अब विज्ञान प्रवीधि और विचार के आधार पर सम्बन्ध निर्माण करना जरुरी : जयन्तप्रसाद

काठमाडौ, २८ असोज । नेपाल स्थित भारतीय राजदुत जयन्तप्रसाद ने कहा है कि नेपाल सहित और भी अच्छे सम्बन्ध वाले देशों का विकास विना भारत के विकास का स्थायीत्व प्राप्त नही कर सकता।
नेपाल भारत मैत्रि यूवा संघ व्दारा रविवार को राजधानी मे आयोजित किया गया नेपाल भारत सम्बन्ध सम्भावना और चुनौति विषय पर अन्र्तक्रिया कार्यक्रम मे बोलते हुये उन्होने कहा कि भारत मे हो रही विकास को स्थायित्व प्रदान करने के लिये इसके साथ-साथ नेपाल का भी विकास होना जरुरी है ।
राजदुत जयन्त प्रसाद ने आगे कहा कि नेपाल मे दक्षिण एसीया का ही सबसे ज्यादा प्राकृतिक स्रोत और साधन उपलव्ध होने के कारण नेपाल का विकास जल्द और तीव्र गति से हो सकता है ।
उन्होने कहा कि नेपाल और भारत के वीच जनता  और जनता के वीच, सामाजिक, धार्मिक, सास्कृति सम्बन्ध बहुत ही गहरा है तथा इसे अब २१ वीं शताब्दी मे और भी आकर्षक बनाने के लिये विज्ञान प्रवीधि और विचार के आधार पर सम्बन्ध निर्माण करना परेगा।
नेपाल का संविधान निर्माण कुछ जटिल जरुर है लेकिन नेपाल और भारत के संविधान निर्माण मे बहुत समानता होने के कारण भारत से नेपाल बहुत कुछ सिख सकता है उन्होने बताया।
उनके अनुसार नेपाल मे केवल संविधान ही नही यहाँ की राजनीतिक पद्धति कैसी हो इसपर बहस चलरही है जिसके कारण संविधान निर्माण की प्रक्रिया जटिल दिख रही है ।
अन्र्तक्रिया मे नेपाली काग्रेस के  नेता अर्जुन नरसिह केसी ने कहा कि नेपाल के आधुनिकिकरण का सूरुवात ही भारत के व्दारा हुआ है इसलिये नेपाल और भारत के सम्बन्ध को राजनीतिक स्वार्थ के लिये प्रयोग नही करना चहिये ।
नेकपा एमाले के प्रचार विभाग प्रमुख प्रदिप ज्ञावली ने कहा कि नेपाल के हरेक राजनीतिक परिवर्तन मे भारत का सहयोग और समर्थन रहा है इसलिये भारत जैसा सम्बन्ध और देशों के साथ नही हो सकता ।
उन्होने कहा कि भारत विरोधी नारा लगाने से ही राष्ट्रबादी नही हो सकता समस्या को कुटनीतिक स्तर पर नेपाल और भारत के वीच समाधान खोजना चहिये।
एकीकृत नेकपा माओवादी के नेता जनार्दन शर्मा ने कहा कि राष्ट्र के हित के लिये भी नेपाल और भारत के वीच का सम्बन्ध को और मजबुत बनाने की जरुरात है । संस्था के अध्यक्ष महेन्द्र यादव के सभापतत्वि मे समपन्न कार्यक्रम मे परराष्ट्रविद्ध डा भेष बहादुर थापा, तमलोपा के बृषेशचन्द्र लाल, ने भी अपना मनत्वय रखा था ।

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