आठ का जादू ! इस देश में आठंवी कक्षा पास का जादू चल रहा है ।

बिम्मीशर्मा, काठमांडू ,८ फरवरी |

हमारे देश में आठ का जादू पिछले कुछ समय से अपना असर दिखा रहा है । यह आठ का जादू देश की सर्वोच्च सत्ता पर सर चढ़ कर बोल रहा है । जब देश के तारणहार प्रधानमंत्री ही आठ कक्षा पास हैं तो यह जादू सभी के सर चढ़ कर बोलेगा ही । यह छोटी बात नहीं हैं कि इस देश से शिक्षा का महत्व ही खतम हो रहा है और इस का श्रेय पिएम ओली को जाता है । वह देश में आठ कक्षा या मेट्रिक पास से ज्यादा को किसी पद में बिठाना नहीं चाहते । ओली की नजर मे आठ कक्षा पास ही सम्पूर्ण शिक्षा है । बेचारे डा. बाबुराम भट्टराई और डा. राम शरण महत्त कितने अभागे हंै ।

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हमारे उत्तरी पडोसी देश चीन मे आठ अंक को बहुत ही शुभ माना जाता है । इसीलिए चीन ने सन २००८ में आठंवा महीना अगस्त की आठ तारीख में अन्तराष्ट्रीय ओलम्पिक गेम समारोह का आयोजन किया था । अब ओली महोदय भी तो चीन से आयातित कम्यूनिष्ट विचारों से दीक्षित हैं । उन पर भी आठ का प्रभाव कायम है । इसीलिए आठ कक्षा से आगे पढ़ना ओली ने जरुरी नहीं समझा । आखिर एक कक्षा पढें या आठ कक्षा पढ़ें या निरक्षर रहें या पीएचडी करें । उन्हें तो बस देश और जनता का गला ही काटना है । पहले झापा में २०२८ साल में गला काटा था इन्होंने अब जनता का काट रहें हैं ।

ओली जानते हैं कि ज्यादा पढ़े, लिखे लोगों के सत्ता में आने से वह देश, समाज और जनता के प्रति और ज्यादा जिम्मेवार हों जाएँगे । अपना काम इमानदारी से अच्छी तरह करेगें । और हिटलर जैसे विचारों वाले ओली को यह कैसे मंजूर हो सकता है । इसीलिए पिएम ओली अर्थ मंत्रालय जैसा देश का आर्थिक व्ययभार संभालने वाले मंत्रालय में सिर्फ मेट्रिक पास विष्णु पौडेल को मंत्री बनाया । और देश के आंतरिक मामलों की जिम्मेवारी संभालने वाले गृह मंत्रालय में भी कम पढे लिखे पूर्व माओवादी लडाकू शक्ति बस्नेत को गृह मंत्री बनाया । जो जिस सोच से निर्देशित हो कर और बन कर आता है वह अपने आसपास उसी तरह का माहौल पैदा करता है । और माशाअल्लाह पिएमओली यह माहौल पैदा करने में सफल रहे है । वह खुद भी रोगी हो कर भी पिएम बने और राष्ट्रपति भी एक रोगी को ही बनाया । इसीलिए देश दिन प्रतिदिन रोगी और खोखला होता जा रहा है ।

मधेश आंदोलन मे सहभागी नेता पिएम ओली को फूटी आंख नहीं सुहाते है । क्योंकि आंदोलन में सहभागी ज्यादातर नेताओं की योग्यता कम से कम भी बिए पास है । अब आठंवी पास ओली को बिए पास मधेशी नेताओं से डर तो लगेगा ही । इसीलिए वह संविधान में तराई या मधेश का नाम भी लिखाना नहीं चाहते थे । और इसीलिए मधेश में शांति के लिए जब विशाल मानव जंजीर बनाई गई तब उस को ओली ने “मक्खीकाजंजीर”उपनाम दे कर अपमानित किया था । जिस की आंख और विचार ही मक्खी जैसी छोटी हो तो वह दूसरों को भी मक्खी ही देखेगा । जब मधेश आंदोलन में पुलिस की गोली से जब मधेशी जन मरे तब भी ओली ने कहा था आम कें पेड से दो, चार आम के गिरने से पेड़ खाली नहीं हो जाता । ” ओली ने घुमा कर या अपने मन की कुंठा को निकाल कर भी मधेश “आम” है अर्थात खास है । आम मतलब फलों का राजा । इसीलिए मधेश में फलने वाला मधेश की शान आम से तुलना कर मधेश को और ज्यादा विशिष्ट बना दिया ओली ने । मधेश आम की फूलवारी है और मधेशी जनता मीठे, रसिले आम के फल जैसे हैं । जो दूसरों को भी अपने जैसा ही मीठा और फलदायी बनाने का दम रखते हैं । पहाड़ी आलू बुखारा या आडू को कौन पूछता है ?

आठ कक्षा पास ओली से देश संभालने की ल्याकत की उम्मीद करना हमलोगों की ही बेवकूफी हैं । ओली अपनी जुबान को संभाल ले और फिसलने नहीं दे तो यही बहुत है देश के लिए । ओली देश की उन्नति नहीं अवनति कराना चाहते हैं । इसीलिए अपने जैसा ही कम शिक्षित लोमड़ियों की झुंड को अपने मंत्री मंडल में शामिल कर लिया है । शिक्षित भेंड़ों को अपने झुंड मे शामिल करने से उन के खुद का ही बेड़ा गर्क हो जाता तब ? इसीलिए देश में आठंवी कक्षा पास का जादू चल रहा है ।

और दूसरी तरफ आठ कक्षा पास रिषी धमला का जादू भी मीडिया में छाया हुआ है । रिषी धमला अपने आठ कक्षा पास बुद्धि के अनुसार ही प्रश्न पूछते हैं और जवाब भी अपनी ही हैसियत के अनुसार उम्मीद करते हैं । क्योंकि रिषी धमला को इस से ज्यादा आता भी नहीं और उनकी मुर्खों जैसी योग्यता की भी यहां के लोग कायल है । कल क्या पता रिषीधमला भी ओली की तरह इस देश का प्रधानमंत्री बनजाए ?आखिर इस देश में आठंवी पास का सिक्का हर तरफ चल रहा है ।

नेपाल में कोई भी पत्रकार या मीडिया कर्मी जब सूचना विभाग में प्रेस पास लेने के लिए जाता है । तब उस की सारी योग्यताओं को दरकिनार कर सिर्फ एसएलसी पास का सर्टिफिकेट मांगा जाता है । यदि किसी ने बीए या एम ए पास का सर्टिफिकेट पेश किया तो वह अमान्य होगा और उस को सूचना विभाग से प्रेस पास नहीं मिलेगा । पर किसी ने एसएलसी पास का सर्टिफिकेट पेश किया तो उसे तुरतं प्रेस मास मिल जाएगा । हो सकता है भविष्य में पिएम ओली और एमाले का भातृ संगठन प्रेस चौतारी का जादू यहां भी चल जाए । और एसएलसी पास की जगह आठंवी पास के सर्टिफिकेट को ही मान्य कर दियाजाए । तब क्या होगा ? क्योंकि एसएलसी का सर्टिफिकेट सभी संभाल कर रखते हैं पर आठंवी पास का सर्टिफिकेट संभाल कर कौन रखेगा ? आखिर में इस देश में ओली और आठ का बोलबाला जो है ? इसीलिए कभी भी कुछ भी हो सकता है । होशियार रहने में ही सभी का कल्याण है । क्योंकि इस देश में ओली की बोली को ही कानून और पुलिस की गोली को ही शासन या कानूनी राज्य माना जाता है । इसीलिए आठ के जादू मे मस्त रहिए क्योंकि भ्रम का परदा तो कभी न कभी उठेगा ही और सत्य जगजाहिर होगा । (व्यग्ंय )

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