आप कहां-कहां क्या-क्या करें

मुकुन्द आचार्य:

१. मन्दिर में भगवान की ओर नहीं अपने जूते-चप्पल की ओर विशेष ध्यान दें। सिर्फछुट्टे -चिल्लर) अपने पास रखें, भीख मंगों से बच गया तो आप हीं के काम आएंगे।
२. सैलून में हजाम से प्रेमपर्ूवक बातें करें, क्योंकि उस्तरा उसके हाथ में होता है।
३. समारोहों में भाषण के बदले भत्ता और भोजन की ओर भागें। आप लाभ में रहेंगे।
४. राजनीति में जाने से पहले र्’इमानदारी और सच्चाई’ दोनों शब्दों की अपनी डिक्सनरी में से काट दें। आप और देश दोनों के हक में अच्छा रहेगा।
५. घर में एक अच्छा सा कुत्ता जरुर पोसें। क्योंकि परिवार में कुत्ता हीं सब से बफादार होता है।
६. सत्संग में बैठे हों तो आजू-बाजूवालों को अपनी बातों में उलझाए रखिए। क्योंकि सत्संग के बाद बगलवाले भक्तों के दिमाग में आप ही छाए रहेंगे। प्रवचन तो आपने उन्हें सुनने ही नहीं दिया।
७. डीप कलर का रंगीन गगल्स जरुर धारण करें। फिर बुरी नजरों से किसी को भी जी भर कर घूरें। जिसको आप घूरेंगे, वह विल्कुल भाँप नहीं पाएगा।
८. बस, ट्रेन, प्लेन आदि में विपरीत लिङ्गी के साथ ही बैठें, हो सकता है, आप को कुछ नयाँ अनुभव मिले।
९. नए लेखक, जिनकी रचनाएं न छपती हो, अपने पुलिंग नाम को स्त्रीलिंग में बदल लें। और स्त्रीलिंग नाम से रचनाएं भेजा करें, देखते-देखते आप धडÞल्ले से छपने लगेंगे।
१०. आप के पास फालतू के पैसे हों तो किसी सहकारी बचत संस्था में खाताधारी सदस्य बन जाईए। हर रोज आप के पास कोई परी रकम वसूल करने आएगी। निश्चय मानिए, आपकी रकम डूबने से पहले आप खुद किसी परी के प्रेम में डूब जाएंगे। अलबत्ता आप में कुछ पुरुषोंचित गुण तो होने ही चाहिए।
११. काम कोई न हो तो चेहरा गम्भीर बनाकर बैठ जाईए। लोग समझेंगे, आप बहुत बडेÞ चिन्तक हैं।
१२. आजकल सच्चा मित्र और सच्चा गुरु जल्दी मिलना असम्भव है। इसलिए इन दोनों सम्बन्धों को आँख मूँदकर स्वीकार न करें या इसका पालन-पोषण न करें।
१३. मान लीजिए आप लाईन में खडÞे हैं, आप के पीछे कोई सुन्दरी युवती वेचैन खडÞी हो तो उसकी बेचैनी दूर कर दीजिए। हो सके तो उस युवती का काम आप स्वयं सम्भाल लें। अगर इतनी उदारता आप में न हो तो कम से कम उसे अपने आगे आने दीजिए और पीछे से भरपूर निहारिए। उस पर तर्ुरा यह कि अगल-बगलवाले आपको सभ्य ही समझेंगे।
१४. काठमांडू में जब जाडा जवानी पर हो और श्रीमती जी ने दूध उवालने के लिए दूध को अकेला छोडÞ दिया हो, तो ऐसी अवस्था में आप झटपट अपने ठिठुरते हुए हाथ सेक सकते हंै। दूध को उफन कर गिरने से भी बचा लंे। आप की श्रीमती जी सोचेंगे, वेचारा कितना अच्छा घरेलू जानवर है।
१५. लोगों को सुनाते हुए, दोस्तों को भरपेट गाली दीजिए। सब लोग समझेंगे- सायद लगांैटिया यार से बात कर रहा है। इस तरह अपना भंडास निकालते रहिए। मजा तो तब है, जिसको गाली दे रहे हैं, वह भी आप को यार ही समझेगा।
१६. जिस घर में अतिथि बन कर जाएँ, वहाँ का भोजन और वहाँ के बच्चों की खूब प्रशंसा करें, चाहे वह झूठी ही क्यों न हो। गृहिणी खुश होगी और आप का घर में आनाजाना सहज और सुखद रहेगा।
१७. जैसे ही मौका मिले, आप आपनी प्रशंसा खुद शुरु कर दें। दूसरो को कहाँ फर्ुसद है- जो अपना काम छोडÞकर आपकी प्रशंसा करते रहें।
१८. अपने बच्चों को स्कूल छोडÞने खुद जाएं, उहाँ चुन-चुन कर सुन्दर-सुन्दर मिस से मिठी-मिठी बातचीत करके अपने नीरस जीवन को सरस बनाएं। इससे आप का मानसिक स्वास्थ्य भी बिलकुल चकाचक रहेगा।
१९. घर में बच्चों को गल्ती ही सही, आप खुद पर्ढाईए। वैसे भी बच्चों को स्कूल में गलत ही ज्यादा पढÞाया जाता है। आप ने कुछ गल्तियाँ और जोडÞ दीं तो कौन सा पहाडÞ टूट जाएगा – बच्चे आप को अनपढÞ गंवार नहीं समझेंगे।
२०. कभी-कभी बच्चों के साथ खेल लिया कीजिए। लेकिन बचपन में की गई गलती को खेल में न दोहराएं। फायदा आप को होगा। बैठे-बिठाए बच्चों की नजर में आप एक अच्छे खिलाडÞी बन जाएंगे।
२१. बीबी से प्यार नहीं हो, तो भी प्यार का नाटक तो कर हीं सकते हैं। इससे आप की कलाकारिता में बढÞोत्तरी होगी। फायदा ही फायदा होगा। इसका साइड इफेक्ट नहीं होता।
२२. गृहणिया ध्यान दें- अचानक घर में गेष्ट आ गए। दाल कम पडÞ जाए तो उस में पानी मिलाकर परोसने से बेहतर है, दाल का आइटम ही गायब कर दीजिए। सब्जी और रोटी खिलाकर गेष्ट को टरका दीजिए। बेशरम होगा तो भी फिर दुबारा आते समय बहुत सोचेगा।
२३. सडÞे हुए फलफूल अतिथि को प्रेमपर्ूवक प्रस्तुत कीजिए। मगर परोसते समय जरुर बडÞबडÞाइए- आजकल मनमाना भाव लेकर भी अच्छी चीज बनिए नहीं देते। सब के सब साले ठग की औलाद हंै।
२४. यदि आप सरकारी कर्मचारी हंै तो आँफिस समय में ही अपने सारे निजी काम निपटा लें। बारबार चाय पीए और बारबार शौचालय में घूस जाएं। आँफिस छोडकर केश कटवाने चले जाएं। इसी बीच मार्केटिङ भी कर लें। किसी से मिलना-जुलना हो तो व भी निपटा लें। आखिर घरगृहस्थी चलाने के लिए ही तो आदमी नौकरी करता है। आँफिस में महिला कर्मचारी हो तो उससे खूब गप्पंे मारिए और अपनी बीबी की खूब शिकायत कीजिए।
२५. किसी भी सभा-समारोह में बोलने का मौका न छोडेÞ। भले ही आप को क्या बोलना चाहिए, उसका पता नहीं हो। विषय की जानकारी हो तो ऐरागैरा कोई भी बोल लेगा। आप विषयवस्तु की आवश्यक जानकारी के बगैर बोलें तब मना जाएगा, आप वकई प्रतिभाशाली हैं।

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