आन्दोलन और क्रांति में फर्क होता है : नेतृ सरीता गिरी

हिमालिनी डेस्क

काठमांडू, ९ जून । 

आन्दोलन और क्रांति में फर्क होता है । आंदोलन संविधान, और कानून की सीमाओं को स्वीकार करता है और कहीं न कहीं समझौते पर जाकर विराम लेता है । लोकतांत्रिक आंदोलन चुनाव को भी आंदोलन के रुप में स्वीकार करता है और जनता के मत देने के अधिकार का आदर करता है । क्रांति संविधान और कानून को स्वीकार नहीं करता है और पूर्णतया असहयोग अथवा विद्रोह के रास्ते पर उतर जाता है ।

राजनीतिक दलों को स्पष्ट रुप से जनता को बता देना चाहिए कि वे आन्दोलन में हैं अथवा क्रांति में । १२ बूंदे सहमति के पहले माओवादी क्रांति के पथ पर थे लेकिन १२ बूंदे सहमति के बाद संवैधानिक संसद की पुर्नस्थापना के रास्ते पर आए । समझौता का यह उदाहरण हमारे लिए ताजा है ।

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