अलकायदे के निशाने पर केवल भारत ही नहींः नेपाल भी –

रामाशीष:पाकिस्तान में अड्डा जमाए बैठे तथा वहीं से विश्व भर में इस्लामी आतंक फैलानेवाले ‘अल-कायदा सुप्रीमो’ तथा कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के अमेरिकी हमले में मारे जाने के बाद, लादेन की गद्दी सम्हालनेवाले अल जवाहिरी ने हाल ही में जारी अपने ५५ मिनट के एक वीडीओ टेप द्वारा भारत को अपने निशाने पर लेने का सनसनीपर्ूण्ा खुलासा किया है । उक्त टेप में कहा गया है कि अब वह अपनी सारी आतंकवादी गतिविधियों के संचालन का केन्द्र भारत को बनाएंगे ।
अल जवाहिरी के इस खुलासे ने जहां भारत सरकार की नींद उडÞा दी है, वहीं दूसरी ओर नेपाल पर उसके पडÞनेवाले खतरनाक असर पर न तो नेपाली मीडिया में कोई चर्चा है और न ही राजनीतिक गलियारों में । तो फिर, भारत के साथ नेपाल की जनता की चैन की नींद छीन लेनेवाले इस ‘खुलासे’ पर यहां चालू संसद सत्र में अल जवाहिरी के खतरनाक इरादों की चर्चा का तो सवाल ही नहीं पैदा होता ।
अल जवाहिरी के इस चैकानेवाले फरमान पर भारत सरकार ने जहां अपने आधे दर्जन से अधिक संवेदनशील राज्यों में रेड-अलर्ट जारी कर दिया है, वहीं दूसरी ओर भारत के दो दर्जन से भी अधिक मुस्लिम संगठनों ने भी अल जवाहिरी के इस धमकी भरे फरमान की घोर भर्त्सना करते हुए, भारत के मुसलमानों को दहशतगर्दी के किसी भी क्रियाकलाप सेे दूर रहने की अपील की है । alkaida in nepal
जाहिर है कि अल जवाहिरी के दहशतगर्दी-सेन्टर बननेवाले संभावित राज्यों में बिहार और उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है, क्योंकि इन दोनों ही राज्यों की सीमा नेपाल से जुडÞी हैं और दोनों ही देशों के नागरिकों को एक दूसरे देश में बिना किसी प्रवेशाज्ञा पत्र -पासपोर्ट-वीसा) के आने जाने की सुविधा है । इसके साथ ही यह भी विशेषता है कि नेपाली सीमा के जिन-जिन स्थानों पर अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी है, उस स्थान के सीमा पार भारतीय गांवों, कस्बों अथवा शहरों में भी मुसलमानों की वैसी ही अच्छी खासी आबादी है । सबसे बडÞी बात तो यह है कि बिहार और यूपी तथा उससे लगे नेपाली सीमा में बसे मुसलमानों में अधिकांश गरीब और जाहिल हैं तथा मुÝी भर खाते-पीते मुसलमान, नेताओं तथा मौलबी-मुल्लाओं के भारी प्रभाव में हैं । फलस्वरूप, मजहब के नाम पर या मामूली रुपये-पैसे के संचालन से उन भोले-भाले मुसलमानों के बीच ‘दहशतगर्दी’ फैलानेवालोें की घुसपैठ असानी से होने की संभावना है । यह सही है कि सभी मुसलमान ‘आतंकवादी या दशहतगर्द’ नहीं हैं, लेकिन नेपाल-भारत सीमा क्षेत्रों से नेपाली और भारतीय पुलिस द्वारा अभी तक पकडÞे गए ‘भटकल’ जैसे सभी खौफनाक दहशतगर्द मुसलमान हैं ।

नेपाल में सजगता आवश्यक

यही चिन्ता का कारण बन जाता है । पश्चिमी और पर्ूर्वी नेपाल और सीमा पार के कुछ ऐसे भी गांव, कस्बे एवं शहर हैं, जिन्हें स्थानीय जानकार ‘मिनी पाकिस्तान’ नाम से ही पुकारते हैं । क्योंकि, नेपाल में गोहत्या ‘प्रतिबंधित’ रहने के बावजूद वहां दिन-दहाडÞे गौएं काटी जाती हैं, जिससे हिन्दू जनमानस को मार्मिक पीडÞा होती है, फिर भी उन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक होने के कारण वह कुछ कर नहीं सकते हैं । इस प्रकार के भारतीय क्षेत्रों की तो इससे भी बदतर स्थिति है, क्योंकि भारत में गोहत्या पर प्रतिबंध नहीं है ।
_r2_c2अब यह बात किसी से भी लुकी-छिपी नहीं रह गई है कि पिछले कुछ ही वषर्ाें में नेपाल-भारत सीमा के नेपाली गांवों, कस्बों और शहरों में भारी संख्या में एक से बढÞकर एक छोटे, बडÞे और भव्य मस्जिद-मदरसों के निर्माण हुए हैं, जिनमें पाकिस्तान सहित अनेक मुस्लिम देशों ने खुल्लमखुल्ला भाग लिया है । बताते हैं ये ही वे मस्जिद और मदरसे हैं, जहां पाकिस्तानी-कश्मीरी शरण लिया करते हैं, स्थानीय लोगों के बीच घुलमिलकर अपनी भाषा-भेष और रहन सहन को स्थानीय-अनुकूल बनाते हैं तथा मौका पाते ही भारतीय सीमा मेें घुसकर अपनी कार्रवाईयों को अन्जाम देकर नेपाली ठिकानों पर छुप जाते हैं ।
भैरहवा के एक युवक पत्रकार ने बताया कि ‘लुम्बिनी से ककरहवा क्षेत्र में इन दिनों बर्ुके में सजे युवक भी गाहे-बगाहे दिखने लगे हैं । उन्होंने बताया- एक दिन वह अपनी मोटर साइकिल से लुम्बिनी से भैरहवा की ओर आ रहे थे । मुझसे आगे एक मोटर साइकिल की पिछली सीट पर बैठे बर्ुका पहनी एक महिला बैठी थी । अचानक तेज हवा में बर्ुका उडÞ गया और यह देखकर मैं दंग रह गया कि वह सवार महिला नहीं, अपितु एक जीन्स पैंट और आधुनिकतम जूता पहने एक युवक था ।

आखिर क्या कारण था उक्त युवक द्वारा बर्ुका पहनने का –
मर्चवार क्षेत्र के एक युवक ने तो यहां तक बताया कि मुस्लिम बहुल उक्त क्षेत्र में सात-साढÞे सात फुट लम्बे नये चेहरे के पठानों, कश्मीरियों और पाकिस्तानियों को दिखना सामान्य बात है । उन्होंने बताया ‘मैं अपने नाना जी के यहां गया था, दूसरे दिन सुबह मैंने बगल के मस्जिद से चार-पांच लम्बे कदकाठी के नये चेहरों को देखा । मैंने उनसे पूछ दिया आपलोग कहां से आए हैं – उनका उत्तर था – कराँची से । मामला साफ था कि वे लोग पाकिस्तानी पठान थे । मैंने पूछ दिया, आप लोग क्यों आए हैं, उत्तर मिला- हमलोग मजहब के काम से आते-जाते रहते हैं । लेकिन, अपनी बात बदलते हुए कहा वैसे हमलोग यहीं रहते हैं । यहीं मुझे शंका हर्ुइ, लेकिन करता क्या – यहां कोई ऐसा निकाय नहीं है, जहां इस तरह की सूचनाएं दी जा सके । और स्थानीय पुलिस को इस तरह की जानकारी से कोई खास मतलब नहीं ।
भैरहवा के ही निवासी खान साहब बताते हैं कि वास्तविकता तो यह है कि इस सरकार को इस सबसे कुछ लेना देना है ही नहीं, अन्यथा यह समझना आसान है कि दहशतगर्द न तो किसी धर्म-मजहब का होता है और न ही उनकी कोई जाति न देश । आज जब यह साफ हो चुका है कि नेपाल में भारत विरोधी दहशतगर्द, एक्शन करके नेपाल में छुपा करता है तो यहां की सरकार या पुलिस क्यों हाथ पर हाथ दिए बैठी है – आज अल-जवाहिरी का आतंक भारत में सनसनी फैलाए हुए है जबकि नेपाल की सरकार और पुलिस या नेपाल के मुस्लिम संगठनों की ओर से उसकी घोर निंदा क्यों नहीं की गई – सरकार अपनी कार्रवाई की घोषणा क्यों नहीं करती –
पश्चिमी नेपाल में बांके जिले के एक सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं- ‘पूरब-पश्चिम राजमार्ग के दक्षिण स्थित शमशेरगंज, जन्तपुर, मनिकापुर, भवानीपुर, पिपरहवा, र्साईगांव, जैसपुर आदि मुस्लिम बहुल क्षेत्र हैं । इनमें र्साईं गांव और जैसपुर तो तस्करी के भी केंन्द्र बन चुके हैं । यहां दिन दहाडÞे गौकुसी हुआ करती है । पर्ूव पश्चिम मार्ग के ही दखिन में बसे गांव कटकुइयां, लखनपुर, नरैनापुर, काला कोटा, सटहिया, गंगापुर, बनकरी आदि गांव कस्बों में भी गौकुसी आम बात है । नेपालगंज से पूरब पुरैनी-पुरैना, कम्दी, बेतहनी आदि ऐरिया भी मुस्लिम बहुत हैं और वहां गौकसी आम बात है । नेपालगंज खुद अपने आप में मुस्लिम बहुल है और इस इलाके में ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे और जुलूस भी सुने-दिखे जा चुके हैं ।
इसी प्रकार मध्य तथा पर्ूर्वी नेपाल को देखें तो रौतहट, बारा और पर्सर्ााजला को भी मिनी पाकिस्तान के नाम से पुकारा जाता है । पर्ूर्वी नेपाल के झापा, मोरंग, सुनसरी, सप्तरी, धनुषा, महोत्तरी और रौतहट जिले में कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां आतंकवादी गतिविधियां चलने की खबरें आती रहती हैं । महोत्तरी जिले के बैरगिया, बिसबिट्टी, पर्सर्ााोबार, अध्यानपुर, रौजा और जींगाथान, भंवरपुरा आदि क्षेत्रों से गाहे-बगाहे आतंकवादी पकडÞे भी जा चुके हैं । भारतीय सीमा बेला परिहार से लगे पांच छह गांव ऐसे हैं, जहां नेपाल के पर्व त्योहार भी आसानी से नहीं मनाया जा सकता ।
यह एक ऐतिहासिक सत्य है कि रौतहट जिला नेपाल का पहला जिला है, जहां के एक जानेमाने मुस्लिम नेता ने ‘नेपाल में भी पाकिस्तान’ बनाने की मांग की थी । लेकिन नेपाल के महान् राष्ट्रवादी नेता गणेशमान सिंह के पेस्तौल ने इस मांग को सदा सदा के लिए समाप्त कर दिया था । बात १९४८-४९ की है । राणाशाही विरोधी क्रान्ति के दौरान गणेशमान जी, सीमापार के भारतीय गांवों से कार्रवाईयां संचालित किया करते थे । वह आसपास के नेपाली गांवों से युवकों को बुलाकर क्रान्ति में सहयोग की मांग भी किया करते थे । उन्हीं दिनों रौतहट जिला पार भारतीय गांव में आयोजित भूमिगत बैठक में तर्राई के युवकों को बुलाया गया था । बैठक के दौरान उन्हीं में से एक पहलवान युवक ने सवाल पूछ दिया- ‘हम तोहरे के मदद करिहे तो तू हमरा के, का दिहे’ – अर्थात् यदि हम आपको सहयोग करेंगे तो आप मुझे क्या देंगे – गणेशमान जी ने पूछा तुम्हें क्या चाहिए – युवक ने कहा ‘वो हे दे न द जो इंडिया ने मुसलमानांे को दिया है’ । गणेशमान जी ने जिज्ञासावश फिर पूछा तुम साफ साफ कहो, तुम्हें क्या चाहिए – इस पर युवक ने कहा ‘इंडिया ने मुसलमानोें को पाकिस्तान दिया है, आप भी हम लोगों को नेपाल में पाकिस्तान दे दीजिए’ । इस पर गणेशमान जी ने युवक पर पिस्तौल तान दिया, और कहा लो, तुम्हें अभी अभी पाकिस्तान भेजता हूं ।’ घबराकर युवक भाग खडÞा हुआ और फिर लौटकर नहीं आया ।
काठमांडू से प्रकाशित राजधानी दैनिक में ‘नेपाल पर भी इस्लामिक आतंकवादी गतिविधियों का असर पडÞ सकता है’ शर्ीष्ाक से एक समाचार मेें कहा है कि इससे माओवादी नेता भी चिन्तित हैं । समाचार में बताया गया है कि पुलिस हेड क्वार्टर पर आयोजित गोष्ठी में एक एआईजी ने स्वीकार किया कि इस्लामिक देशों में आतंकवादी गतिविधियां बढÞने से उसका प्रभाव नेपाल पर भी पडÞ सकता है । उन्होंने बताया कि नेपाल में आयोजित किए जानेवाले र्सार्क शिखर सम्मेलन पर भी आतंकवादी गतिविधियों का प्रभाव पडÞ सकता है । इसलिए अभी से ही पुलिस प्रधान कार्यालय ने एक कार्ययोजना बनाकर सुरक्षाकर्मियों को संचालित करने का निर्ण्र्ााकिया है । संभावित सुरक्षा चुनौती के क्रम में इस्लामिक देशों में देखे गए आतंकवादी गतिविधि, नेपाल के लिए भी ‘थ्रेट’ हो सकता है । सीमा क्षेत्र में हो सकनेवाले अपराध और आपराधिक योजना को नियंत्रित और निस्तेज करने के लिए उक्त निर्देशन दिया गया है । र्सार्क शिखर सम्मेलन के पहले र्सार्क देशों के गृहमंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए काठमांडू आए भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सुझाव दिया है कि सुरक्षा और नकली नोटों की तस्करी रोकने के लिए द्विपक्षीय संयंत्र बनाने की आवश्यकता है ।
इसके साथ ही भारत सरकार ने आतंकवादियों द्वारा नेपाल के महत्वपर्ूण्ा नेताआंे की हत्या हो सकने की सूचना नेपाल सरकार को दी है । काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास द्वारा दी गई सूचना में नेपाली नेताआंे की हत्या के साथ ही अपने दूतावास के वरिष्ठ अधिकारियांे के अपहरण हो सकने की संभावना का भी उल्लेख है । भारत ने एक गोपनीय तथा औपचारिक पत्र नेपाली नेताओं और भारतीय कूटनीतिक अधिकारियों की सुरक्षा से संबंधित अति संवेदनशील सूचना पिछले २४ सितम्बर २०१४ को दी थी ।
भारत ने पत्र में इस बात का उल्लेख किया है कि उसे यह सूचना अत्यन्त भरोसेमन्द तथा विश्वासी स्रोतों द्वारा मिली है । परराष्ट्र मंत्रालय द्वारा नेपाल को लिखे गए पत्र में किन नेताओं तथा कूटनीतिक अधिकारियांे की हत्या किए जाने की संभावना का खुलासा नहीं किया गया है लेकिन अन्तर्रर्ाा्रीय आतंकवादी संगठन अल कायदा और इंडियन मुजाहिदीन द्वारा इस प्रकार के कार्य किए जाने की संभावना का उल्लेख उक्त पत्र में है । पत्र में अत्यन्त ही सुरक्षा खतरावाले नेताओं के नामों का उल्लेख नहीं है, केवल ‘प्राँमिनेन्ट पाँलिटिसियन्स’ वाक्यांश का प्रयोग किया गया है ।
स्रोतों के अनुसार उक्त सूचना में त्रिभुवन विमानस्थल से विमान अपहरण हो सकने की संभावनाओं को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और अधिक बढÞा दी गई है । उक्त सूचना में कहा गया है कि अल कायदा और इंडियन मुजाहिदीन द्वारा काठमांडू विमान स्थल से नेपाली या भारतीय विमान के अपहरण करने की योजना बनायी जा रही है ।
नेपाल के परराष्ट्र स्रोत ने बताया ‘नेपाल में बडÞे नेताओं और भारतीय दूतावास के अधिकारियों के अपहरण करने की योजना सहित, खतरनाक गिरोह सक्रिय है, इसके बारे में लिखित और मौखिक जानकारी आयी है तथा इसके बारे में पुलिस और सुरक्षा निकायों को भी जानकारी दे दी गई है । स्रोत ने बताया कि दूतावास से आए उक्त पत्र को जानकारी के लिए पुलिस महानिरीक्षक उपेन्द्रकान्त अर्याल को भी भेज दिया गया है ।
उक्त पत्र में आतंकवादियों द्वारा विषाक्त गैसों का प्रयोग कर, सामान्य नागरिकों के अपहरण किए जाने का भी उल्लेख है । र्सार्क सम्मेलन की तेजी से तैयारी चलते रहने की वर्तमान अवस्था में भारत से ही वैसे आपराधिक गिरोहों के नेपाल प्रवेश करने की जानकारी दी गई है ।
नेपाल में अन्तर्रर्ाा्रीय आतंकवादी संगठन अलकायदा और इंडियन मुजाहिदीन के सदस्यों के सक्रिय होने की सूचना -क्या केवल हल्ला के रूप में तो नहीं आई है) इस संबंध में सुरक्षा निकायों ने विचार विमर्श करना शुरू कर दिया है । सुरक्षा स्रोतों के अनुसार औपचारिक पत्र द्वारा ही इस प्रकार की सूचना आने के कारण संवेदनशील होने की दिशा में सभी का ध्यान आकृष्ट हुआ है ।
भारत ने राजधानी और आसपास के कुछ स्थानों का नाम लेते हुए उन स्थानों पर आतंकवादियों के छिपे होने की जानकारी दी है । भारत ने काठमांडू और बाहर के अपने विभिन्न कूटनीतिक कार्यालयों तथा अधिकारियों के निवास के आसपास सुरक्षा गश्ती तेज करने का आग्रह भी किया है । -इति)

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