अपहरण का उद्योग
राकेश कुमार मिश्रा

पश्चिम तर्राई के जिलों में इन दिनों अपराध, अपहरण, फिरौती, हत्या का तो जैसे सिलसिला ही शुरु हो गया है । कभी भूमिगत संगठन के नाम पर अपराधी समूहों द्वारा अपहरण के धंधे को उद्योग धंधे में परिणत कर दिया गया । अपहरण के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अपहरकर्ताओं ने फिरौती का रकम लेकर भी अपहरित की हत्या कर दी है ।
नेपालगंज के दो स्कूली छात्रों लीलाधर भट्ट व कपिल द्विवेदी को पिछले साल असोज १४ गते को अपहरण कर लिया गया था । फिरौती के रुप में १० लाख रुपये लने के बाद भी उनकी निर्ममतापर्ूवक हत्या कर दी गई थी । नेपालगंज के ही हिमाल बुढा की फिरौती के लिए रकम माँगने के बाद हत्या कर दी गई ।
नेपालगंज के ही त्रिभुवन चौक के व्यापारी गौरवकृष्ण रस्तोगी की पिछले वर्षअसार ७ गते अपहरण कर लिया गया था । रस्तोगी के परिजनों ने हेटौडा पहुँचकर अपहरणकारी द्वारा फिरौती के रुप में मागी गयी ७ लाख रुपये देने के बावजूद आभी तक उनका कोई अता पता नहीं है । कुछ लोगों का मानना है कि फिरौती की रकम लेने के बावजूद अपरणकारियों ने उनकी हत्या कर दी है और लाश को ठिकाने लगा दिया ।
पिछले र्ढाई सालों में सिर्फबाँके जिले में ही अपहरण के ३१ घटनाओं को अंजाम दिया गया । अपराध खुलने के डर से अपहरितों की या तो हत्या कर दी जाती है या फिर उन्हें लापता कर दिया जाता है । नेपालगंज के बुद्धिजीवी संगठन से जुडे लोग बताते हैं कि भूमिगत सशस्त्र संगठन के नाम पर सीमा पार के अपराधियों से मिलकर यहाँ के कुछ असामाजिक तत्व अपहरण, डकैती, फिरौती, जबरन वसूली को छोटे-मोटे उद्योग के रुप में परिणत कर दिया है ।
पुलिस का कहना है कि अपहरण के ज्यादातर मामलों मे पडोसी, जान-पहचान व गरीबी रिश्तेदारों की ही संलग्नता होती है । ऐसे में पुलिस को सही जानकारी नहीं दिए जाने की वजह से भी अपराधियों तक पुलिस की पहुँच नहीं हो पाती है ।
कोहलपुर के पाँच वषर्ीय स्कूली छात्र के अपहरण में भी कुछ ऐसा ही हुआ । लेकिन सही समय पर पुलिस को जानकारी मिलने के कारण बच्चे को सकुशल रिहा कराने में पुलिस सफल रही । परन्तु रस्तोगी के अपरहण के मामले में पुलिस ने कुछ भी दिलचस्पी नहीं दिखाई । अपने बेटे को अपहरणमुक्त बनाने के लिए कृष्णमुरारी रस्तोगी ने पुुलिस प्रशासन से काफी गुहार लगाई । मानवअधिकारवादी से पत्रकारों तक को कहा पर कोई सुनवाई नहीं हर्ुइ । इधर कई ऐसी घटनाएँ हरुइ जिसमें फिरौती लेने के बाद अपहरित व्यक्ति को मुक्त कर दिया गया ।
बाँके इन्द्रपुर के रोहित कुमार वर्मा को गत पुस २० गते गााव के कुछ युवकों द्वारा अपहरण कर लिया गया था । बाद में तीन लाख रुपये फिरौती लेकर रिहा किया था । कोहलपुर के पाँच वषर्ीय सुशान्त अधिकारी को ७ बैशाख में अपहरण कर पाँच लाख रुपये फिरौती मांग की थी । लेकिन पुलिस ने छापामारी कर बच्चे को छुडÞवा लिया था ।
इसी तरह महेन्द्र बहुमुखी कैम्पस प्रमुख राजितराम पाठक की असार २० में अपहरण कर लिया था । बाद में १५ लाख रुपये फिरौती लेकर छोडा था । अपहरण के कई मामलों में पुलिस ध्यान भी नहीं देती । ऐसे ही लोगों में जागरुकता की भी कमी है । पुलिस कहती है कि अपहरण होने के तुरन्त बाद उसे बिलकुल सही सही जानकारी नहीं दिए जाने की वजह से अपहरणकारियों का मनोबल बढÞता है । उन्हें फिरौती की रकम मिल जाती है । और पुलिस उन्हें गिरफ्तार भी नहीं कर पाती है । लेकिन पुलिस की इस दलील से आम पीडिÞत लोग सहमत नहीं है । दरअसल उन्हें पुलिस वालो पर भरोसा नहीं रहा । अपहरण के कई वरदात में तो पुलिस की भी संलग्नता होने के कारण अपहरित किए गए लोगों की जान खतरे में पडÞ जाती है । कपिल द्विवेदी और लीलाधर भट्ट के मामले में ऐसा ही हुआ । कई रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस के कुछ दबंग अधिकारी और जवान अपराधियों को अपहरण के लिए उसकसाते हैं और फिरौती की रकम में हिस्सेदारी पाते हैं ।

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