अब काग्रेंस नही, खाने वाले नेताओं का रेस अर्थात “खाग्रेंस” हो गई है : बिम्मीशर्मा

जो पार्टी अपने अंदर की राजनीति में इतनी कुठिंत है, नयापन लाना नहीं चाहती भोटिगं मशीन प्रयोग नहीं करती, व्यालेट बक्स की जगह जो पानी की खाली टंकी को प्रयोग में लाने में परहेज नहीं करती । वह पार्टी जब सत्ता में आएगी तब तो शायद सिहंदरवार में डिबिया जलाने की नौवत आएगी ।

बिम्मीशर्मा, काठमांडू ,१४ मार्च | जलवा टंकी का,

टंकी पानी रखने के लिए काम में लाया जाता है । पर हमारे देश में बिजली की तरह पानी भी नदारद है । इसीलिए वह छत में बैठा बैठा काले रगं का टंकी सभी कांग्रेसीजनको मुँह चिढा रहा था । इसी लिए आनन फानन में नेपाली काग्रेंस पार्टी ने अपने महाधिवेशन में इसी पानी की टंकी को भोट डालने का बक्सा या बर्तन बना दिया । भोट पड़ें है तीन हजार से कुछ ज्यादा पर उसी भोट को डालने के लिए महान काग्रेंसियों नें पानी की खाली टंकी का भरपूर सदूपयोग किया ।

kangrs mahaadhibesan

प्रिय पाठकों को याद होगा कुछ साल पहले नेकपा एमाले के वरिष्ठ नेता ईश्वर पोखरेल के घर के छत मे शान से बैठी हुई पानी की टंकी के अंदर नोट मिले थे । तब यह खबर बहुत ज्यादा ही मशहुर हुआ था । सबने ईश्वर पोखरेल की खूब खिंचाई की थी । अब नेकपा एमाले के नेता ईश्वर पोखरेल को गुरु मान कर नेपाली काग्रेंस ने उन के जैसा ही पानी की टंकी को अपने महाधिवेशन में भोट रखने के लिए प्रयोग में लाया है । देखिए यह निर्जीव पानी की टंकी कितनी भाग्यशाली है कि कभी उसके अंदर नोट रखा जाता है तो कभी भोट । नेपाल की राजनीति में पानी की टंकी भी एक अहम रोल अदा करती है ।

तेल का गैलन और गैस का खाली सिलिडंर भूख से ग्रस्त हो कर खाली पेट देश के नागरिकों का मुँहं चिढ़ा रही है और यह काली, कलूटी पानी की टंकी देश की राजनीति में कहर बरपा रही है । किसी को भरे हो कर भी चैन नहीं और यह खाली और काली निर्जीव टंकी नोट और भोट से मालामाल हो रही है । इस देश मे एक मामूली पानी की टंकी का दिन फिर जाता है पर जनता जनार्दन का नहीं । लोगों के घरो में नल से पानी नहीं चूता, पेट्रोल और डीजल की टंकी भी खाली है । घरों मे गैस की किल्लत की वजह से चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं । पर इस काली और खाली टंकी को नव यौवना की तरह जवानी चढी हुई है । देश की राजनीति में यह सर से पाँव तक नेता के दिए आश्वासन, भोट और नोट से भीगी हुई है । किसी की किस्मत हो तो इस टंकी के जैसा हो वरना ना हो ।kangres adhibesan

राष्ट्रवाद, महँगाई के बुखार के बाद अब टंकी का बुखार सभी के सिर पर चढा हुआ है । और इसका श्रेय जाता है देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी नेपाली काग्रेंस को । पार्टी के ज्यादातर नेता चाहते थे कि यह महाधिवेशन हाईटेक हो । पर इसके आकाओं ने हाईटेक को हिलटेक – पानी की टंकी का एक ब्राण्ड नैम ) सुना और समझा । इसीलिए लगें हाथों पानी की खाली नव नवेली टंकी को खरीद लाए । सभी चाहते थे महाधिवेशन का चुनाव ईलेक्ट्रोनिक्स भोटिगं मशीन से हो पर देश की सबसे पुरानी पार्टी अभी भी विचार और व्यवहार से पुरानी ही है । इसी लिए इसके आकाओं ने इलेक्ट्रोनिक्स भोटिग मशीन के प्रस्तावको सिरे से ही खारिज कर दिया । बेचारे करते भी क्यों न, सालों सें दैनिक १२ घंटे का लोडसेडिगं झेल रहे हैं । अंधेरे में न आंख से दिखाई देता है न बिजली से चलने वाली भोटिगं मशीन ही काम करेगी । इसी लिए नेपाली काग्रेंस के महान और दूरदर्शी नेताओं ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया । वैसे मानना पडेगा इन की बैल गाड़ी युग की सोच को ।

जो पार्टी अपने अंदर की राजनीति में इतनी कुठिंत है, नयापन लाना नहीं चाहती भोटिगं मशीन प्रयोग नहीं करती, व्यालेट बक्स की जगह जो पानी की खाली टंकी को प्रयोग में लाने में परहेज नहीं करती । वह पार्टी जब सत्ता में आएगी तब तो शायद सिहंदरवार में डिबिया जलाने की नौवत आएगी । और राजधानी की सड़क मे कार और बस की जगह बैल गाड़ी और टांगा चनले लगेगी । जो पार्टी व्यवहार में इतनी पुरातनपंथी है । वह बिचार और सिद्धान्त में कैसी होगी ? अनुमान लगाना मुश्किल नहीं हैं । जिस पार्टी मे खुमबहादुर जैसे भ्रष्ट, जेल से लौटे हुए और जनता का खून चूसने वाले लोग अनेक षडयंत्र कर के किसी को हरा और जिता सकते हैं । उस पार्टी का और देश का भविष्य और वर्तमान उस काले टंकी के जैसा स्याह होना निश्चित है ।

काग्रेंस के सारे भ्रष्ट और दुष्ट नेता गण अपने काले कारनामों को छूपाने के लिए काली टंकी का सहारा ले रहे हैं । यह भोट डालने के लिए लाई गई काले रगं की टंकी अपने रुप रंग से जितनी काली है । उस से कई गुना ज्यादा मन और तन से काले है काग्रेंस के नेता गण । इनका पेट भी उस टंकी की मानिंद बड़ा और उभरा हुआ है । असल मे अब अपने शाख से गिर चूकी नेपाली काग्रेंस पार्टी को अपना चुनावचिन्ह पेड़ को हटा कर इस काले रगं की टंकी को बना लेना चाहिए । क्योंकि यह पार्टी अब काग्रेंस नही, खाने वाले नेताओं का रेस अर्थात “खाग्रेंस” हो गई है ।

जो भी हो, एक दिन सभी की वारी आती है । इस वार कालाबजारियों की तरह काली टंकी का दिन फिर गया है । इतनी बड़ी टंकी मे तीन हजार से कुछ ज्यादा मत उंट के मुँहं मे जीरे की तरह है । हारने का खतरा हो तो उसी टंकी के अंदर बैठ कर फर्जी भोट डाल कर अपना पलड़ा भारी कर लो कोई देखने वाला भी नहीं हैं । छुप कर कुछ खालो और भोट की गिनती करते करते थक गए तो उसी टंकी के अंदर सो जाओ । कोई माई का लाल देखने और टोकने वाला नहीं है । यह टंकी कागें्रसियों का पाप हरण कर के इन को जिताने वाली तारणहार माता है ।

इसीलिए चाहे देश का ईलेक्सन हो या किसी पार्टी का या विद्यार्थी यूनियन का । अब सभी को इंसी टंकी माता की शरण में जा कर नेपाली कागें्रस की तरह अपनी विजय निश्चित करनी चाहिए । यह टंकी माता सभी पापों को हरण कर के मोक्ष देने वाली है । जय बोलो टंकी माता की । (व्यग्ंय)

loading...