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आज १३वें लोकतन्त्र दिवस

काठमांडू, २४ अप्रिल । वि.सं. २०६२–०६३ साल के दूसरा जनआन्दोलन की सफलता को स्मरण करते हुए आज १३वें लोकतन्त्र दिवस मनाया जा रहा है । वि.सं. २०५९ जेष्ठ ८ गते तत्कालीन राजा ज्ञानेन्द्र शाह द्वारा विघटित संसद् को वि.सं. २०६३ वैशाख ११ गते स्वयम् ज्ञानेन्द्र शाह ने ही पुनस्थार्पित किया था । इसके पिछे लाखों जनता की भूमिका है ।


तत्कालिन शाही सत्ता के विरुद्ध लाखों जनता सड़क आन्दोलन में उतर आए थे, आन्दोलन के दौरान लगभग २ दर्जन सर्वसाधारणों ने अपनी जान गवां दी थी । जनता की ताकत को मध्यनजर करते हुए तत्कालीन राजा शाह ने संसद् को पुनस्र्थापित किया । जिसको राजनीतिक वृत्त में ‘लोकतन्त्र’ दिवस के रुप में जाना जाता है ।
उसके बाद सशस्त्र और भूमिगत युद्ध में शामिल तत्कालीन माओवादी और सात दल के बीच औपचारिक कार्यगत एकता हुई थी । माओवादी को शान्ति प्रक्रिया में शामिल कराने से लेकर लोकतान्त्रिक गणतन्त्र स्थापना के लिए भी इस आन्दोलन एक महत्वपूर्ण परिघटना के रुप में माना जाता है । पिछलेसाल तक वैशाख ११ गते को लोकतन्त्र दिवस और जेष्ठ १५ गते को गणतन्त्र दिवस को रुप में सार्वजनिक छुट्टी दी जाती थी । लेकिन वर्तमान ओली सरकार ने दोनों छुट्टी को कटौती की है ।

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