Sun. Sep 23rd, 2018

आसीन तीन, काला दिन है और रहेगा : बृषेश चन्द्र लाल

संसद तथा राजपा नेता बृषेश चन्द्र लाल की धारणा सार्वजनिक

बन्धुवर,
बहुत सारे मित्र आसीन तीन – काला दिन के बारे में मेरी धारणा जानना चाहते हैं । मैंने बहुत सारे पोस्ट देखा है, फोन से बात हुई है । आजकल अस्वस्थ चल रहा हूँ । १-२ हप्ते में फिट हो जाउँगा । फिर भी मुझे लगा कि मित्रों से अपनी धारणा रखना ही चाहिए । कुछ दिन पहले से ही मित्रों ने कहना शुरु किया था – मधेश केन्द्रित दलें काला दिन में क्या करेगी ?, निर्वाचन में भाग लेना, सरकार को समर्थन करना और काला दिन की बात करना बेमानी है, मधेश के लोग इसे समर्थन नहीं करेगी ओगैरह-वेगैरह !

मित्रों,

१. मधेश केन्द्रित दल काला दिन काले दिन के ही रुप में मनाएगी । निर्णय कर लिया है । राजपा नेपाल पार्टी स्पष्ट कार्यक्रमों के साथ प्रस्तुत हुई है । चूकिं मधेश आन्दोलन से अभिव्यक्त मुद्दों का अब एक मात्र वाहक राजपा नेपाल है अत: इसे स्पष्टता के साथ आना ही था ।

आसीन तीन, काला दिन है और रहेगा क्योंकि राज्य और गैरमधेशी राजनीतिक दलों द्वारा यह मधेशीयों को नकारने का दिन था । देश के मूल कानून से अलग रखने का दिन था । मधेश बिरोधी संविधान लादने का दिन था ।

हम इसे अस्वीकार करते हैं ।हमारी अपनी भूमि पर –
1.बराबरीका अधिकार,
2.जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्त्व,
3. समानुपातिक समावेशिता,
4.संघीयता के तहत संयुक्त और स्वशासन,
5. सेना में समावेशिता पूर्ण स्थान,
6.अपनी पहचान और भाषा की मान्यता —

हमारा नैसर्गिक अधिकार है कहनेबालों को राज्य ने इस काले दिन में गोलीयों से भूना था । सुरक्षाकर्मीयों ने जातीय भेदभाव से परिचालित हो कर सख्त घायलों और शहीदों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया था । हजारों लोगों को बेरहमी से पीटा गया था । माँ-बहनों के साथ दुर्व्यवहार हुआ था ।

इन अन्यायपूर्ण कामों में राज्य के तीनों अंग और इनके नेतृत्त्व में रहे संचार भी हमारे बिरुद्ध एकजूट रहे और हैं । हमें सीमा के पार ढकेलने की कोशिश हुई थी । भारत और दुनियाँ के मानवाधिकारवादीयों का सहानुभूति नहीं होता तो यहाँ के एकल जातीय राज्य संयन्त्र हमें सीमा पार खदेड़ देती !

आसीन तीन – काला दिन है, रहेगा । संविधान संशोधन हो भी जाती है । राज्य हमारी मांगों को मान भी लेती है तब भी, शान्ति के उन क्षणों में भी इसे काला दिन ही माना जाएगा । क्योंकि तब भी आसीन तीन के काले करतूत बदल नहीं जायेंगे । हमारे शहीद लौट कर नहीं आ जायेंगे । राज्य से पीडा का वो विष हमें हीं नहीं हमारे सन्ततियों को भी जलाती रहेंगी ।

ईतिहास में आसीन तीन – काला दिन ऐसे ही अंकित रहेगा । जैसे अमेरिका में १८८६ का श्रमिकों का आन्दोलन की समृति में आज विश्व भर में १ मई दिवस को मजदूर दिवस के रुप में मनाया जाता है। भारत में स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद भी जलियाँवालाबाग काण्ड और चीन में लान्ग मार्च को याद किया जाता है ।

मधेश में आसीन तीन – काला दिन ही रहेगा । अन्तर इतना और महत्त्वपूर्ण कि मांगे पूरी होने के बाद यह स्मरण दिवस बन जाएगी । और, जब तक हम आन्दोलन में हैं यह उर्जा दिवस बनी रहेगी ।

२. राजपा नेपाल ने निर्वाचन में भाग लिया रणनैतिक हिसाब से । स्पष्ट रुप से यह कहते हुए कि हम इस संविधान को स्वीकार नहीं करते । हम इसमें अपनी जायज न्यायोचित बातें का समावेशन चाहते हैं । हमने निर्वाचन को आन्दोलन के रुप में लिया और हमारे जन प्रतिनिधि राष्ट्रित सभा, प्रतिनिधि सभा, स्थानीय तह में इसी प्राथमिकता के तहत अपनी भूमिका निभा रहे हैं । राजपा नेपाल इस पर सूक्ष्म दृष्टि रख रही है । गलतीयों को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है ।

संसद में हम विपक्ष में हैं । प्रधानमन्त्री के निर्वाचन में हमने वोट दिया । वो दिखाने के लिए कि २/३ बहुमत है, संशोधन करो । रणनैतिक हिसाब से यह बिल्कुल ठीक है ।

राजपा नेपाल को बरगलाने का कोशिश भी हुआ है । सरकार में शामिल करा कर एजेन्डा से विमुख करना ध्येय था । लोभ और डर भी दिखाये गए । मगर, पार्टी ने षडयन्त्र को चीड़ डाला है । जनता के अभिव्यक्तियों के वाहक रुप में प्रस्तुत होने का निर्णय लिया है ।

अब सरकारी नुमाइंदे और एकलजातीय राज्य चरित्र के संचार फिर से सक्रिय है । मधेशी लोगों को संचार में दिखाने के लोभ में अपने हिसाब से कहलवाने की कोशिश हो रही है । पत्रमपुष्पम् के प्रेमी कुछ तथाकथित बुद्धजीवी विष उगलते हैं । हमें इन सभी से सावधान रहना होगा । उनका एक ही ध्येय है कि मधेशी, अधिकार की लड़ाई से विमुख हो जाये ।

राजपा नेपाल के बिरोध में राज्य के सभी संयन्त्र हैं । सभी राजनीतिक दल हैं क्योंकि हम अपने एजेन्डा पर अडिग हैं । आज न कल ही सही यही एजेन्डा हमें बराबरी का अधिकार दिलाएगी । हमारे साथ अन्य सभी सिमान्तकृतों को भी बराबरी का सम्मान मिल सकेगा ।

३. लोग कहते हैं – कौन आयोजित करेगा काला दिन ? अरे, सब करेगा ! एक-एक मधेशी को जिसे बराबरी का अधिकार चाहिए । जिसने इस लड़ाई को आगे बढाया है या बढाना चाहता है ।

हम शहीदों को पुष्प अर्पित करेंगे । आन्दोलनकारीयों से आशीष लेंगे । एकता प्रदर्शित करने के लिए प्रतीकात्मक रुप से ब्लैक आउट करेंगे । संभव हो तो सभी एक साथ करें । शर्त यह कि बिरोध शान्तिपूर्ण होगा । हम पर जोरजुल्म हुआ तो उचित प्रतिकार होगा । अगर अलग-अलग आयोजित करते हैं तो एक-दूसरे में कोई हस्तक्षेप न करेंगे । विघ्न नहीं डालेंगे । किसी को भी अपमानित नहीं करेंगे ।

हम परिवर्त्तन चाहते हैं । बराबरी का परिवर्त्तन । प्रगतिशील परिवर्त्तन । सही लोकतान्त्रिक परिवर्त्तन ।
हमारी लड़ाई यथास्थितिवाद से है । कोई व्यक्ति या समूह-समुदाय से नहीं । इस सत्य को सदैव स्थापित करते जायेंगे ।

४. जब राजपा नेपाल ने आसीन तीन – काला दिन घोषित किया है तो राजपा नेपाल के कार्यकर्त्ता अथवा पार्टी से निर्वाचित कोई जनप्रतिनिधि संविधान दिवस से सम्बन्धित किसी भी सरकारी वा औपचारिक कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे – राष्ट्रिय सभा, प्रतिनिधि सभा के सदस्य या स्थानीय तह के मेयर/उपमेयर/अध्यक्ष/उपाध्यक्ष/वार्डअध्यक्ष/वार्डसदस्य अथवा जिला समन्वय समिति के निर्वाचित साथी … कोई भी !

आसीन तीन – काला दिन के लिए पार्टी से जारी कार्यक्रम की सफलता के लिए जी जान से लगेंगे । टोल-टोल में लोगों से सहयोग की याचना करेंगे कि एक छोटा सा हाथ और आन्दोलन का साथ हमारी बराबरी की लड़ाई को बहुत आगे निकाल देगा !

 

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