आज से छठ पर्व का विधिवत शुभारम्भ, बाजार में भीड, घाट की सफाइ जाड़ी

chhath-photo

विजेता चौधरी, काठमांडू, कार्तिक १९
हे छठी मैया !
अरग दिलइहँ,
उगिहँ सूरुज गोसइयाँ हे…..
सूर्य उपासना व निष्ठा का अनोखा पर्व छठ का आज से विधिवत शुरुवात हुआ है ।
मिथिला, अवध, भोजपुर लगायत के क्षेत्र में आज शुक्रबार नहाय–खाय विधि से छठ पूजन शुभारम्भ हुआ है ।
पं कौशल शरण बताते हैं– कार्तिक शुक्ल चौथी से सप्तमी तक विभिन्न विधिविधान के साथ मनाया जाने वाल छठ पर्व का पहला दिन आज स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर नियम से बनाया हुआ शुद्ध व सात्विक भोजन कर नहाय खाय विधि किया जाता है ।
छठ वर्त करने वाले सभी वर्तालुओं ने आज ये विधि किया । कुपण्डोल ललितपुर निवासी अर्चना दास ने आज नहाय खाय विधि समाप्त कर छठ सामाग्री की तैयारियाँ करने की बात बतार्इं ।
अर्चना ने बताया कल दिनभर निराहार रह कर खरना विधि किया जाता है ।
पं शरण ने खरना विधि के विषय बताया पर्व के दुसरे दिन पञ्चमी तिथी में व्रतालु दिन भर निराहार ब्रत कर रात को सख्खर में पकाया हुआ खीर मात्र खाकर खरना विधि करते हैं ।
इसी प्रकार इतबार को शाम को अस्त होते सूर्य को तथा सोमबार उदय होते सूर्य को अर्घ अर्पण कर चार दिनों के महान पर्व छठ समापन किया जाता है ।
काठमांडू के बाजारों में छठ गीत की गुञ्जन
यू तों काठमांडू में छठ के गीत तराइ या मिथिला क्षेत्र की तरफ सनने को नहीं मिलते लेकिन कुछ दिनो से काठमांडू में पानदूकान तथा सैलुनों से छठ के पावन गीत की गुञ्ज राह चलते हर किसी को रोमाञ्चक बनाए हुई है ।
सभ्यतानगर थापाथली के रहने वाले विमलेश मंडल बताते हैं छठ के गीत सुनकर ही मधेशवासियों के मन पर्वमय हो उठता है ।
छठ के गितों ने ही कार्तिक महिना को मनोरम माह बनाता है कुपण्डोल के भगत कामत बताते हैं । उन्होंने बताया कुपण्डोल में किसी किसी दुकान व घरों से भी छठ गीत के मिहीन ही सहि बाणी सुनकर मन विभोर हो उठता है । कामत स्यवम गीतकार हैं ।
बाजारो में छठ के सामान खरिदने वालें की भारी भीड
रमादेवी मिश्र ने बताया नहाय खाय के दिन से ही छठ के लिए मिष्ठान, फलफूल लगायत के अन्य आवश्यक सामाग्री खरिदने का प्रचलन पुराना रहा है । इस से पहले खरिदना स्वच्छता के हिसबा से सही नहीं माना जाता है । उन्होंने बताया छठ पर्व बहुत ही स्वच्छता तथा निष्ठा के साथ मनाया जाता है । इस मे जरा सी भी लापरवाही अशुभ मानी जाति है अतः आज नहाधोकर सामान खरिद कर पूजा के कोठली या एक साफ स्थान में रखा जाता है । इसी लिए आज के दिन छठ के समान खरिदने वालों की बाजार में खासे भीड उमड पडती है ।
काठमांडू के कोटेश्वर, कालिमाटी, बानेश्वर ललितपुर के कुपण्डोल, लगनखेल लगायत के प्रमुख बाजारों में भीड अकल्पनीय दिख रही है ।
गुड, ताजे फल, शब्जी, लगायत अन्य समानो के लिए बाजार में भीडभाड का माहौल बना हुआ है ।
छठ के लिए सजते घाट
कुपण्डोल स्थित बागमति के किनार को माटी भर के साफ बना दिया गया है । छठ पूजा समिति ने बताया यहाँ तकरिबन सौ से अधिक वर्तालुओं का घाट लगाया जाता है ।
समिति ने बताया नदी में पानी की धार पतली हो गइ है फिर भी कुछ स्थानो को साफसफाइ कर पूजा के घाट योग्य बनाया गया है बताय । समिति ने नदी किनारे छठ माता की प्रतिमा भी स्थापित करने की बात बताइ ।
कुपण्डोल के बागमती नही लगायत नख्खुखोला सहित के कईं स्थानो में छठ घाट निर्माण किया जा रहा है ।
विजेता चौधरी, काठमांडू, कार्तिक १९ ।
हे छठी मैया !
अरग दिलइहँ,
उगिहँ सूरुज गोसइयाँ हे…..
सूर्य उपासना व निष्ठा का अनोखा पर्व छठ का आज से विधिवत शुरुवात हुआ है ।
मिथिला, अवध, भोजपुर लगायत के क्षेत्र में आज शुक्रबार नहाय–खाय विधि से छठ पूजन शुभारम्भ हुआ है ।
पं कौशल शरण बताते हैं– कार्तिक शुक्ल चौथी से सप्तमी तक विभिन्न विधिविधान के साथ मनाया जाने वाल छठ पर्व का पहला दिन आज स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर नियम से बनाया हुआ शुद्ध व सात्विक भोजन कर नहाय खाय विधि किया जाता है ।
छठ वर्त करने वाले सभी वर्तालुओं ने आज ये विधि किया । कुपण्डोल ललितपुर निवासी अर्चना दास ने आज नहाय खाय विधि समाप्त कर छठ सामाग्री की तैयारियाँ करने की बात बतार्इं ।
अर्चना ने बताया कल दिनभर निराहार रह कर खरना विधि किया जाता है ।
पं शरण ने खरना विधि के विषय बताया पर्व के दुसरे दिन पञ्चमी तिथी में व्रतालु दिन भर निराहार ब्रत कर रात को सख्खर में पकाया हुआ खीर मात्र खाकर खरना विधि करते हैं ।
इसी प्रकार इतबार को शाम को अस्त होते सूर्य को तथा सोमबार उदय होते सूर्य को अर्घ अर्पण कर चार दिनों के महान पर्व छठ समापन किया जाता है ।
काठमांडू के बाजारों में छठ गीत की गुञ्जन
यू तों काठमांडू में छठ के गीत तराइ या मिथिला क्षेत्र की तरफ सनने को नहीं मिलते लेकिन कुछ दिनो से काठमांडू में पानदूकान तथा सैलुनों से छठ के पावन गीत की गुञ्ज राह चलते हर किसी को रोमाञ्चक बनाए हुई है ।
सभ्यतानगर थापाथली के रहने वाले विमलेश मंडल बताते हैं छठ के गीत सुनकर ही मधेशवासियों के मन पर्वमय हो उठता है ।
छठ के गितों ने ही कार्तिक महिना को मनोरम माह बनाता है कुपण्डोल के भगत कामत बताते हैं । उन्होंने बताया कुपण्डोल में किसी किसी दुकान व घरों से भी छठ गीत के मिहीन ही सहि बाणी सुनकर मन विभोर हो उठता है । कामत स्यवम गीतकार हैं ।
बाजारो में छठ के सामान खरिदने वालें की भारी भीड
रमादेवी मिश्र ने बताया नहाय खाय के दिन से ही छठ के लिए मिष्ठान, फलफूल लगायत के अन्य आवश्यक सामाग्री खरिदने का प्रचलन पुराना रहा है । इस से पहले खरिदना स्वच्छता के हिसबा से सही नहीं माना जाता है । उन्होंने बताया छठ पर्व बहुत ही स्वच्छता तथा निष्ठा के साथ मनाया जाता है । इस मे जरा सी भी लापरवाही अशुभ मानी जाति है अतः आज नहाधोकर सामान खरिद कर पूजा के कोठली या एक साफ स्थान में रखा जाता है । इसी लिए आज के दिन छठ के समान खरिदने वालों की बाजार में खासे भीड उमड पडती है ।
काठमांडू के कोटेश्वर, कालिमाटी, बानेश्वर ललितपुर के कुपण्डोल, लगनखेल लगायत के प्रमुख बाजारों में भीड अकल्पनीय दिख रही है ।
गुड, ताजे फल, शब्जी, लगायत अन्य समानो के लिए बाजार में भीडभाड का माहौल बना हुआ है ।
छठ के लिए सजते घाट
कुपण्डोल स्थित बागमति के किनार को माटी भर के साफ बना दिया गया है । छठ पूजा समिति ने बताया यहाँ तकरिबन सौ से अधिक वर्तालुओं का घाट लगाया जाता है ।
समिति ने बताया नदी में पानी की धार पतली हो गइ है फिर भी कुछ स्थानो को साफसफाइ कर पूजा के घाट योग्य बनाया गया है बताय । समिति ने नदी किनारे छठ माता की प्रतिमा भी स्थापित करने की बात बताइ ।
कुपण्डोल के बागमती नही लगायत नख्खुखोला सहित के कईं स्थानो में छठ घाट निर्माण किया जा रहा है ।

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