आगे असली लड़ाई तो संसद में होना है (सन्दर्भ राजपा-फोरम गठबन्धन) : बृषेश चन्द्र लाल

 

बृषेश चन्द्र लाल, जनकपुरधाम,अक्टोबर १, २०१७ | स्थानीय तह के चुनाव के बाद एक आम धारणा दिखाई पड़ रही है कि राजपा नेपाल और संघीय समाजवादी फोरम को तुरन्त एक साथ आ जाना चाहिए और काँग्रेस, माओवादी एवं एमाले को परास्त करना चाहिए ।
यह जरुरी भी है, क्योंकि आगे असली लड़ाई तो संसद में होना है । मधेश को बलशाली संख्या में अपने प्रतिनिधियों को संसद में भेज कर संविधान में न्यायपूर्ण संशोधन के लिए दबाब बढ़ाना जरुरी है । संख्या भी होना चाहिए और प्रतिनिधियों में कर्मठता, एजेण्डा के प्रति समझ तथा प्रतिवद्धता एवं भीड़े रहने का उर्जा भी होना चाहिए । अगर यह नहीं होता है तो हम बहुत पीछे चले जायेंगे । हमारा संघर्ष, शहादत और आन्दोलनकारीयों का खून बेकार चला जाएगा । मधेश आन्दोलन के इस अध्याय का कुछ वर्षों के लिए अन्त हो जाएगा और युवाओं तथा नई सन्तति को तब दूसरा कोई रास्ता ढूढ़ना मजबूरी बन जाएगा ।
सदैव से मधेशीयों का मत रहा है कि मधेश केन्द्रित सभी पार्टी मिल जायें । जब तक हमारे न्यायोचित मांगों का सम्वोधन नहीं हो जाता, हम सिर्फ और सिर्फ मधेश के मुद्दों के बारे में ही सोचें । एकजूट रहें । चाहे सड़क पर हों चाहे संसद में या फिर दुनियाँ के सामने में – एक बात एक साथ होना जरुरी है । मधेशीयों की यह चाह इतना सटीक और वास्तविक है कि इसे कोई काट नहीं सकता । कोई तर्क नहीं है इसके खिलाप ।
एकीकरण या गठबन्धन ?
बहुत ही मशक्कत के बाद ६ पार्टीयों का एकीकरण हुआ । लाभ तो हुआ है मगर एकीकरण के मानसिकता के कमी में जो बन्दरी बांट और बन्दरी न्याय देखने को मिली उससे लड़ाकू और कर्मठों में भारी पीड़ा है । बराबर भार का सूत्र एकीकरण के मानसिकता के विकास के लिए अपार उदारता का प्रवाह था । मगर जिम्मेवार स्थान के लोगों ने इसे एक लाटरी समझ लिया । कोई स्तर नहीं, राजनैतिक व्यवहार नहीं । किसी को कहीं भी बिठा दिया गया और खडा कर दिया गया ।
आन्दोलनकारिता, कर्मठता, एजेण्डा के प्रति प्रतिवद्धता, अवसरवादिता तथा झिनाझपटी से परास्त हो कर विमूढ खडी रह गई । यही कारण है कि स्थानीय तह के चुनाव में जो उपलब्धि एकीकृत राजपा को मिलनी चाहिए थी नहीं मिल सकी । जीत के निश्चित सम्भावनाओं से युक्त स्थानों पर हमें हार मिली । आज नहीं तो कल इसका विश्लेषण होगा ही । कारण सिर्फ दो बाहर आयेंगे – १. अनुचित स्वार्थ, एकीकृत मानसिकता के विपरित कार्यकर्ताओं के भावना से खिलवाड़, या फिर २. किसी ग्रैन्ड षडयन्त्र का घुसपैठ ।
जहाँ-जहाँ असन्तुष्टि दब गई और साथीयों ने व्यक्ति की बात छोड़ कर एजेण्डा को महत्त्व दिया या अपेक्षाकृत सही निर्णयें हुईं जनता ने हमें तहे दिल से समर्थन दिया है । मिला मत कहीं से पार्सल हो कर नहीं आई है, वहाँ के स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं ने दिलाया है । अतएव, जमीन के साथी सलाम के अधिकारी हैं । कोई और नहीं ! कुछ और नहीं !!
समय बहुत कम है । राजपा और फोरम के बीच तुरन्त एकीकरण सम्भव नहीं है क्योंकि इसके लिए अधिक समय चाहिए । हड़बड़ में बहुत सारी समस्यायें उत्पन्न होंगी । अतएव तत्काल गठबन्धन ही उत्तम विकल्प है । एक तरफ संसफो के अध्यक्ष ने अपनी अन्तर्वार्ता में गठबन्धन की आवश्यकता पर जोड़ दिया है तो तुरत ही राजपा की राजनैतिक समिति ने इसे स्वागत करते हुए संसफो के साथ संसदीय और प्रादेशिक निर्वाचन में गठबन्धन होना उचित बताते हुए राजपा के संयोजक को आवश्यक पहल का अधिकार दिया है । अब आवश्यकता सिर्फ सकारात्मक व्यवहारिक दृष्टिकोण का है ।
गठबन्धन का आधार भी जनता ने तय कर दिया है –
१. जिस संसदीय और प्रादेशिक क्षेत्र में राजपा या संसफो का जीत हुआ है, या वे प्रमुख प्रतिस्पर्धी रहे हैं वहाँ-वहाँ के मत को जोड़ा जाय; जिसका जिस संसदीय या प्रादेशिक क्षेत्र में स्थानीय तह के निर्वाचन में अधिक मत मिला है उसे वो सीटें छोड़ दिया जाय ।
२. जहाँ-जहाँ इन दोनों पार्टी के मत को मिला कर जीत हासिल होने का परिणाम आता है, वहाँ दोनों पार्टी मिलकर आन्दोलन के प्रतीक बनने योग्य उम्मेदवार तय करें ।
३. पश्चिम मधेश के लिए उम्मेदवारी के निर्णय का मापदण्ड और आधार संविधानसभा २ में प्राप्त मत हो ।
४. बांकी अन्य स्थानों पर सीट बाँट लें । योग्य उम्मेदवार चुनें ।
५. संसदीय क्षेत्र से गठबन्धन के कर्मठ, उर्जावान्, आन्दोलन में सक्रिय केन्द्रीय नेता उम्मेदवार हों ।
६. प्रादेशिक क्षेत्र से स्थानीय आवश्यकताओं को सम्वोधन करते हुए कर्मठ, उर्जावान्, आन्दोलन में सक्रिय स्थानीय नेता को उम्मेदवार बनायें ।
७. गठबन्धन यह भी सुनिश्चित करे कि दोनों घटक समानुपातिक उम्मेदवार के चयन में नाता, परिवार तथा अनुचित लाभ को बिल्कुल स्थान नहीं देगी ।
गठबन्धन का मूल-आधार :
१.मधेश एजेण्डा सम्वोधन एवं तदनुकूल संविधान में संशोधन हेतु हर तरह का प्रयास और संघर्ष ही गठबन्धन का मूल और अपरिवर्तनीय सूत्र होगा ।
२. प्रतिनिधित्त्व लगायत न्यूनतम संविधान संशोधन का नया संयुक्त प्रस्ताव तैयार कर कार्यान्वयन के लिए नई संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी ।
३. गठबन्धन मधेश के अल्पकालिन व दिर्घकालिन विकास के लिए संयुक्त योजना निर्माण कराएगी तथा जनसंख्या के हिसाब से मधेश सहित अन्य क्षेत्रों में विकास बजेट निर्धारण के लिए काम करेगी ।
४. बाढ नियन्त्रण तथा सिंचाई, सड़क, उर्जा (खास कर बिजली और तेल) का प्रबन्धन, मधेश के गाँवपालिका एवं नगरपालिकाओं का योजनावद्ध विकास, मधेश में व्यापारिक और औद्योगिक केन्द्रो का निर्माण ताकि रोजगार के अवसर में वृद्धि से युवाओं को विदेश जाना रुके , जैसे मसला हमारे अभी के तत्काल का प्राथमिकता होगा ।

कार्यशैली :
 हमारी नेतृत्त्वपंक्ति व्यक्तिगत अहम्, अपनी और घेरे के स्वार्थ, जाति-नाता-परिवारवाद से मुक्त हों । क्योंकि मधेश का मुद्दा तो बराबरी का है । सम्पूर्ण मधेश का है । सभी नेतृत्त्वपंक्ति अपने-अपने स्थान पर मर्यादित व्यवहार करें ।
 कार्यकर्ता अनुशासित हों और पार्टी निर्देशों के अनुरुप आगे बढ़ें । वैचारिक दृढ़ता हो । स्थिति के समझ में गम्भीरता हो, अस्तव्यस्ता नहीं ।
बस इतना ही हमारा लक्ष्य पूरा कर देगा ।

निष्कर्ष :
अब गेंद राजपा और संसफो नेताओं के प्रांगण में है । कार्यकर्ता उत्साह से तैयार हैं । जनता ने तो मत केमाध्यम से कह ही दिया है । अहम् के चक्कर में बखेरा न करें । ज्योतिपुंज को देखें । जय मधेश !

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