आम आदमी ने उडा दी, खास लोगों की नींद

विनय दीक्षित:नेपालगंज । यूं तो जिसे आम कहा जाता है, अगर वह अपनी असलियत पर उतर जाए तो खास लोगों का भी जीना दुशवार कर सकता है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला मटेहिया गाँव में।
बाँके जिला के मटेहिया गाविस वार्ड नं.५ निवासी ५० वषर्ीय मूसे यादव ने २२ हजार रुपये की अवैध असूली के खिलाफ जो जंग छेडा उसने स्थानीय स्तर के जागरुक तबके से लेकर केन्द्र स्तर के सभी सरकारी, गैरसरकारी और प्रशासनिक निकायों को शर्मसार बना दिया।
घटना २०६९ साल माघ २१ गते की है, मूसे यादव ने यह आरोप लगाया कि भैंस चोरी के केस में फंसाने के बहानर्ेर् इलाका प्रहरी कार्यालय भगवानपुर मटेहिया के पुलिस निरीक्षक गजेन्द्र बहादुर चौधरी और मटेहिया गाविस के पर्ूव उपप्रधान मुनव्वर अली मुकेरी नेे मिलकर अवैध तरीके से २२ हजार रुपये असूल किया है।
इस अवैध असूली के खिलाफ गाँव में बात बढÞती गई और मूसे यादव ने अन्ततः इस काण्ड के खिलाफ जंग छेडÞा फलस्वरुप मिति २०६९।११।२१ गते यादव ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, जिला प्रशासन कार्यालय, जिला प्रहरी कार्यालय, अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग, ट्रान्सपरेन्सी इन्टरनेशल सहित मानव अधिकार और सुशासन पर काम करने वाले निकाय तथा मीडिया सहित २२ निकायों में उजूरी दायर किया।
उजूरी के मुताविक मूसे यादव के पडोसी बाबु लाल यादवको बारात जाना था, तो बाबु लाल ने मूसे यादव से कहा कि भैंस की चोरी बढÞ रही है, इस लिए मेरी भैंस की भी रेखदेख करना और मूसे यादव ने पडोसी के नाते जिम्मेवारी ले ली, और संयोगवश भैंस भी उसी रात को चोरी हो गई।
उजूरी में लिखा गया है कि जब दूसरे दिन २०६९ माघ २२ गते बाबु लाल यादव घर लौटे तो घटना की जानकारी उनको भी हर्ुइ, और बाबु लाल ने कहा कि भैंस चोरी हो गई है तो तलाश किया जाएगा, मिली तो ठीक है नहीं मिली तो भी ठीक है, बाबुलाल ने किसी किसिमका कोई निवेदन भी थाने में दर्ता नहीं किया। लेकिन इस वात की भनक पुलिस और उपप्रधान को लगी और दोनो ने मिलकर पैसे ऐंठने की जो योजना बनाई उसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया।
तीसरे दिन मिति २०६९ माघ २३ गतर्ेर् इलाका प्रहरी कार्यालय के निरीक्षक गजेन्द्र बहादुर चौधरी ने मूसे यादव के घर में पहुँच कर कहा- तू ने बाबुलाल की भैंस चोरी की है, कुछ पूछताछ करना है थाने चलना पडेगा। इतना कहकर निरीक्षक चौधरी मूसे यादवको थाने ले जारहे थे तभी गाँव के पश्चिम किनारे पर उपप्रधान मुनव्वर अली मुकेरी से भेंट हर्ुइ और उन्हों ने यादव से पूछा क्या बात है – कहाँ जा रहे हो – और यादव ने सारी बात उपप्रधान मुकेरी को बताई और उपप्रधान मुकेरी ने कहा, थाना जाकर कोई फायदा नहीं है, थाना तो मै चलाता हूँ हमारे साथ आईए मै बताता हूँ क्या करना पडेगा, उजूरी में उल्लेख है।
इस विषय पर हिमालिनी को मूसे यादव ने बताया- उपप्रधान मुनव्वर अली मुकेरी नेे कहा, तुम्हारा केस बहुत गहरा है, पुलिस निरीक्षक गजेन्द्र बहादुर चौधरी ने ६० हजार भा.रु.लेने के लिए मुझसे कहा है तुम २२ हजार रुपये हमें लाकर दो, नहीं तो तुम्हे जेल जाने से काई नहीं बचा सकता है।
यादव ने आगे बताया कि मैं गाँवका गरीब किसान आदमी, जेल जाने के नाम से डर गया और ७ हजार घर में था तथा १५ हजार रुपये ऋण लेकर मैने उपप्रधान मुनव्वर अली मुकेरी को भुक्तान किया। उसके वाद पुलिस निरीक्षक चौधरी से जाकर मिला तो उन्हो ने कहा, तुम्हारा केस समाधान हो गया, अब जा सकते हो, इतना सुनने के बाद मैने कुछ राहत की साँस ली और घर वापस चला आया।
फिर उजूरी क्यों दायर किया – यह सवाल पूछने पर मूसे यादव ने कहा, घटनाको करिब डेढ महीने हो चुके थे, २२ हजार की बात गाँव में सभी को खटक रही थी, यह मेरा पहला मामला नहीं था कि मुझसे माल असूल किया गया हो, यह सिलसिला वषर्ाें से चल रहा था, तो गाँव वालों ने भी कहना शुरु किया कि आपने पैसे देकर अपराधको बढÞावा दिया है, आपको जेल जाना पडÞता तो जाना चहिए लेकिन पैसे नहीं देना चहिए था, इससे अपराधियों और अपराधको बढावा मिलता है, लोगो ने जब इस बातको लेकर लगातार धिक्कारा और प्रेरित किया तो मै ने भी कारवाही करने की ठानली और नेपालगंज जाकर आयोग में उजूरी दायर किया।
उजूरी दायर करने के एक हप्ते बाद जब मानव अधिकार आयोग ने कारवाही शरु की तो पूरे क्षेत्र में हडकम्प मच गया, पुलिस निरीक्षक गजेन्द्र बहादुर चौधरी और उपप्रधान मुनव्वर अली मुकेरी ने आननफानन में भैंसकी क्षतिपर्ूर्ति दिलाने के बहाने १ महिना ७ दिन के बाद २०६९ फाल्गुन २७ गते बाबुलाल यादव से थानामा उजूरी डलवाया और जब हिमालिनी ने पुलिस निरीक्षक चौधरी से सवाल किया कि भैंस चोरी होने के एक महीने तक आप क्या कर रहे थे – उजूरी क्यो नहीं दर्ता किया – या उजूरी आया ही नहीं था – तो चौधरी ने कहा- मौखिक उजूरी आया था, केस गाँवका होने के कारण मैने मिलाने के लिए मुनव्वर अली मुकेरीको जिम्मा दिया था, मुझे मालूम भी नहीं था कि इतना बवाल बढÞ जाएगा।
मूसे यादव ने कहा कि पुलिस निरीक्षक चौधरी ने ६ हजार रुपए वापस कर दिए थे लेकिन मुनव्वर के कुछ र्समर्थकों ने रुपये फिर से पुलिस निरीक्षक चौधरीको दिला दिया। यादव ने कहा, पुलिस निरीक्षक चौधरी ने कहा था कि उसे सिर्फ६ हजार ही मिला था बाँकी १६ हजार रुपए उपप्रधान मुकेरी के पास हैं।
२२ हजार असूली के विषयको स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया ने प्राथमिकता के साथ र्सार्वजनिक किया और यह मुद्दा गर्म होता गया। कारवाही के दौरान जिला पुलिस निरीक्षक भूपाल भण्डारी ने चौधरी से स्पष्टीकरण ली और केसको समाधान करने की कोशिश भी की, तो उधर उपप्रधान मुनव्वर अली मुकेरीको फँसता देख क्षेत्र के अधिकाँश पर्ूव प्रधानों ने मुकेरी का जमकर साथ दिया, इस दौरान २०६९।११।२९ गते मूसे यादव पर सहमति के लिए दबाव बनाया और उपप्रधान मुकेरी ने यादव से फर्जी ४/५ सादा कागजों पर सहीछाप करवाया जिसका प्रयोग एकआध मिडिया में समाचार खण्डन करने में प्रयोग किया।
इस कागजी दुरुपयोग के विषय पर जानकारी मिलते ही मूसे यादव ने पुनः २०६९।१२।५ गते जिला प्रशासन, जिला पुलिस और मानव अधिकार आयोग में यह उजूरी दायर किया कि उनसे सहमति के नाम पर जो कागज करवाए गए हैं, उनको इस कार्यालय के नियन्त्रण में रद्द किया जाय और सुरक्षा दी जाए।
२ हप्ते तक क्षेत्र में सरगर्मी बढÞती रही तभी समास्याका समाधान न होता देख मधेशी प्रत्रकार समाज बाँके ने ६ बुँदा माँग सहित प्रमुख जिला अधिकारी ढुंडीराज पोखरेल समक्ष इस असूली के विषय पर ज्ञापन पत्र सौंपा और जिला अधिकारी ने तत्काल कारवाही आगे बढÞाने का निर्देश दिया।  निर्देश पूरा हो पाता इससे पहले ही पुलिस निरीक्षक गजेन्द्र बहादुर चौधरी और जिला अधिकारी ढुंडीराज पोखरेल का ट्रान्सफर हो गया।
मधेशी पत्रकार समाज ने ज्ञापन पत्र में २२ हजार असूली काण्ड में संलग्न दोषी पर कारवाही, पीडित यादवको पर्याप्त सुरक्षा, असूल किया हुआ रकम वापस, मूसे यादव द्वारा किया गया कागज का दुरुपयोग तत्काल बन्द, तथा उस क्षेत्र में असूली सम्बन्धी सभी घटनाओं की छानबीन जैसे मुद्दों को तत्काल सम्बोधन करने की माँग की।
हिमालिनी से प्रतिक्रिया में मधेशी पत्रकार समाज बाँके के अध्यक्ष विनयराज त्रिपाठी ने कहा- यह दर्ुभाग्यपर्ूण्ा घटना है और इसकी कारवाही सही तरीके से नहोना और भी दुःखद है। इस प्रकार के गम्भीर विषयको यदि कोई पीडित र्सार्वजनिक करता है तो उसपर स्वयं धम्की और त्रास शुरु हो जाता है। त्रिपाठी ने कहा सम्बन्धित अधिकारियों का ट्रान्सफर होना समस्याका समाधान नहीं है, कारवाही में देरी हो सकती है लेकिन मूसे को न्याय दिलाकर ही रहूँगा।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख मुरारी खरेल ने हिमालिनी से बातचीत में मूसे को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया, खरेल ने कहा रिश्वत सम्बन्धी मुद्दा देखना आयोग का काम नहीं है लेकिन यादव ने हमारे यहाँ उजूरी दायर किया है तो हमारा दायित्व है कि उन्हे न्याय मिले।
इस विषय को लज्जास्पद घटना बताते हुये अवधी पत्रकार संघ के अध्यक्ष र्सर्ूयलाल यादव ने कहा- ऐसी घटनाओं को अन्जाम देने से पहले प्रधानोंको सोचना चहिए कि क्षणिक लाभ के लिए उनका राजनैतिक जीवन समाप्त हो सकता है।
यादव ने कहा- घटना में पुलिस और उपप्रधान सहित जितने भी दोषी हों प्रशासन अगर उनपर कारवाही नहीं करता है तो आशंका यह भी बनती है कि कंही उन्हें भी तो कमीशन नहीं मिल रहा है।
लम्बे समय से भ्रष्टाचार के विरुद्ध काम कर रहे बागेश्वरी असल शासन के निर्देशक नमस्कार शाहने कहा- र्सवसाधारण जनताको लूटने वाले पुलिस अधिकारियों पर जैसा कारवाही होना चहिए नहीं हो रहा है, इस केस में पुलिस निरीक्षक चौधरीको निलम्बन होना चहिए था और मुकेरीको जेल जाना चहिए था जो अभी तक नहीं हो सका है।
घटना के विषय में पर्ूव उपप्रधान मुनव्वर अली मुकेरी ने हिमालिनीको बताया कि पुलिस निरीक्षक चौधरी ने कहा था कि केस को गाँव में ही समाधान कर दीजिए, तो सिर्फसमाधान किया गया था, २२ हजार किसी ने नहीं लिया है, यह आरोप गलत है।
मूसे यादव जैसे लोग खास नहीं है आम ही हैं लेकिन, आम आदमी जब अपनी शक्ति का इस्तेमाल करता है तो खास कहे जानेवाले लोगों की पहचान मिट सकती है। वात सिर्फ२२ हजार की वापसी की नहीं है, हिम्मत की है। अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ हर तह से निकलने वाली बुलन्द आवाज ही इसके खिलाफ जंग है।

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