आरुणीपुत्र बाली और सुग्रीव की जन्मकथा

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बाली और सुग्रीव भाई थे बाली बड़ा तो सुग्रीव छोटा बाली की पत्नी तारा और पुत्र अंगद थे सुग्रीव की पत्नी का नाम रूमा था। बाली राजा था दोनों एक दिन एक राक्षस दुदुंभी का वध करने निकले तब बाली सुग्रीव को बहार ही छोड़ गुफा में गया जहां से पहले चीखने की आवाज आई और बाद में खून बहने लगा।

डर के मारे सुग्रीव ने बड़े से पत्थर से उस गुफा का द्वार बंद कर दिया और भाग कर वापस आ गया जब काफी दिन तक बाली न लौटा तो सुग्रीव राजा बन गया और उसने बाली की पत्नी को भी अपना लिया था। लेकिन जब बाली लौटा तो अपने भाई की इस गलती को करतूत जान उसे राज्य से बहार निकाल दिया और उसकी पत्नी को भी जबरन अपना लिया। उसके आगे की कहानी तो आप सब जानते ही है की कैसे राम ने बाली का वध कर सुग्रीव को फिर से राजा बनाया था, पर बाली और सुग्रीव के जन्म की भ्रान्ति कोई नही मिटा पाया है। बाली इंद्र और सुग्रीव सूर्य पुत्र थे पर अरुण देवता उनकी माँ थी।

इंद्र देव के निवास में किसी भी दूसरे पुरुष को घुसने की इजाजत नही थी पर अरुण देव से रहा नही गया और वो आरुणि(महिला) बन उनके निवास में घुस गए। किस्मत से इंद्र देव ने उन्हें देख लिया और उनपे आसक्त हो उनसे सम्बन्ध बना लिए, उनके मिलान से बाली पैदा हुआ, आरुणि के इसी रूप पे सूर्य भी आसक्त हुए और उन्होंने भी उनसे सुग्रीव को पाया।

अरुण देव इस बात से काफी शर्म महसूस कर रहे थे तो इंद्र और सूर्य ने इन दोनों पुत्रो को अहिल्या को सौंपा और उन्हें गौतम ऋषि को उनके पुत्र बता पालने के लिए बोला लेकिन एक बात और थी गौतम ऋषि और अहिल्या के यहां अंजना नाम की पुत्री हुई थी जो की स्वर्ग की अप्सरा पुंजिकास्तला का अवतार थी, उसने इंद्र और अहिल्या की बााते सुन ली और अपने पिता को बता दिया। इस पर गौतम ऋषि ने दोनों बाली और सुग्रीव को वानर होने का श्राप दे दिया तो अहिल्या ने अपनी बेटी को वानरी होने का श्राप दिया। हालाँकि इस बात की कोई ठोस पुष्टि नही है की ऐसा ही हुआ रहा होगा लेकिन बाली सुग्रीव और अंजना के जन्म की और कोई भी किवदंती नही है जो इसे मिथ्या साबित कर सके।

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