आओ शहीद बने !

जहां पुलिस आपको ताक कर सिर या छाती में गोली दागेगी और आप वहीं के वहीं हो गए ढेर । और आप बन गए ताजा–ताजा शहीद ।
बिम्मी शर्मा:यह शहीद होने का मौसम है । इसीलिए सब काम छोड़कर शहीद होने के लिए लाईन मे लग जाइए । जैसे आप गैंस और पेट्रोल, डीजल लेने के लिए घंटो लाईन में लगते हैं । उसी तरह हाथ धो कर शहीद होने के लिए पीछे लग जाईए । क्योंकि सरकार मुफ्त में हमें शहीद बनाने के लिए पुलिस को बन्दूक की गोलियाँ बांट रही है । इस देश में जहां मुफ्त में सिटामोल नहीं मिलता वहां पर मुफ्त में बन्दूक की गोलियाँ मिलना बडे सौभाग्य की बात है । यह उदारमना सरकार मधेश के सभी उधोग धन्दों को बंद करवा कर बस शहीद उत्पादन का कारखाना चला रही है । जो धड़ल्ले से चल रहा है ।
पर हम तो हर रोज शहीद हो रहे हैं । सरकार का पाला पोसा राजदुलारा उनकी दत्तक संतान कालाबजारी हमें हर रोज हर जगह शहीद बना रहा है । १५ सौ रुपए का गैंस ६ हजार में और सौ रुपए का पेट्रोल ५ सौ में वह भी बड़ी मुश्किल से खरीद कर जब हम घर लौटते हंै तब तक कई बार शहीद हो चूके होते हैं ।
डाक्टर, ईन्जीनियर, चार्टड एकाउटेंट बनने के लिए लाखो रुपए खर्च करने पड़ते है ं। तब भी कोई ग्यारेटीं नहीं की आप बन ही जाइएगा । पर शहीद बनने के लिएअपनी अंटी से कुछ खर्च नहीं करना पड्ता न कोई योग्यता की ही जरुरत है । बस आपको किसी आंदोलन में हिस्सा लेना है और सरकारी गोली के निशाने पर रहना है । जहां पुलिस आपको ताक कर सिर या छाती में गोली दागेगी और आप वहीं के वहीं हो गए ढेर । और आप बन गए ताजा–ताजा शहीद ।
जैसे फैक्ट्री से बन कर अभी अभी आया कोई केक हो । आपकी अच्छाईयों को केक के टुकड़े की तरह काटा जाएगा । सब आपको शहीद से सालिक बना कर उस में फूल, माला चढ़ा कर आपका जय जयकार करेंगे । सरकार इस के एवज में आप के परिवार को लाखों रुपए देगी । घरवाले पिण्ड दान करेंगे । देश के इतिहास और पाठ्य पुस्तक में आप का नाम आएगा । इससे ज्यादा क्या चाहिए हमें । जब तक जिंदा थे कोई पूछता नहीं था । अब सरकारी गोली सरकारी अस्पताल मे मरने के बाद आप राष्ट्रीय व्यक्ति हो गए । चारों ओर आपका नाम और काम गूंज रहा है ।
आप डाक्टर, इन्जीनियर और चार्टड एकाउटेंट बन कर जिन्दगी भर नहीं कमा पाते उतना शहीद बन कर और निरकुंश सरकार की गोली खा कर एक दिन में कमा लेगें । इसे कहते हैं “हीगं लगी न फिटकरी रगं चोखा हो जाय” । कुछ लगानी करना नहीं है बस मुफ्त में आमदनी और मान, सम्मान अलग से । आप के जाने के बाद सभी आप के परिवार को शहीद का परिवार कह कर सम्मान देंगे । उन्हें सरकारी नौकरी और अन्य जगह पर भी आरक्षण मिलेगा । आप के एक त्याग से आप के परिवार के वारे, न्यारे हो जाएँगें । यह कोई छोटी बात नही है । इसीलिए आओ हम सभी शहीद बनें ।
आखिर में यह देश और यहां की सरकार हमें जिंदा इन्सान समझती ही कब है ? यदि हम सच में इस देश के नागरिक होते तो अपनी आधारभूत आवश्यकता को पूरा करने के लिए हमें इतने पापड़ नहीं बेलने पड़ते । स्कूल में टीचर मुर्गा बनाते हैं और बाद में सरकार हमें गधा बना कर हम से काम लेती है । हम पैदा होते समय और मरने के बाद ही इन्सान होते हैं । बाँकी बीच के जीवन में तो हमें जानवरों से भी बदतर हालात में जीना पड़ता है । मधेश में आंदोलन हो रहा है । लोगों का खून सरकार की कृपा से राख बन कर हवा में उड़ रहा है । शायद पिएम ओली इसी से हवा में बिजली निकालेगें । ओली को तो मधेशी इन्सान नहीं पेड़ में पका हुआ आम नजर आता है । जिस के गिरने का उन्हें कोई मलाल नहीं । पिएम ओली सभी मधेशियों को शहीद बना कर मधेश को सालिक का शहर बना रहे हैं और उन के पाले हुए गुर्गे इस सालिक में रगं रोगन का काम कर रहे हैं ।
सरकार साल में सिर्फ एक दिन शहीद दिवस मनाती है । पर हम तो हर रोज शहीद हो रहे हैं । सरकार का पाला पोसा राजदुलारा उनकी दत्तक संतान कालाबजारी हमें हर रोज हर जगह शहीद बना रहा है । १५ सौ रुपए का गैंस ६ हजार में और सौ रुपए का पेट्रोल ५ सौ में वह भी बड़ी मुश्किल से खरीद कर जब हम घर लौटते हंै तब तक कई बार शहीद हो चूके होते हैं । जहां भी कोई सरकारी काम करवाने जाओ वहां पर रुपए की थैली और खुद को बार–बार शहीद बनाते हैं हम । शायद विश्व के किसी देश में भी इतने शहीद नहीं होगें जितने हमारे देश में शहीद हैं । क्योंकि हमलोग शहीद बनने के लिए ही पैदा हुए है । हमारा शहीद बनना देश और स्वास्थ्य के लिए अच्छा है ।
सरकार की बलवती इच्छा है कि इस देश को शहीदों का देश बनाए । इसीलिए अपने पाक इरादे को अंजाम देने के लिए मधेिशयों को अपना निशाना बना रही है । मधेश से शहीदों का बवंडर उठा है जो पूरा देश भर फैलेगा । पिएम केपी शर्मा ओली की बोली और पुलिस की गोली से जितने मधेशी शहीद हो रहे हैं । उस से दोगुना रक्तबीज की तरह और शहीद पैदा हो रहे हैं । जब तक इस देश में जीता जागता इन्सान बचा रहेगा तब तक वह अपना हक, अधिकार माँगेगा । यदि नहीं मिला तो सरकार और समाज से खोंस कर भी लेने की कोशिश करेगा । पर शव या शहीद कुछ नहीं माँगते । उनका लहु कुछ दिन में धरती में सूख जाएगा । और शव से शहीद बन गए तो सालिक बन कर पूजे जाएगें ।
अन्य देश अन्न की खेती करते हैं । हमारे देश में शहीदों की खेती होती है । २००७ साल में, २०४६ साल में, २०६२ साल का जन आंदोलन में, २०६३ साल के मधेश आंदोलन और अभी इस मौसम मे फिर से मधेश आंदोलन के नाम पर शहीदों की खेती और बुआई, कटाई हो रही है । वैदेशिक रोजगार में गए हुए लोग भी लकड़ी के बाक्स में शव बन कर देश लौट रहे हैं और देश में ही रह रहे लोग पुलिस की गोली से शव और शहीद बन रहे हैं । यह शहीद होने का ही मौसम है इसीलिए आओ सब मिल कर शहीद बने और अपने गले में फूलमाला पहनें ।
अभावों की कालरात्रि में सांस लेता यह देश नेताओं के स्वार्थ के कारण शहीद बन रहा है । यहां की जनता अभावों से जूझते–जुझते परेशान हो चूकी है । वह जीने से अच्छा मरना और शहीद होना बेहतर मानती है । कम से कम शहीद होने के बाद कुछ तो सरकार और राजनीतिक दल की तरफ से रियायत मिलेगी । अभावों को झेल रहा परिवार भी इस पीड़ा से उबर कर आर्थिक रूप से सपंन्न होगा । इसीलिए हम कुछ और बने न बने जीवन में एक बार शहीद जरुर बने । खुद के लिए न सही इस निरकुशं और अहंकारी सरकार को तख्तों ताज में टिकाने के लिए आओ हम सब शहीद बनें । क्योंकि इस देश के नागरिक शव से शहीद होते हुए सालिक बन रहे हैं और झूठे, मक्कार, भ्रष्टाचारी और अपराधी नेता इस देश कें मालिक बन बैठे हैं । हम सब की पीड़ा देश कर शव से शहीद बने सालिकों का दिल भी पसीज जाएगा पर इस देश की सरकार और पिएम ओली का नहीं ।
आप (ओली) जैसा जब कोर्ई
देश और जनता की जिदंगी में आए,
बात बिगड़ जाए,
और देश बर्बाद हो जाएं,
हां हां जनता शहीद बन जाए ।

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