अपहरण की अनोखी शैली

शायद यह अपहरण की अनोखी शैली है ऐसे अपहरण के बारे में आपने शायद ही पहले कभी सुना होगा अपहरणकारियों ने जिन लोगों के अपहरण की योजना बनाई थी उन्हें बकायदा हवाई जहाज का टिकट भेजकर ना सिर्फबुलाया जाता है बल्कि ५ सितारा होटलों में रख कर जमकर खातिरदारी भी की थी एक तरफ अपहरित लोगों की खातिरदारी की जा रही थी और उन्हें इस बात की भनक भी नहीं लग पाई थी कि उनका अपहरण हो गया है और दूसरी तरफ अपहरणकारियों ने उनके घरवालों से फिरौती भी मांगनी शुरू कर दी थी
दरअसल इस सारे अपहरण के नाटक का पर्दाफाश नेपाल पुलिस ने किया है भारत की राजधानी नई दिल्ली से दो व्यापारियों को काठमाण्डू बुलाकर पोखरा में डिलिंग करने के बहाने उन्हें पोखरा पहुंचाया गया और बाद में एक जंगल में छिपाकर रखा गया जिसके बाद अपहरण में पडने की बात उन दोनों व्यापारियों को मालूम चल पाया नेपाल से एकमुखी रूद्राक्ष सहित अन्य बहुमूल्य धातुओं का व्यापार करने के लिए अपहरणकारियों ने दिल्ली के दो व्यापारी जोगिन्दर पाल और सलामत अली को काठमाण्डु बुलाया गया इसके लिए बकायदा अपहरणकारियों ने इन दोनों व्यापारियों को नई दिल्ली से काठमाण्डू तक आने के लिए नेपाल एयरलाईन्स कर्ीर् इ-टिकट भी भेजी थी अपहरणकारियों के इसी झांसे में पडकर दिल्ली के दोनों व्यापारी नेपाल की राजधानी काठमाण्डू पहुंच गए
इन दोनों का अपहरण करने के बाद इनके घर वालों से अपहरणकारियों ने ५० लाख भारतीय रूपये की डिमाण्ड की थी लेकिन नेपाल पुलिस की टीम ने इन अपहरणकारियों को बीच में ही गिरफ्तार कर उनकी योजनाओं पर पानी फेर दिया काठमाण्डू पुलिस ने १३ जुलाई को एक पत्रकार सम्मेलन का आयोजन कर इस पूरे अपहरणकाण्ड का पर्दाफाश किया है पुलिस ने पत्रकार सम्मेलन में इस अपहरण काण्ड में जुडे ६ योजनाकारों में से चार भारतीय नागरिक ही शामिल हैं जिनमें एक महिला भी है
कैसे बनी अपहरण की योजना
दरअसल इस बार रची गयी अपहारण की योजना डेढ महीने पहले दो भारतीय नागरिकों के अपहरण की योजना के साथ जुडा हुआ है डेढ महीने पहले ही इन्हीं अपहरणकर्ताओं ने मनीष कुमार और राजेश का पहरण कर नेपाल के दक्षिणी जिले के एक जंगल में रखा था बारा जिले के अमलेशगंज के जंगलों में अपहरणकारियों के आपस में हर्ुइ झगडा के बाद मनीष तो अपहरणकारियों के चंगुल से भागने में सफल रहा लेकिन राजेश उनकी गिरफ्तार से नहीं बच सका जब अपहरणकारियों ने राजेश से फिरौती की मांग की तो राजेश ने कहा कि फिरौती के लिए उसके पास पैसा तो नहीं है लेकिन वह किसी दूसरे व्यापारी के बारे में उन्हें बता सकता है जो कि उन्हें पैसे दे सकता है राजेश के ही कहने पर अपहरणकारियों ने दिल्ली के व्यापारी जोगिन्दर पाल और सलामत अली के अपहरण की योजना बनाई थी
इस अपहरणकाण्ड का मुख्य सरगना भारत के देहरादून का रहने वाला ३८ वषर्ीय मंजिल राय है इस अपहरण में उसका साथ दिया था भारत झारखण्ड के ६९ वषर्ीय शिवनारायण यादव, ३८ वषर्ीय समेल हेम्ब्रम, २३ वर्षया रिया दास इसके अलावा नेपाल के जिन लोगों ने इस अपहरण को अंजाम देने में भूमिका निभाई थी उनमें पोखरा के ३५ वषर्ीय राकेश शाक्य और ३४ वषर्ीय सन्तोष घिमिरे रिया आसाम की रहने वाली है और ६ महीने पहले ही पोखरा में आकर एक रेष्टुरेण्ट में काम करती थी जब उसकी पहचान इन अपहरणकार्ताओं से हर्ुइ यादव और हेम्ब्रम भी दर्ुलभ वस्तुओं के व्यापार के सिलसिले में मंजिल से मिला था मंजिल का मुख्य सहयोगी संतोष नेपाली सेना का भगौडा हवल्दार है इनमें से मंजिल काठमाण्डू में बैठकर सबको हिदायत देता था और अपहरणकारियों के घर वालों से फिरौती की डिलिंग भी वही करता था पकडा गया राजेश वही व्यापारी है जिसने दिल्ली के दोव्यापारियों के बारे में बताया था राकेश शाक्य सुनील केसी और सूरज थापा को पुलिस ने अपहरित व्यापारियों की रेख देख करने के आरोप में पकडा है
अपने सहयोगी व्यापारी राजेश की बातों में आकर दिल्ली के दोनों व्यापारी नेपाल आकर व्यापार करने को तैयार हो गये राजेश ने ही उन दोनों को नेपाल एयरलाईन्स का टिकट भी मेल से भिजवा दिया था जोगिन्दर पाल और सलामत अली दोनों ही नेपाल एयरलाईन्स के विमान से ७ जुलाई को काठमाण्डू पहुंचे एयरपोर्ट पर खुद मंजिल राय खुद को विक्रम राणा बताकर उनका स्वागत किया था बाद में उसने कहा कि कि काठमाण्डु में डिलिंग करने में कठिनाई है इसलिए उन्हें पोखरा जाना पडेगा लाल रंग की एक सेण्ट्रो कार पर चढकर तीनो काठमाण्डू से पोखरा के लिए रवाना हुए पोखरा के एक होटल में उन्हें रखकर अगले दिन ताहाचल के जंगल की ओर ले गए इसी बीच पहले से बनी योजना के मुताबिक मंजिल राय द्वारा किराए पर लिए गए घिमिरे शाक्य केसी और थापा ने उनकी गाडी को रोकर दोनों व्यापारी सहित गिरोह के मुखिया को भी अपने नियंत्रण में ले लिया दोनों व्यापारियों को तो पहले बुरी तरह मारा पीटा गया और उनके पास रहे भारतीय रूपये और उनके शरीर पर रहे अंगूठी और चेन सब लूट लिया उन्हें फिर जंगल में ही बांधकर रखा गया
इसी बीच अपहरण काण्ड का मुख्य योजनाकार काठमाण्डू आकर उन व्यापारियों के घर वालों को फोन कर ५०-५० लाख रूपये फिरौती की मांग करने लगा पुलिस ने बताया कि मंजिल ने ००-९७७-९८१३८४२०५५ और ९८१३८४२०५६ नम्बर के मोबायल से फिरौती की मांग कर रहा था ५०-५० लाख से बात शुरू हर्ुइ लेकिन बाद में २५-२५ लाख रूपये की फिरौती पर बात पक्की हो गई इस पैसे को मंजिल राय और राजेश के बैंक खातों में रखने के लिए कहा गया था इसी डिल के आधार पर अपहरणकारियों के चंगुल में रहे दोनों व्यापारियों के घर वाले ९ जुलाई को काठमाण्डू आने की बात तय कर लिया था इधर मंजिल राय २५-२५ लाख पर डिलिंग तय की थी लेकिन दूसरी तरफ उसके ही गर्ुगों ने जिनके चंगुल में व्यापारी थे उनमें से संतोष घिमिरे ने भी व्यापारियों के घरवालों से अलग से ही डिलिंग करना शुरू कर दिया था फिरौती की रकम उन्हें ही मिलनी चाहिए इसी शर्त के साथ उन चार युवकों ने दोनो अपहरित व्यापारियों को पोखरा के पृथ्वी चौक पर रहे होटल तिरूपति में लाकर रखा
अपहरित व्यापारियों को रखने के लिए अपहरणकारियों ने इस होटल के कमरा नम्बर १०१, १०३ और १०५ बुक किया था इन चारों युवकों ने फिरौती के लिए महज ४-४ लाख भारतीय रूपये पर ही डिलिंग की थी लेकिन इसके लिए उन्होंने व्यापारियों के घरवाले को काठमाण्डू से पोखरा आने को कहा था ९ जुलाई को ही पोखरा के पृथ्वी चौक पर फिरौती लेकर आने को कहा गया व्यापारियों के घरवाले ने इस बात की खबर पुलिस को दे दी काठमाण्डू पुलिस के एसपी ने एक इंस्पेक्टर के कमाण्ड में विशेष टीम बनाई और परिजनों के साथ पोखरा की तरफ गए अब पुलिस ने अपहरणकारियों को बचाने के लिए प्लान बनाया और उसी के मुताबिक चलने के लिए उनको कहा गया पुलिस के बिछाए जाल में अपहरणकारी फंस ही गए ९ जुलाई की शाम को पुलिस ने पहले से ही उस जगह पर घेराबन्दी कर दी जहां फिरौती की रकम अदा की जानी थी पुलिस के द्वारा बनाई गई प्लानिंग के साथ व्यापारियों के घर वालों ने खाली सूटकेश लेकर अपहरणकारियों को जैसे ही देना चाहा पुलिस ने फिरौती की रकम लेने आए दो अपहरणकारियों को धर दबोचा उन्हीं के बताए हुए होटल से दोनों भारतीय व्यापारियों को पुलिस ने सकुशल मुक्त करा लिया लेकिन बांकी बचे दो और अपहरणकारी मोटर र्साईकिल लेकर भागने में सफल हो गए
पोखरा से दोनों युवकों को पकडने के बाद अब उनको लेकर पुलिस काठमाण्डु आ गई काठमाण्डू पहुंचकर घिमिरे ने मंजिल राय को फोन कर कहा कि उन दोनों व्यापारियों को पोखरा में रखना काफी मुश्किल हो रहा है इसलिए उन्हें लेकर वो काठमाण्डू पहुंच गया है उधर पोखरा में रहे एक और अपहरणकारियों राकेश शाक्य को भी काठमाण्डू बुला लिया गया काठमाण्डू आ रहे शाक्य को पुलिस ने काठमाण्डु के सीमा नागढुंगा से ही ११ जुलाई की सुबह ही गिरफ्तार कर लिया अब पुलिस को इस पूरे अपहरणकाण्ड के मुख्य योजनाकार मंजिल राय की तलाश थी पुलिस ने अपने गिरफ्त में रहे राकेश शाक्य से राय को फोन करवा कर उस होटल का बिल भरने के लिए बुलाया जिसमें वह रहा था लेकिन राय खुद ना आकर उसके गिरोह में रहे रिया दास नमक युवती को भेजा १२ जुलाई को बालाजु के रिवरर्साईड होटल में रिया पैसे लेकर आई तो पुलिस ने उसको भी अपने नियंत्रण में ले लिया उसी युवती के बयान पर पुलिस ने राय के बारे में जानकारी इकठ्ठी की तो पता चला कि वह काठमाण्डू के क्षेत्रपाटी स्थित सिर्द्धार्थ गेष्ट हाऊस में रह रहा है पुलिस ने जैसे ही वहां छापा मारने के लिए पहुंची तब तक राय वहां से फरार हो चुका था उसे इस बात की भनक लग गयी य्ही कि पुलिस उसका पीछा कर रहा है
लेकिन पुलिस ने भी उसका पीछा नहीं छोडा उसके द्वारा प्रयोग की जाने वाली मोबायल फोन से आखिरकार उसका लोकेशन ट्रेस हो गया और अन्ततः बौद्ध स्तूप के पास रहे एटीएम से पैसे निकालने के लिए आए मंजिल राय को पुलिस पकडने में कामयाब हो गई राय के साथ ही उसके साथ आए दो और भारतीय नागरिक यादव और हेम्ब्रम भी गिरफ्तार हो गया पुलिस ने बताया कि इस पूरे अपहरणकाण्ड में भूमिका निभाने वाला भारतीय नागरिक राजेश और व्यापारियों को अपहरण के समय रेख देख करने वाला दो नेपाली युवक फरार हो गया है पकडे गए बांकी सभी अभियुक्तों पर अपहरण का मामला दर्ज कर मुकदमा चलाया जाएगा
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