आत्मा को पाकीजगी देता है रमजान

ramjan nepalरमजान की रुहानी चमक से दुनिया एक बार फिर रोशन हो चुकी है । फिजा में घुलती अजÞान और दुआओं में उठते लाखों हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्Þबे को शिद्दत से माँग रहे हैं । हर बंदे को अल्लाह के करीब लाने का मौका देने वाला पाक महीना है रमजान । इंसान के अन्दर जिस्म और रुह होते हैं । आम दिनों में उसका पूरा ध्यान खाना-पीना और अन्य जिस्मानी जरुरतों पर रहता है । लेकिन इंसान की असल चीज उसकी रुह होती है । इसी की तरबियत और पाकीजÞगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है । इस पूरे माह को तीन अशरों में बाँटा गया है । पहला अशरा ‘रहमत’ का है, इसमें अल्लाह अपने बन्दों पर रहमत की दौलत लुटाता है । दूसरा अशरा ‘बरकत’ का है, जिसमें खुदा बरकत नाजिल करता है । तीसरा ‘मगफिरत’ का है । इस अशरे में अल्लाह अपने बन्दों को गुनाह से माफ कर देता है ।
रमजान का महीना पूरे ३० दिनों का या कभी-कभी २९ दिनों का भी होता है । प्रत्येक वर्षइस्लाम कैलेण्डर के अनुसार हिजरी संवत के नवें महीने में महीना भर विश्व भर के बालिग मुसलमान रोजा रखते हैं । प्रत्येक वर्षआने वाले इस महीने को ‘शाबान’ कहते हैं और शाबान महीने के अन्तिम दिन सर्ूयास्त के बाद पश्चिम आकाश में चन्द्रमा उदय होने के साथ रमजान महीने की शुरुआत होती है । इसी के साथ रोजा शुरु होता है । इस्लाम दर्शन के अनुसार इस पवित्र महीने में रोजा रखने से मृत्यु-अखिरत) के बाद जहन्नुम के प्रभाव से इंसान सुरक्षित रहता है । सभी पापों का विनाश होता है और प्रायश्चित का मार्ग खुलता है । रमजान के पूरे महीने सूर्योदय से पहले सहरी खाकर रोजे के शुरुआत होती है । पूरे दिन कुछ भी खाना-पीना नहीं होता है । इस पूरे अवधि में यौन सर्म्पर्क भी वर्जित होता है । सर्ूयास्त के बाद निर्धारित समय पर फल, सर्ेवई आदि खाकर रोजा खोला जाता है । इसे इफ्तारी कहते हैं । प्रायः इफ्तारी के समय में सभी मिलकर एक ही दस्तरखान पर एक साथ अपना रोजा खोलते हैं । वैसे तो इस्लाम में प्रतिदिन ही पाँच बार नमाज पढÞकर इबादत की जाती है किन्तु रमजान के महीने में निश्चित रूप से पाँच बार नमाज पढÞना ही होता है । इसके अलावा रात्रि आठ बजे के बाद मस्जिद में जमा होकर तराविह-विशेष नमाज) पढÞते  हैं । तराविह में पवित्र ग्रन्थ कुरान की आयतें पढÞी जाती हैं ।
रहमत और बरकत से भरे रमजान के इस महीने में मोमिनों को अल्लाह से प्यार और लगन जाहिर करने के साथ खुद को खुदा के राह की सख्त कसौटी पर कसने का मौका मिलता है । दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना बुखारी कहते हैं कि, ‘यह महीना  कई मायनों में अलग और खास है । इसी महीने अल्लाह ने दुनिया में कुरान शरीफ को उतारा था । जिससे लोगों को इल्म और तहजीब की रोशनी मिली थी । साथ ही यह महीना मोहब्बत और भाई चारे का संदेश देने वाले इस्लाम के सार तत्व को भी जाहिर करता है ।’
इस्लाम धर्म में असली मुसलमान बनने के लिए पाँच फराइजर्-कर्त्तव्य) का पालन करना आवश्यक है । जो है, इमान-कलिमा तइयब), नमाज, रोजा और जकात । इमान अर्थात सदाचार का पालन, नमाज अर्थात् खुदा की इबादत, हज यानि पाक मक्का मदीना की यात्रा और जकात अर्थात् दान करना । इमान के अन्दर अल्लाह र्सवमान है जो एक ही है । उन्हें मोहम्मद साहेब का अन्तिम नबी मानते हैं । इसलाम के ये पाँच फर्राईज इन्सान को इन्सान के साथ प्रेम, सहानुभूति और सम्वेदना की प्रेरणा देेते हैं ।
रोजा को अरबी भाषा में सोम कहते हैं । सोम का अर्थ है रोकना इसलिए रोजा का प्रतीकात्मक अर्थ है गलत कार्य और दुराचार को रोकना । इस पूरी अवधि में प्रत्येक गलत काम निषेधित है और जब एक महीने इस कठिन संकल्प को एक सच्चा मुसलमान पूरा करता है तो इसके पश्चात् उसके भीतर पाक भावनाएँ आती हैं । रमजान के महीने में किए गए नेक अमल का सबाव ७० गुणा ज्यादा है ऐसी मान्यता है । कुरान में कहा गया है, रोजा तुम्हारे लिए कर्त्तव्य के रूप में लागू किया गया है इस व्रत से तुमर् इश्वर से डरोगे और उसके करीब जाओगे । इसके कारण तुम विनम्र बनोगे , तुम सदैव खुद कोर् इश्वर का अनुग्रहीत मानोगे । प्रत्येक मुसलमान को यह समझना होगा कि एक दिन अन्त सबका होता है । यह सारा वैभव अल्लाह की देन है जिसके कारण तुम जिन्दा हो और दूसरों की सहायता करने में सक्षम हो । नहीं तो तुम्हारी जिन्दगी पानी के दो बुन्दों की तरह है जिसे नष्ट हो जाना है ।
रमजान के अंतिम दिन में सभी मुसलमान अत्यन्त हर्षोल्लास के साथ नए-नए कपडÞे पहनकर, इत्र लगाकर, गले मिलकरर्,र् इद मनाते हैं । दिन भर एक दूसरे से मिलते है. और जश्न मनाते हैं । छोटों को बडÞों से सौगात मिलते हैं । विश्व के सभी देशों में यह पाक पर्व मनाया जाता है । नेपाल के मुस्लिम भाई बहन भी इसे धूमधाम से मनाते हैं र्।र् इद के दिन यहाँ र्सार्वजनिक छुट्टी दी जाती है ।

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