अमेरिका के नए राष्ट्रपति, चीन तथा पाकिस्तान की चिन्ता

 

9, नवम्बर ।ट्रम्प की जीत से भारत जहाँ खुश है वहीं चीन और पाकिस्तान के लिए यह चिन्ता का विषय बन गया है । ट्रम्प चुनावी भाषणों में कई बार चीन और पाकिस्तान की चर्चा कर चुके हैं ।अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनॉल्ड ट्रंप की जीत से चीन,पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। ट्रंप के अातंक विरोधी अभियान से पाकिस्तान अौर चीन निराश है। विश्व में बढ़ती आर्थिक शक्तियों के कारण अमरीकी नागरिक बदलाव के मूड़ में थे। इन शक्तियों में चीन का नाम भी आता है।

अपने एक भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने यह चिंता जताई थी कि इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले हम चीन और दुबई जैसे देशों से पिछड़ गए हैं। मानो अमरीका तीसरी दुनिया का देश बन गया हो। उन्होंने वादा और दावा किया कि अगर वह अमरीका के राष्ट्रपति बनते हैं तो वह चीजों को दुरुस्त करेंगे।

न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1999-2011 तक अमरीका में चीनी आयात इतना बढ़ गया कि 24 लाख लोगों को नौकरियां गंवानी पड़ीं। ट्रंप चाहते हैं कि अमरीका आगे आए और चीन को बैकफुट पर लाया जाए। वे ग्लोबल बिजनेस में अमरीकी को मजबूती देना चाहते हें। उनका मानना है कि वह जब आएंगे तो चीनी आयात पर 45 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा।डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले भारत की प्रशंसा की थी। समझा जा रहा है कि यह पहली बार हुआ है। वह कह चुके हैं कि भारत का प्रदर्शन अच्छा चल रहा है। मोदी सरकार बनने के बाद निवेशक भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं। भारत में आशावाद लाने का श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। सीएनएन को दिए इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था लोग चीन और भारत आदि के बारे में बात करने लगे हैं। हालांकि वे अपने भाषणों में चीन की आलोचना कर चुके हैं,लेकिन भारत के प्रति उनका नजरिया अच्छा दिख रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनॉल्ड ट्रंप के जीत से भारतीय मूल के अमेरिकी ज्यादा खुश है। भारतीयों ने वहां राजनीति में ज़्यादा दिलचस्पी लिए थे। वे शिक्षा और संपन्नता की दृष्टि से औसत अमेरिकी से बहुत आगे हैं। इनमें से अधिकतर डॉक्टरी, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक शोध जैसे व्यवसाय करते हैंं। हाल में भारत के आर्थिक विकास, विश्व में बेहतर हो रही उसकी छवि और अमरीका के साथ उसके संबंधों में मज़बूती आने से भारतीय मूल के समुदाय के राजनीतिक दमखम बढ़ा है। आंकड़ों के हिसाब से अमरीका में बसने वाले भारतीयों की आबादी 25 लाख से अधिक है। भारतीय अमरीकी लोगों की राजनीतिक सक्रियता केवल जागरूक मतदाता होने तक ही सीमित नहीं रही। वे देश की राष्ट्रीय और स्थानीय राजनीति में भी वे बख़ूबी उभरकर सामने आए हैं।

 

ट्रंप की ओर से दिए गए मुस्लिमरोधी और प्रवासी विरोधी बयानों की काफी निंदा हो चुकी है। उनके विवादास्पद बयानों के चलते उनके रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी भी उन्हें निशाने पर ले चुके हैं। लेकिन वे इसकी परवाह न करते हुए अपने अभियान को अागे बढाया। उन्होंने कहा था कि परमाणु हथियारों से संपन्न पाकिस्तान विश्व के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। वहां हालात बहुत खराब हैं। ऐसे में अगर कोई पाकिस्तान पर काबू पा सकता है तो वह भारत है। पकिस्तान ने भारत को भी अपने साथ आतंकवाद में जोड़ लिया है। भारत के पास परमाणु बम होने के साथ अपनी एक ताकतवर फ़ौज भी है। वही असल में उसे ठीक कर सकता है।

 

डोनॉल्ट ट्रंप यहां तक कह चुके हैं कि हमें पाकिस्तान को ठीक करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने दावा किया था कि वे पाकिस्तान को दूसरे लोगों से ज्यादा जानते हैं। उनके इस दावे की अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा ने आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में हो रहे आतंकी हमलों का डर दिखाकर ट्रंप लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ट्रंप के ऐसे बयान पाकिस्तान के लिए जरूर चिंता बढ़ाने वाले हैं।

भारत के लिए विशेष बात यह भी है कि डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान को एक बड़ी समस्या करार दे चुके हैं। उनका मानना है कि पाकिस्तान जिस स्थिति में है, उसे रोकने की जरूरत है। लाहौर में अल्लामा इकबाल टाउन के गुलशन-ए-इकबाल पार्क में मौजूद भीड़ को निशाना बना एक आत्मघाती हमला हुआ था। ट्रंप ने इस पर चिंता जताई थी कि यह अतिवादी इस्लामिक आतंकवाद है। वह इसे बढ़िया तरीके से इसे निपटाएंगे। यह हमला काफी शक्तिशाली था। ईस्टर त्योहार के अवसर पर पार्क में बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय के लोग मौजूद थे। मरने वालों में कई ईसाई समुदाय के थे।

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