आरोप–प्रत्यारोप ही आगे बढ़ाती है

बाल्यकाल मेरा काठमांडू में गुजरा । वैसे तो मैं मधेश तराई का हूँ किन्तु मेरा बचपन काठमांडू में ही गुजरा है । मेरे पिताजी ब्यूरोक्र्याट्स थे, जिसके कारण उनका हमेशा ट्रान्सफर अनेक जगहों पर होता रहता था । मैं अपने घर में छोटा था । अपने पिता जी के साथ कई जगहों पर जाने का मौका मिला । जिसके कारण नेपाल के विभिन्न जगह में मेरी पढ़ाई हुई ।
वैसे हमारा परिवार काठमांडू में ही रहता था । मैं बचपन से ही लोगों के बीच में रहना पसन्द करता था । मैं हरेक प्रकार की सोसाइटी से भी जुड़ा रहता था और लोगों के बीच रहने का मुझे मौका भी मिला । मैं बचपन से पढ़ाई में अच्छा था । परन्तु कभी कभी आप सही निर्णय नहीं कर पाते हैं कि आपका लक्ष्य क्या है और आप अपनी जिन्दगी में करना क्या चाहते हैं । ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ । मेरी रुचि मैनेजमेंट में थी

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संजीव मिश्रा – नलीना चित्रकार

किन्तु घर वाले यह नहीं चाहते थे । उनकी खुशी के लिए मैंने १२वीं के बाद इन्जिनियरिङ में नाम लिखाया । पर यह मेरा लक्ष्य नहीं था, इसका मुझे बहुत जल्द अहसास हो गया । मुझे लगा कि मैं जो कर रहा हूँ उससे न तो मैं घरवालों को ही पूरी  तरह खुश कर पाऊँगा और ना ही मैं खुश रह पाऊँगा, इसीलिए मैंने इन्जिनियरिङ छोड़ दिया और म्यानेजमेन्ट को ही आगे बढ़ाया । हम लोगों के समय में हर माँ बाप अपने बच्चे को इन्जिनीयर और डाक्टर बनाना चाहते थे । पर अभी के समय में ऐसा नहीं है । अभी हरेक फील्ड में लोगों का इन्ट्रेस्ट है । मुझे पहले से ही अपने से बड़े उम्र के साथ रहना पसन्द था और मैं उन्हीं के साथ रहता था । क्योंकि उनके अनुभव से बहुत कुछ सीखने को मिलता है ।
मैंने अपनी पढ़ाई भारत से पूरी की और वहाँ से आने के बाद पिछले २५ सालों से कार्यरत हूँ । इन सालों में मैंने जो चाहा था, वह मुझे प्राप्त हुआ । शुरुआती दौर में मुझे ज्यादा कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा है । क्योंकि मैं काठमांडू से ही था और यहाँ का परिवेश मैं पहले से ही जानता था । पर  मेरा लक्ष्य कुछ और था,  मैंने शुरुआत कही और से किया था । लोग नकारात्मक टिप्पणी भी करते थे । पर मैंने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया । और अपने लक्ष्य को पाने की पूरी कोशिश की । शुरुआती दौर में होटल रेडिसन से जुड़ा और छोटे से पद से काम की शुरुआत की । आज मैं जहाँ हूँ वह मैंने अपने कमिटमेन्ट, डिटरनिमेशन और मेहनत से प्राप्त किया ।
२७ साल की उम्र में मैं नेपाल वन टेलिभिजन में कार्यरत था । जो भारत से सम्बन्धित है । उस को मैं ही नेपाल में ले कर आया । जिसको मैंने नेपाल में नम्बर वन टेलिभिजन के रूप में स्थापित किया । उस समय देश में माओवादी का सशस्त्र जनयुद्ध चल रहा था । भारत के निवेश से मीडिया नेपाल में मीडिया सञ्चालन करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था । नेपाल के सञ्चार सम्बन्धी कानून भी विदेश सञ्चार माध्यम के प्रति सकारात्मक नहीं थे ।
अभी मैं प्रबन्ध निर्देशक के रूप आइएमएस कम्पनी में कार्यरत हूँ । यह कम्पनी देश का नम्बर १ कम्पनी के रूप में जाना जाता है । यह सैमसङ मोबाइल का आधिकारिक विक्रेता है । इस कम्पनी के संस्थापक दीपक मलहोत्रा हंै, पर इस कम्पनी को उनके पुत्र दिकेश मलहोत्रा ने पूरी तरह से सम्हाल रखा है । जो कि महज २७ साल के हैं । काम के दौरान उतार चढाÞव आते ही रहते हैं, जीवन को कई रूपों में मैंने देखा और भोगा है । आरोप प्रत्यारोप को भी मैंने झेला है किन्तु अगर आपकी सोच और लगन सच्ची है तो आप मंजिल पा ही लेंगे ऐसी मेरी धारणा है ।
मेरी पारिवारिक जिन्दगी खुशहाल है मेरी शादी इन्टरकास्ट हुई है । मेरी पत्नी नलीना चित्रकार नेपाल की प्रसिद्ध गायिका है । पहले हम दोनों अच्छे दोस्त थे । यह दोस्ती प्यार में बदला, फिर हमारी शादी हुई । हमारा एक बेटा है और हम लोग खुशीपूर्वक परिवारिक जीवन बिता रहे हैं । आज हम दोनों अलग–अलग कास्ट होने से भी हम अपने–अपने कल्चर को पूरी तरह से निभा रहे हैं । नलीना का पूरा साथ मुझे मिलता है । दो अलग अलग संस्कृति के होने के बावजूद हमें कभी कोई परेशानी नहीं हुई क्योंकि मानसिक स्तर पर हमारी सोच एक जैसी है । मुझे परिवार में समय देना, घूमना और उनके साथ फिल्म देखना बहुत पसन्द है । फुर्सत का सारा वक्त हमारा सारा वक्त बच्चे के साथ गुजरता है ।
एक सजग नागरिक की तरह मेरा ध्यान भी देश की स्थिति पर है देश के विकास के लिए संविधान का होना आवश्यक है । हम लोग दस साल से संविधान के लिए इन्तजार कर रहे हैं और सरकार संविधान नहीं दे पा रही है । आज हम देखें हमारे पड़ोसी मुल्क भारत, चाइना अर्थतन्त्र से बहुत ही मजबूत हैं । हमे पूरा सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं । अभी छोटी छोटी बातों को अलग रख कर आगे भविष्य को सुनहरा बनाने के लिए सब को एकजुट होना चाहिए । यह भी सोचना चाहिए कि आगे की पीढ़ी के लिए हम कुछ करे । दुनियाँ अर्थतन्त्र के साथ बहुत आगे जा चुकी है । कोई भी देश ऐसा नहीं है, जो राजनीति पर अड़का हुआ है । हम बहुत पीछे हैं । इसके लिए सभी को आगे आने की आवश्यकता है ।
संविधान निर्माण में सबकी भागीदारी जरुरी है । चाहे वह जनजाति हो, मधेशी हो या और कोई अन्य जाति हो । सब को प्रोत्साहित करके आगे बढ़ना चाहिए । विभेदकारी सोच नहीं आनी चाहिए । और राज्य को पूरी जिम्मेदारी से समान व्यवहार करके जल्द से जल्द संविधान लाना चाहिए

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