आतिथ्य की तैयारी में व्यस्त राजधानी

सम्पादकीय
उत्साह और उमंग का मौसम जा चुका है । त्योहारों का खुमार उतर चुका है । फिलहाल नजरें संघीयता और संविधान पर टिकी हर्ुइ हैं । जनता की मनोदशा बन चुकी है कि उन्हें समय पर संविधान मिलने वाला नहीं है । मधेश और मधेशवादी दल एक नए आन्दोलन की राह पर चलने का मन बना चुके हंै । किन्तु इन सब के बीच हमारे प्रधानमंत्री का आश्वासन लगातार मिल रहा है कि, संविधान समय पर और सहमति द्वारा ही बनेगा । अब ये तो प्रधानमंत्री ही जानें कि वो यह दावा किस आधार पर कर रहे हैं । क्रिकेट के मैदान में आखिरी बाँल पर भी उम्मीद टिकी रहती है और यह माना जाता है कि यह चमत्कारों का खेल है और इसमें अंतिम समय पर भी पासे पलट सकते हैं, सम्भवतः यह चमत्कार राजनीति के मैदान में भी हो जाय क्योंकि राजनीति के खिलाडÞी प्रयासरत हैं और जनता परिणाम देखने को आतुर है ।
क्रिकेट की चर्चा आई तो नेपाली क्रिकेट की उपलब्धियों पर हमारे युवा खिलाडिÞयों को बधाई देना तो बनता है क्योंकि, सुविधाओं और सहयोग की कमी के बावजूद उन्होंने देश को गौरवान्वित होने का जो अवसर दिया है वह सराहनीय है ।Preparations for Saarc 2014
आतंकवाद की मार को झेलता विश्व संभावित विश्वयुद्ध की कगार पर खडÞा है । नरसंहार, मौत का तांडव और अपनी ही मिट्टी पर खेलने वाले खूनी खेल के मंजर इतने भयावह हैं कि मानव, मानवता और नैतिकता जैसे शब्द खोखले लगने लगे हैं ।
काठमान्डू आतिथ्य सत्कार हेतु खुद को तैयार कर रहा है । १८वें दक्षेस सम्मेलन की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं क्योंकि हमारी परम्परा Preparations for Saarc 2014 hathmanduरही है ‘अतिथि देवो भवः’ । परन्तु क्या हमारी राजधानी को सँवरने के लिए हर बार र्सार्क की आवश्यकता होगी – आज जो तत्परता दिखाई दे रही है, काश ये नजारा पहले भी देखने को मिला होता । खैर किसी बहाने ही सही दृष्टि सुख तो प्राप्त हुआ । देखना यह है कि संविधान निर्माण के इस गम्भीर वक्त में आतिथ्य का जो भार नेपाल को मिला है, इसमें वह किस तरह दक्षिण एशियाली देशों में अपनी पहचान बनाएगा और बहुआयामी समस्याओं के समाधान हेतु किस तरह क्षेत्रीय सहयोग जुटा पाएगा । ‘शान्ति और समृद्धि के लिए सम्मेलन’ के नारे के साथ आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में कई महत्वपर्ूण्ा मसलों पर विचार होने की आवश्यकता है मसलन, आतंकवादी गतिविधियाँ, अतिवाद, शांति, समृद्धि और दक्षिण एशियाली देशों में विकास- दिशा की संभावनाएँ । यह सम्मेलन नेपाल की आंतरिक समस्याओं और परिस्थितियों के लिए कितनी उपलब्धिमूलक होगी यह जिज्ञासा जनमानस में है । अभी तो देश को आतिथ्य का जो अवसर मिला है उसकी सफलता की कामना है ।

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