अब नयाँ विकल्प पर बातचित, छह वामपंथी दलों ने राष्ट्रपति को संयुक्त आपत्ति पत्र दिया ।

काठमाडू ,१० फागुन । प्रधानन्यायाधीश खिलराज रेग्मी  व्दारा अगर दलों का प्रस्ताव स्वीकार नही किया गया तो दलों  व्दार नयाँ विकल्प पर भी बातचित अब सुरु किया जायेगा । दल के बाहर से भी नेतृत्व चयन या अन्य नयाँ विकल्प पर भी आज से बातचित होगी ।
इससे पहले एमाले के बरिष्ठ नेता माधवकुमार नेपाल के व्दारा रखा गया प्रस्ताव पूर्व प्रधानन्यायाधीश वा वर्तमान न्यायाधीश के विकल्प पर भी बातचित हो सकती है ।  प्रधानमन्त्री केराजनीतिक सल्लाहाकार देवेन्द्र पौडेल ने अब नयाँ विकल्प पर जाने की बात कही है ।
अब कितना प्रधानन्यायाधीश का ही प्रतिक्षा करेगें पौडेल ने कहा अब नयाँ विकल्प भी खोजना पडेगा। एमाले के नेता भीम रावल ने भी नयाँ विकल्प पर बातचित करने की बात कही है । रेग्मी के नेतृत्व मे अन्तरिम चुनावी मन्त्रिपरिषद् बनाने की सहमति होने के बाद भी वे सहमति की प्रक्रिया और दलों के बीच के विवाद के कारण रेग्मी नेतृत्व लेने से कतरा रहें हैं।
प्रधानन्यायाधीश के नेतृत्व मे सरकार वनाने के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के एक दिन बाद बुधवार को मोहन बैद्य के नेतृत्व वाली सीपीएन – माओवादी सहित छह वामपंथी राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति राम बरण यादव को  एक संयुक्त आपत्ति पत्र दिया है।

पत्र, सीपीएन – माओवादी के साथ सीपीएन (एकीकृत), मातृका यादव के नेतृत्व वाली सीपीएन (माओवादी), रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी नेपाल, लिम्बुवान राष्ट्रीय परिषद और सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा प्रस्तुत  किया गया प्रस्ताव मे कहा गया हे कि मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में वनने वाली सरकार “विदेशी शक्तियों द्वारा लाया गया है, और यह राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए एक खतरा है ।

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