अब का ये आन्दोलन किस्ताें में समझौता करने वाला नहीं है : मधेशी युवा

सप्तरी, चन्ही के एक युवा नेता किशोर गोईत का कहना है ‘हमारे पुर्वज बहुत बार चूके, अनगिनत आन्दोलन किए गए मगर कोई सफलता हासिल नहीं कर पाया । अब का ये आन्दोलन किस्तों में समझौता करने वाला नहीं है ।
आन्दोलन एक तीर की भाँति अपने मयान से निकल चुकी है, निकला हुआ तीर मयान मे लौट नहीं सकता है ये अपने लक्ष्य को भेद कर ही दम लेगी ।
मधेश में जब जब अधिकार प्राप्ति के लिए मधेशियों ने आवाज उठायी, राज्य ने उस आन्दोलनों को भारतीय आन्दोलन, भारतीय चलखेल, भारतीय घुुसपैठ की संज्ञा दी है
मधेश का लगभग शत प्रतिशत युवा यही चाहते हैं कि ये लडाई अब अन्तिम हो । अब के बाद मधेश में आन्दोलन विकास का हो, उन्नति का हो और देश के लिए कल्याणकारी हो
आन्दोलन को दिग्भ्रमित करने के लिए काठमाडौं के मीडिया ने भी कोई कसर नहीं छोड़ा है

मनोज बनैता:विगत ढाई महीनों से चले आ रहे मधेश आन्दोलन ३ ने विश्व मे अपना एक रेकॉर्ड कायम कर लिया है । इस आन्दोलन को एक धर्मयुद्ध की दृष्टि से भी देखा जा रहा है । अगर जन सहभागिता की बात करें तो मानो पूरा मधेश सड़क पर उमड़ पड़ा है । मधेश के सम्पूर्ण जिलाें में मधेशियों ने इस आन्दोलन को एक नयी उँचाई दे रखी है । ये आन्दोलन अब सिर्फ नेताओं का आन्दोलन नहीं रह गया । आन्दोलन के शुरुआत से लेकर अब तक देखा जाए तो लगता है कि आम मधेशी युवाओं ने मधेश की नैया को पार लगाने का बीड़ा उठा लिया हो । मधेशी नेताओं ने तो आन्दोलन को आश्विन २४ को ही खत्म कर दिया था लेकिन मधेशी युवाओं ने धैर्य और साहस के साथ इस मिट्टी की लाज रख ली और उस धैर्य के बाँध को टूटने नहीं दिया ।
सप्तरी, चन्ही के एक युवा नेता किशोर गोईत का कहना है ‘हमारे पुर्वज बहुत बार चूके, अनगिनत आन्दोलन किए गए मगर कोई सफलता हासिल नहीं कर पाया । अब का ये आन्दोलन किस्तों में समझौता करने वाला नहीं है । ये आन्दोलन एक तीर की भाँति अपने मयान से lahan2निकल चुकी है, निकला हुआ तीर मयान मे लौट नहीं सकता है ये अपने लक्ष्य को भेद कर ही दम लेगी ।’ मधेश का लगभग शत प्रतिशत युवा यही चाहते हैं कि ये लडाई अब अन्तिम हो । अब के बाद मधेश में आन्दोलन विकास का हो, उन्नति का हो और देश के लिए कल्याणकारी हो ।
नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार एवं राजनैतिक विश्लेषक खगेन्द्र संग्रौला ने भी यही कहा है कि “मधेश में जब जब अधिकार प्राप्ति के लिए मधेशियों ने आवाज उठायी, राज्य ने उस आन्दोलनों को भारतीय आन्दोलन, भारतीय चलखेल, भारतीय घुुसपैठ की संज्ञा दी है । मधेश आन्दोलन के मुद्धा को कमजोर करने के लिए निर्दोष भारत का नाम बार बार उछाला गया ।’
२५० वर्षों से शोषित होता आ रहा मधेश गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहा है कि हमें आजादी दो, हम (मधेशी और पहाडी) मिल के नेपाल को एक नयीं उचाँई में ले जाएँगे मगर नेपाली शासक अपने नश्ल भेद नीति के साथ फेविकल लगाकर सटे हुए हैं ।
सिरहा, जिरो माइल गोठ के एक विधार्थी युवा विरु यादव का कथन है “अधिकांश मधेशी युवा के अनुसार प्रमुख तीन दल मधेस विरोधी है इसलिए मधेस में उन तीनों पार्टियों को मधेस मुक्त बनाने की जरुरत है । स्रुवाभिमानी मधेसियों ने असली औरुररु नकाबपोश मधेसियों को पहचान लिया हैरुरु। अगररु प्रमुख तीन दल औरुररु वर्तमान सररुकाररु ने मधेस की माँग को समय में सम्बोधन नहीं किया तो मजबूररु होकररु मधेसी जनता रुस्रुरुवतन्त्र मधेस देश के लिए आन्दोलन कररुेगीरु।वाभिमानी मधेसियों ने असली और नकाबपोश मधेसियों को पहचान लिया है । अगर प्रमुख तीन दल और वर्तमान सरकार ने मधेस की माँग को समय में सम्बोधन नहीं किया तो मजबूर होकर मधेसी जनता स्वतन्त्र मधेस देश के लिए आन्दोलन करेगी ।’
उसी तरह सर्लाही के एक युवा इन्जीनियर साहिल राय यादव का कहना है कि “मधेशी जनता को चेतनशील बनना ही होगा, किसी भी आन्दोलन को करने से पहले अपनी राजनैतिक चेतना में निखार लाना ही होगा । उसके बाद ही मधेशी जनता धोखा नहीं खाएगी, अपने लक्ष्य तक पहुँच सकेगी । मधेशी जनता को चौकन्ना रहना चाहिए कि अपने मौलिक अधिकार से वे वंचित ना हो’
पहाड़ के विभिन्न स्थानाें में हमारे असल मित्र भारत का झण्डा जलाने और ब्याक अफ इन्डिया के नारे लगाकर सम्पूर्ण भारतवासियों के आत्मसम्मान और स्वाभिमान को जो ठेस पहँुचायी गई उस निंन्दनीय घटना की मधेश में सर्वत्र भत्र्सना की गई । मधेश के लगभग सभी शहरों मे नेपाल मैत्री भारत की रैली निकाली गई । मधेश बखुबी जानता है कि भारत से उनका सम्वन्ध बेटी–रोटी का है ।
लाहान के एक युवा भोला जित का कहना है “ हमारे शासक वर्ग की मति मारी गई है, वे जिस थाली मे खाते हैं उसी मे छेद करने से भी नहीं चूकते हैं । आज नेपाल देश भारत के ही छत्रछाया में है जो सुरक्षित महसूस करता है वरना इस देश को आतंकवाद का ग्रहण लग चुका होता ।’
विभेद और उत्पीड़न की श्रृंखला को अन्त करके समान हक खोज रहे मधेशी की आवाज को खस शासक दबाकर अपना शासन सत्ता कायम करना चाह रही है । मधेश मे सदियों से बसोबास कर रहे थारु और मधेशी अत्यधिक पीडि़त होने के कारण ही इस आन्दोलन की जरुरत आ पड़ी है । इस आन्दोलन को दिग्भ्रमित करने के लिए काठमाडौं के मीडिया ने भी कोई कसर नहीं छोड़ा है । एक ऐतिहासिक शान्तिपूर्ण आन्दोलन को बदनाम करने की नीयत वाला समाचार तथा सूचना सम्प्रेषण किया है और आज भी कर रहा है, मानो इन खस मीडिया वालों ने अपना ईमान फुटपाथ में लेजाकर बेच दिया हो । पत्रकारिता निष्पक्ष होती है किन्तु यह बात जानेमाने पत्रिकाओं में देखने को नहीं मिल रही है । एक समुदाय विशेष से प्रभावित समाचारों का ही प्रकाशन और सम्प्रेषण होता आया है । जिसका आक्रोश मधेश और मधेशियों में स्पष्ट देखने को मिल रहा है जिसकी वजह से इनका बहिष्कार भी किया गया है ।

Loading...
%d bloggers like this: