कली नोट के कारोबारी मजिद मनिहार की हत्या । मजीद को सिर पर गोली मारी गई थी । होटल संचालक ने बयान में कहा था कि ३ लोग एक रूम में थे और रात में कब गोली मारी और चले गए किसी को पता नहीं चला । घटना स्थल से कुछ नकली नोट बरामद हुए, जिसके आधार पर पुलिस ने मजीदको नकली नोट का कारोबारी बताया ।
जो अभी तक पकडÞे नहीं गए या जिनकी पुलिस को कोई जानकारी नहीं है, फरार २ लोग कौन थे – क्या ये नोट कारोबारियों का विवाद था – या किसी भारतीय अनुसन्धान अधिकारियों का काम था – पीडिÞत परिवार को अब भी जवाब नहीं मिला । नकली नोट के कारोबारी का आरोप लगाए गए मजीद के परिवार की दशा आज ऐसी है, जो लिख कर बयाँ नहीं किया जा सकता, मजीदको एक बदनाम मौत देने वाले लोग कहाँ गए – आम आदमी की समझ से यह बात आज भी बाहर है ।
उसके बाद नेपालगन्ज के एक डेरी संचालक की रहस्यमय मौत हो गई, जिसका शव लावारिस पडÞा हुआ मिला । बाद में पोष्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अपना स्टेटमेन्ट जारी किया और कहा कि डेरी संचालक की मौत हृदयघात के कारण हर्ुइ है । हालांकि परिवार ने इस जवाब को सन्तोषजनक नहीं माना । आखिर क्या था मौत का कारण उस परिवार के लिए आज भी एक रहस्य है ।
हाल ही में एक घटना ने फिर एक बार नेपालगन्ज को दहला दिया । नेपालगन्ज वार्ड नं.३ स्थित एक व्यक्ति का गला काटकर हत्या कर दी गयी । घटना की खबर से पूरा बजार दहल उठा । मृतक का एक हाथ काटकर हत्यारों ने थोडÞी दूर पर फेंक दिया था । घटना से कम, लेकिन उच्च सुरक्षा क्षेत्र में हुए इस अन्जाम से लोग पुलिस पर नाराज दिखे । घटना उस जगह घटी थी जहाँ २४ घण्टे पुलिस सुरक्षा मजबूत बताई जाती है । घटनास्थल से ५० मीटर की दूरी पर पुलिस बिट है और पास में बागेश्वरी मन्दिर की पुलिस चौकी भी ।
डेढÞ महीने पहले हुए इस काण्ड को ठण्डा करने के लिए पुलिस ने अनुसन्धान का नाटक करना शुरु किया । जिसका शव मिला था, वह कौन था – यह आज भी सवाल बना हुआ है । पुलिस ने घटना की जाँच के लिए ३ सौ पुलिस तैनात किया, अनुसन्धान के अलग-अलग तरीके मीडिया में आए, १५ दिन शव पोष्टमार्टम रुम में रखा था, दोनों हाथ के अंगूँठों पर स्याही का निशान था । यानी किसी ने मृतक का अंगूठाछाप भी किसी कागज पर लगवाया था, लेकिन घटना से पर्दा नहीं उठा और पुलिस ने अज्ञात मौत करार दिया, लाश को दफना कर फाइल बन्द कर दिया ।
पुलिस मौत का कारण तो दूर मृतक का नाम भी पता नहीं लगा सकी । मृतक कहाँ से आया था – हत्या क्यों हर्ुइ – अपराधी कौन है – आदि सवाल आज भी ज्यों के त्यों हैं ।
एक महीने पहले फिर एक घटना सामने आयी, जाजरकोट जिला खलंगा निवासी १८ वषर्ीय विराट शाही की रहस्यमय मौत हर्ुइ । नेपालगन्ज विपी चौक स्थित नाइटस्टार डान्सबार में सुरक्षागार्ड के रूप में कार्यरत शाही की मौत का कारण पुलिस ने हृदयघात बताया । परिवार वालों के लिए यह सन्तोषजनक जबाब नहीं था लेकिन आनफानन में पुलिस ने घटना को छिपा दिया और टेन्सन से बच निकली ।
इस घटना के एक हप्ते बाद जिले के कटकर्ुइया गाबिस में एक अज्ञात शव की खबर मिली । भारतीय सीमा के नजदीक पडÞी उस लाश को पुलिस ने पोष्टमार्टम कराना भी उचित नहीं समझा और लाश का अन्तिम संस्कार कर दिया ।
स्पष्ट ढंग से एक बात तो साफ है, कि पुलिस अपनी कमजोरी को अनुसन्धान का नाम देते आ रही है ।
कहाँ है आमिर अन्सारी –
हर दिन घटना की फाइल लेकर जिला प्रशासन और जिला पुलिस पहुँचना उसकी ड्युटी बन गई है । नया पुलिस अधिकारी आया कि उसकी आशा और जाग उठती है कि शायद भाई का कोई पता चल सके । घटना के बाद अपहरणकारियों ने भाई की मौत की खबर भी दी थी लेकिन उसका दिल अब भी गवाही देता है कि भाई जिन्दा है ।
घटना २०६९ साल अषाढ २६ गते की है । नेपालगन्ज नगरपालिका वार्ड नं.१० निवासी २२ वषर्ीय मुन्नु उर्फमोहम्मद आमिर अन्सारी का अपहरण हुआ । खबर सुनकर परिवार त्रस्त हो उठा, अपराधियों ने फिरौती के १० लाख की मांग की और परिवार ने वह रकम भी चुकाई और फिर क्या था, उन्हें बेसब्री से आमिर का इन्तजार था । लेकिन वह इन्तजार अब भी जारी है । पता नहीं कब तक जारी रहेगी ।
आमिर के बडेÞ भाई मोहम्मद ताहिर अन्सारी ने पुलिस को अनुसन्धान के लिए प्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया । पुलिस ने घटना से सम्बन्धित फोन रेकार्ड निकाले और अनुसन्धान का काम शुरु किया । दो वर्षमें अनुसन्धान के नाम पर दो लोग पकडेÞ गए जो बाद में अदालत से सामान्य अवस्था में रिहा कर दिए गए ।
ताहिर ने बताया पुलिस अब भी सिर्फअनुसन्धान जारी बता रही है । अनुसन्धान पूरा होने की कहीं बात नहीं आती पुलिस कहती है अब आशा छोडÞ दीजिए लेकिन ताहिर का मन अब भी भाई के इन्तजार में व्याकुल है ।
जिले के पुलिस प्रवक्ता डीएसपी सुशील सिंह राठौर ने हिमालिनी से बातचीत में बताया कि अनुसन्धान एक प्रक्रिया है, जो केश पर्ूण्ा रूप से सम्पन्न नहीं हुआ उसे अनुसन्धान के क्रम में माना जाता है । उन्होने बताया कि अदालत ने जिसे दोषी करार दिया है, उसे भी पकडÞना पुलिस का ही दायित्व और जिम्मेवारी है ।
जहाँ अपराधी पुलिस के पकडÞ क्षेत्र में होता है, वहाँ जल्द सफलता मिलती है । उन्होने कहा कि यदि अपराधी भारत जैसे दूसरे देश में छिपा हुआ है तो उसके लिए समय लगना स्वाभाविक है । डीएसपी राठौर ने बताया कि बाँकी घटनाओं के सम्बन्ध में पुलिस निरन्तर प्रयासरत है, समय लगने का मतलब फाइल बन्द होना नहीं है ।
यह है अनुसन्धान का नतीजा
जिला पुलिस कार्यालय बाँके ने २०६५ साल से हाल की स्थिति तक ३० मुद्दों पर अनुसन्धान जारी रखा है, जिनका पूरा होना या न होना तय नहीं है । जिला पुलिस के रेकार्ड अनुसार आर्थिक वर्ष२०६५, ०६६ के ३, ०६६, ०६७ के ८, ०६७, ०६८ के १२, ०६८, ०६९ के ६, ०६९, ७० का १ मुद्दा अनुसन्धान के क्रम में हैं । जिस में अधिकाँश घटनाओं के बारे में पुलिस खुद अनभिज्ञ है । मुद्दा विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि घटना क्रम पुराना होने के कारण ज्यादातर मुद्दों में अनुसन्धान में अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हो पायी है ।
आर्थिक वर्ष२०६९, ७० में हत्या २२, और २०७०, ७१ में हत्या के १० मामले सामने आए हैं । इन घटनाओं पर ताजातरीन अनुसन्धान जारी है, लेकिन पुलिस के हाथ में मृतक के नाम के अलावा कुछ भी नहीं है ।

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