अस्वस्थता अंतरसंर्घष् पार्टी लिए घातक:
मोहन वैद्य किरण’

कम्यूनिष्ट पार्टी भीतर अन्तरसंर्घष्ा चलना अनिवार्य परिघटना है । पार्टीने का मतलब ही विपरीत विचारों का एकतत्व है । जहाँ विपरीतों का एकत्व नहीं होता है वो वास्तविक पार्टी होती है । इसी कारण मेरी समझ से अन्तरसंर्घष् कम्यूनिष्ट आन्दोलन भीतर का एक अनिवार्य परिघटना ही है । ये कोई नयी बात नहीं है । जो द्वंद्ववादी नहीं है वो अन्तरसंर्घष् में विश्वास नहीं करते हैं । अन्तरसंर्घष्ा में विश्वास नहीं करने वाले अधिभूतवादी होते हैं । वो कम्यूनिष्ट हो ही नहीं सकते । अंतरसंर्घष्ा के भी कई स्तर होते हैं । पार्टी भीतर कतिपय अवस्था में नीचले स्तर में कतिपय निम्न स्तर में और कतिपय उच्चस्तर में अंतरसंर्घष्ा चलता रहता है ।
समाज में चलने वाले अन्तरसंर्घष् ही पार्टी भीतर चलने वाले अन्तरसंर्घष् का स्तर निर्धारण करता है । समाज के भीतर का प्रभाव पार्टर्ीीें भी पडÞता है । कम्यूनिष्ट पार्टी भीतर अन्तरसंर्घष्ा को दो लाइन अन्तरसंर्घष्ा के रूप समझा जाता है ।
अन्तरसंर्घष्ा को समझने के लिए कम्यूनिष्ट पार्टर्ीीा कुशल नेता होना अनिवार्य है । अन्तरसंर्घष्ा को ठीक ढंग से समझने या उसका उपाय नहीं ढूँढÞे जाने पर पार्टर्ीीे भीतर टूटफूट या विभाजन तक की नौबत आ जाती है । दूसरा महत्वपर्ूण्ा पहलू यह है कि कम्यूनिष्ट पार्टर्ीीे भीतर पूँजीवादी और निम्न पूँजीवादी विचारधारा प्रतिविम्बित होने की अवस्था में पार्टर्ीीे भीतर अन्तरसंर्घष्ा मैत्रीपर्ूण्ा ना होकर शत्रुतापर्ूण्ा हो जाती है । ऐसे अवस्था में एक खास विन्दु पर पहुँचने के बाद अंतरसंर्घष्ा शत्रुतापर्ूण्ा हो जाता है । पार्टर्ीीे भीतर गलत तत्व के प्रवेश से पार्टर्ीीें गलत या शत्रुतापर्ूण्ा अंतरसंर्घष्ा को जन्म देता है । सच्चे मार्क्सवादियों को इस विषय पर र्सतर्क होना ही पडेÞगा । अभी तक विश्व कम्यूनिष्ट पार्टर्ीीे इतिहास और विकास में देखे गए अन्तरसंर्घष्ा का रूप यही है । जो नेपाल में हमारी पार्टर्ीीें चल रहा है । यही अंतर्रर्ाा्रीय कम्यूनिष्ट आंदोलन पर आधारित शिक्षा भी है । नेपाल के कम्यूनिष्ट आन्दोलन में अंतरसंर्घष्ा शुरु हो गया है । माओवादी के भीतर अभी अस्वस्थ अंतरसंर्घष्ा शुरु हो गया है । जिन विषयों पर अंतरसंर्घष्ा होना चाहिए, उन विषयों पर ना होकर जिन विषयों पर नहीं होना चाहिए उन विषयों पर जरुरत से ज्यादा ही अंतरसंर्घष्ा हो रहा है ।
हमारी पार्टर्ीीे भीतर जनयुद्ध के समय भी अंतरसंर्घष्ा अपने चरम पर था । लेकिन पार्टर्ीीे नेतृत्व वर्ग द्वारा सूझबूझ के साथ इस अंतरसंर्घष्ा को विराम दिया गया था । पार्टर्ीीेतृत्व की ही यह जिम्मेवारी है कि वो अन्तरसंर्घष्ा को कैसे हल करे । जहाँ तक रवीन्द्र श्रेष्ठ और मणि थापा द्वारा चलाई गई अंतरसर्घष्ा की बात है तो उनकी अन्तरसंर्घष्ा व्यवस्थित नहीं था । वो दोनों पलायनवादी चिन्तन के तरफ लगकर क्रान्ति से भाग खडेÞ हुए ।
माओवादी पार्टर्ीीे भीतर अंतरसंर्घष्ा इस समय केन्द्रीय समिति या यूँ कहूँ कि नेतृत्व वर्ग के बीच है और इसे व्यवस्थित तरीके से हल करने का प्रयास पार्टर्ीीध्यक्ष द्वारा किया जाना चाहिए । अंतरसंर्घष्ा के संबंध में हमें लेनिन, स्टालिन और माओ से शिक्षा लेनी चाहिए । रुस व चीन पार्टर्ीीे भीतर अराजकतावाद व एकलवाद के विरुद्ध हमारा संर्घष्ा है । एकता संर्घष्ा व रूपान्तरण के स्वीकार नहीं करने वालों के विरुद्ध हमारा संर्घष्ा जारी रहेगा । इतना ही नहीं मत को जबरदस्ती मिलाने वालों को खिलाफ भी हम लडÞ रहे है ।
माओवादी के भीतर रहे अंतरसंर्घष्ा को लेकर खास चिन्ता करने के बजाए अंतरसंर्घष्ा को समझने व हल करने के विषय पर चिन्ता करनी चाहिए । शत्रुतापर्ूण्ा नहीं होकर मैत्रीपर्ूण्ा अंतरसंर्घष्ा को पार्टर्ीीे फायदा होगी । यदि अन्तरसंर्घष्ा को शत्रुतापर्ूण्ा होने दिया गया तो पार्टर्ीीर इसका घातक प्रभाव हो सकता है ।
-लेखक एमाओवादी के उपाध्यक्ष हैं)

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