आजादीके लाल और सत्ताके दलाल : रोशन झा

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रोशन झा, राजबिराज, १८ दिसिम्बर | मधेस पर नेपाली उपनिवेशिक शासन के प्राम्भ से ही मधेसी जनता बिभेद और उत्पिडन का शिकार होते आए हैं, गोरखाली नेपाली शासक द्वारा मधेसीयों की राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, साँस्कृतिक भाषिक अधिकार का अपहरण करके उन्हें गुलामी की जंजीरों मे जकड़ दिया गया । जनक सिता बुद्ध लोहाड़सेन सलहेस दिनाभदरी जैसे महामानवों की ये जन्मभूमी नेपाली शासकों के अत्याचार के बिरुद्ध आज चित्कार रही है कि हम अपनी सँस्कृति और अपना पहचान को नहीं खोने देंगे, हम अपना अल्ग भूगोल का पुनः निर्माण करेंगे । जहाँ एकतरफ हजारौं मधेसी यूवा आजादी के लिए संघर्षरत है; तो वहीं दुसरीतरफ मधेस के नामपर सक्रिय राजनिति करनेवाले लोग और राजनितिक दल नेपाली शासन में सत्ता प्राप्ति की दलाली में मगन है ।
मधेसवादी दल के नेताओं की स्थिति कुछ एसी है कि गंगा जानेपर गंगाराम और जमुना जानेपर जमुनादास, बारम्बार मधेसी जनता के भावनाओं के साथ खिलवाड करते आ रहे ईन महाभुपोने मधेसीयों के बलिदानी पे सत्ता की रोटी सेकने का काम किया है । जब ये लोग मधेसी जनता के समक्ष के होते है तो अधिकार प्राप्ति की बड़ी-बड़ी डिड़्ग हाकते फिरते है किन्तु नेपाल के मन्त्रीमण्डल में प्रवेश पाने के बाद मधेस का मुद्दा छोडकर सच्चा नेपाली होनेका अथक प्रयास में ब्यस्त हो जाते हैं । आजादी का नारा बुलन्द करनेवाले मधेस माता के लाल दिनानुदिन फिरड़्गी नेपाली पुलीस दमन का सिकार होते हुए भी बुलन्द ईरादों के साथ मधेस स्वराज की लडाई लड रहै हैं; तो वही कुछ सत्ता के दलाल आजादी की दलाली करते हुए सत्तामोह में आकर मधेसीयों को दास्ता की जंजीरों जकडे रखने मे नेपाली शासकों का सहयोग करने मे जुटे हैं ।
मधेस और मधेसी जनता के हक-अधिकार के लिए संघर्षरत सभीको एकजुट होकर आजादी कि लड़ाई लडने की आवश्यकता है तभी जाकर मधेसी जनता अपनी सँस्कृति अपना पहिचान और अपना वास्तविक अधिकार प्राप्त कर सकता हैं।
“अब की बार एक ही माँग; जनमत-संग्रह का हो एलान” ।

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1 Comment on "आजादीके लाल और सत्ताके दलाल : रोशन झा"

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aman jha
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