अस्थमा (Asthma) दमा के मुख्य लक्षण क्या है ? डा. अरुण कुमार सिहं

डा. अरुण कुमार सिहं .१० जून, धरान |
बी.पी. कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान धरान मे अस्थमा (Asthma) दमा रोग के बाल बालिका ओ.पी.डी.,इमेरजेनसी मे अक्सर राजविराज,जनकपुर ,बिराटनगर,मोरग ,धरान,इटहरी ,सिरहा आदि जगह से आते हे ! प्रो.डा. गोंरी शंकर शाह पीडेटिक बिभाग पर्मूख हे ! डा.सतिश यादव दमा क्लिनिक का सयोजक है , हरेक सोमबार २ से ४ बजे तक क्लिनिक चलता है ,करिब २०० बच्चे ओ.पी.डी से फाइदा ले रहे हैं !
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 अस्थमा (Asthma) दमा क्या है ?
 
अस्थमा (Asthma) दमा एक गंभीर बीमारी है, अस्थमा यूनानी शब्द है, जिसका अर्थ है – ‘जल्दी-जल्दी साँस लेना’ या ‘साँस लेने के लिए जोर लगाना’। जब किसी व्यक्ति को दमा का दौरा पड़ता है तो वह सामान्य साँस के लिए भी गहरी-गहरी या लंबी-लंबी साँस लेता है; नाक से ली गई साँस कम पड़ती है तो मुँह खोलकर साँस लेता है। वास्तव में रोगी को साँस लेने की बजाय साँस बाहर निकालने में ज्यादा कठिनाई होती है, क्योंकि फेफड़े के भीतर की छोटी-छोटी वायु नलियाँ जकड़ जाती हैं और दूषित वायु को बाहर निकालने के लिए उन्हें जितना सिकुड़ना चाहिए उतना वे नहीं सिकुड़ पातीं। परिणामस्वरूप रोगी के फेफड़े फूल जाते हैं, क्योंकि रोगी अगली साँस भीतर खींचने से पहले खिंची हुई साँस की हवा को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता। २०११ तक, पूरे विश्व में २३५ -३०० मिलियन लोग इससे प्रभावित थे, जिनमें लगभग २ ,५० ,००० मौतें शामिल हैं।
 
अस्थमा (Asthma) दमा का मुख्य लक्षण क्या है ?
दमा रोग से पीड़ित रोगी को रोग के शुरुआती समय में खांसी, सरसराहट और सांस उखड़ने के दौरे पड़ने लगते हैं। दमा रोग से पीड़ित रोगी को वैसे तो दौरे कभी भी पड़ सकते हैं लेकिन रात के समय में लगभग 2 बजे के बाद दौरे अधिक पड़ते हैं। दमा रोग से पीड़ित रोगी को कफ सख्त, बदबूदार तथा डोरीदार निकलता है। दमा रोग से पीड़ित रोगी को सांस लेनें में बहुत अधिक कठिनाई होती है। सांस लेते समय अधिक जोर लगाने पर रोगी का चेहरा लाल हो जाता है। लगातार छींक आना सामान्यतया अचानक शुरू होता है यह किस्तों मे आता है रात या अहले सुबह बहुत तेज होता है
ठंडी जगहों पर या व्यायाम करने से या भीषण गर्मी में तीखा होता है । दवाओं के उपयोग से ठीक होता है। क्योंकि इससे नलिकाएं खुलती हैं । बलगम के साथ या बगैर खांसी होती है । सांस फूलना, जो व्यायाम या किसी गतिविधि के साथ तेज होती है। शरीर के अंदर खिंचाव (सांस लेने के साथ रीढ़ के पास त्वचा का खिंचाव) आदि ।
 
दमा रोग होने का कारण क्या है ?
 
एलर्जी मौसम, खाद्य पदार्थ, दवाइयाँ इत्र, परफ्यूम जैसी खुशबू और कुछ अन्य प्रकार के पदार्थों से हो सकता हैं; कुछ लोग रुई के बारीक रेशे, आटे की धूल, कागज की धूल, कुछ फूलों के पराग, पशुओं के बाल, फफूँद और कॉकरोज जैसे कीड़े के प्रति एलर्जित होते हैं। जिन खाद्य पदार्थों से आमतौर पर एलर्जी होती है उनमें गेहूँ, आटा दूध, चॉकलेट, बींस की फलियाँ, आलू, सूअर आदि का मांस इत्यादि शामिल हैं।भावनात्मक दबाव, वायु प्रदूषण, विभिन्न संक्रमण और आनुवंशिक कारण होता हे । एक अनुमान के अनुसार, जब माता-पिता दोनों को अस्थमा या हे फीवर (Hay Fever) होता है तो ऐसे ७५ से १०० प्रतिशत माता-पिता के बच्चों में भी एलर्जी की संभावनाएँ पाई जाती हैं।इसके कुछ मुख्य कारण ये है।तंबाकू के धुएं से भरे माहौल में रहनेवाले शिशुओं को दमा होने का खतरा होता है। यदि गर्भावस्था के दौरान कोई महिला तंबाकू के धुएं के बीच रहती है, तो उसके बच्चे को दमा होने का खतरा होता है।मोटापे से भी दमा हो सकता है।
 
अस्थमा (Asthma) दमा का उपचार क्या है ?
 
अस्थमा की जांच के लिए डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण भी कर सकते हैं जैसे, चेस्ट के घरघराहट की आवाज सुनना। चेस्टं के घरघराहट की आवाज से अस्थतमा की गंभीरता को पहचाना जा सकता है। साल्बुटामओल्,स्टीरायेड जैसा दबाई खाने पर सकता हे ।डाक्टर का सलाह लेना जरुरी हे !
 
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