अब एक ही रास्ता : आजाद मधेश

मनोज बनैता, लाहान १६ कात्र्तिक ।

स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन सिरहा द्वारा शुभ दीपावली तथा छठ पर्व के उपलक्ष्य में शुभकामना आदान प्रदान एवं मधेश मुद्धा विषयक विचार गोष्ठी तथा अन्र्तक्रिया कार्यक्रम किया गया है । गठबन्धन के जिला संयोजक केदार यादव की अध्यक्षता में उक्त कार्यक्रम किया गया । चल भैया आजादी लें, चल बहना आजादी लें गीत के साथ शुरु किए गए उक्त कार्यक्रम में ज्ञात एवंम अज्ञात मधेशी शहीदाें को नमन किया गया । लाहान के मारवाड़ी सेवा सदन मे आयोजित उक्त कार्यक्रम में किसान वर्ग से लेकर विद्धान वर्ग की उल्लेखनीय उपस्थिति रही । हजारों की संख्या में आए हुए लोगो का बस एक ही नारा था स्वतन्त्र मधेश देश । विलायत के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पिएच.डी किए हुए तथा मधेश का इतिहास, वीर मधेशी, मधेश स्वराज और वैराग से बचाव तक किताब लिखने वाले वैज्ञानिक डा.सि.के राउत के नेतृत्व में चल रहे आजादी आन्दोलन में लोगो को विश्वास बढता हुआ दिखाई दे रहा है ।

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अधिकांश वक्ताओं ने कहा कि संविधान भी जारी हो गया मंत्री मंण्डल भी विस्तार किया गया लेकिन मधेशीयों ने क्या पाया ? सिर्फ धोखा । खसवादीयों ने वार्ता सम्झौता और संविधान संशोधन के नाम पे मधेशीयों को सिर्फ धोखा दिया है । उनलोगो ने कहा कि वार्ता और सम्झौता एक अनन्त गोलचक्कर है, नेता लोग मंत्री बनेंगे, पर मधेशीयों को कोई अधिकार नहीं मिलेगा इसलिए अब आरपार होगा ।

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प्रमुख अतिथि कैलाश महतो ने कहा कि “अब मधेश के पास सिर्फ यहि विकल्प है मधेशी लाखों की संख्या में सड़क पर आए और स्वराज घोषणा करें । या तो जनमत संग्रह करवाए । जनमत संग्रह के वाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा । उन्होंने ये भी कहा कि मधेशी मोर्चा के नेतागण अपने आप को बदले, थोड़ा हिम्मत जुटाएँ । सिर्फ भारत पर निगाहें जमाकर बैठे ना रहे क्यँुकि भारत एक शक्तिशाली लोकतान्त्रिक राष्ट्र है । वो भला किसी देश के आन्तरिक मामला में हस्तक्षेप क्यूँ करेगा । जो करना है, मधेशीयों को करना होगा । भारत एक असल मित्र की भूमिका अवश्य निर्वाह करेगा ।”

मानव अकिारवादी राजकुमार राउत ने कहा कि “नेपाल सरकार मानवाधिकार के भक्षक के रुप में प्रस्तुत हुआ है । मधेश आन्दोलन के क्रम में घोर मानवाधिकार हनन इसका प्रमाण है । अगर इस सरकार मे अभी भी थोड़ी इन्सानियत बाँकी है तो मधेशीयों के शान्तिपूर्ण आन्दोलन को सम्वोधन करें ।”

नेपाल सदभावना पार्टी (गजेन्द्रवादी) के राष्ट्रिय अध्यक्ष विकाश तिवारी ने वर्तमान संविधान के उपर टिप्पणी की और बोले “संविधान मे बहुत सारे ऐसे प्रावधानों की व्यवस्था की गई है । जिसका प्रभाव मधेशी जनजीवन को कालान्तर में संघीयता के मूल सिद्धान्त के विपरित है । यह शक्ति विभाजन के सिद्धान्त के पक्षधर नहीं हंै । बल्कि शक्ति केन्द्रिकरण और नियन्त्रण के सिद्धान्त पर आधारित है, अतः यह संविधान मधेशी विरोधी संविधान है ।” इसीतरह महिला स्वराजी प्रेमकला देवी ने कहा कि “वो मधेशी नेतागन जो अभी भी कुर्सी के साथ फेविकल की तरह चिपके हुए हैं वो सचमुच मे मधेशी गद्धार है ।”

l13इसीतरह ग्रिनहाउस वोर्डिङ स्कुल के ध्रुव साह के अनुसार खसवादी शासकों ने शिक्षा श्रेत्र में भी व्यापक रुप से भेदभाव किया है । उनहोने ये भी कहा है कि “मधेशी नेतालोग जो इस खस सरकार के फेके हुवे टुकड़ों से अपने स्वार्थ सिद्धि में लगे हैं वे भी जंजीर मे बंधे हुवे है । फर्क सिर्फ इतना है वे गिने चुने हुवे लालची नेतागन सोने के जंजीरमे बधें है और आम मधेशी लोहे की जंजिरों में ।”

अन्त मे स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन के सिरहा जिला संयोजक एवं वर्चस्वशाली नेता केदारनाथ यादव ने ये कहा कि “डा. सि. के राउत अब सिर्फ कोई एक व्यक्ति नहीं रह गया वो तो अब एक विचार हो गए हैं । हमारा शान्तिपूर्ण आन्दोलन गान्धी और मण्डेला से प्रेरित है । उनहोने कहा कि डा.सि.के राउत को ज्यादा दिन ये खस सरकार बन्दी बनाकर नहीं रख सकता है । हजारों हजार मधेशी की आवाज अब बुलन्द होने लगी है । मधेशी जनता करवाएगी डा. राउत को नजरवन्द से मुक्त ।”

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