आ गया,आ गया….मजेदार चटपटा संविधान

बिम्मी शर्मा

बिम्मी शर्मा

बिम्मी शर्मा

काठमांडू,२४ जुलाई | अब आ गया बनकर नेपाल का ताजा, ताजा और मजेदार चटपटा संविधान । जैसे ठेला लगाकर हर चौक में चाट या भाजा बेचनेवाले बैठे रहते हैं । उसी तरह बानेश्वर चौक में संविधान का चटपटा ठेला लगा हुआ है । इस चाट को और ज्यादा मजेदार बनाने के लिए इसमे धर्म और जातीयता का चूरण मिलाया गया है । जिस के तीखेपन से मधेश बौखला गया है ।

अभी तो संविधानका सिर्फ ड्राफ्ट ही बना है । जो नेपाली काग्रेंस और नेकपा एमाले जनता को जबरदस्ती सुंघा कर स्वीकार करवाना चाहते हैं । जब संविधान सच में बनकर आ जाएगा तब क्या होगा?मधेशी भाइ, बन्धुओं को यह संविधान अपना कम सौतेला ज्यादा लग रहा है । इसीलिए वह इसको स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं । यह संविधान देश और जनता से ज्यादा काँग्रेंस और एमाले का मुख पत्र ज्यादा लग रहा है । हो भी क्यों नहीं ?एमाले के सुप्रिमो केपी ओली मुहावरे का बघार लगाकर इस संविधान को और ज्यादा चटपटा बना रहे हैं ।

ओली को लगता है कि उनका गोली दागने जैसा अन्दाज और मुहावरे को छौंकने से नेपाली जनता रीझ जाएगी । लेकिन वह यह भूल गए कि अब जनता उतनी भोली नहीं रही । उसे अपना अच्छा, बुरा सब पता है । इसीलिए मधेशी जनता अपने हक, अधिकार के लिए जाग चुकी है । ओली को मधेश और मधेशी दोनों से नफरत हैं । कितनी कमाल की बात है कि वह खुद मधेश से हैं । दिल्ली की सत्ता को वह पूजते भी हं । दिल्ली की ही दया से ओली का स्वास्थ्योपचार होता है । ओर विडम्बना है कि वह मधेश की जनता को नेपाली कम भारतीय ज्यादा समझते हैं ।

oli.png1आमतौर पर चाट या भाजा मे उबलाहुआआलू, प्याज, टमाटर, प्याज, हरी मिर्चऔर धनिया डालते है । पर इस संविधान के स्पेशल चाट मे प्याजकीजगहधर्म को डाला गया है । जिस से सभी के आँख मे तीखा लग गया है । नेपालीजनताअपने धर्म के पिछे पागल है । वहधर्म निरपेक्ष वाधर्म विहीन देश नहीचाहती । जनताको खण्डित व बटां हुआ देशभीमन्जुर नही है । वहआलू की तरह सभी सब्जीयानी सभीजातीयों के साथमिलजुल कर रहनाचाहती है ।

पर नेता फुट डालो और राज करो सूत्र को अपना मूल मन्त्र मान कर चल रही हैं । यदि संविधान मे सभी जाति, धर्म और वर्ग को समेट कर सम्बोधन किया गया होता तो सभी खुश होते । तब नेताओं को अपनी स्वार्थपूर्ति का मौका नहीं मिलेगा और वह राजनीति के विसात से गायब हो जाएगें । इसीलिए नेपाल के नेतागण धर्म और जाति का तड़का लगाकर चटपटे चाट जैसा संविधान जनता को परोस रही है । और जनता जबरदस्ती उन के पत्तल पर परोसी गयी इस तीखे और मसालेदार चाटको खाने से मना कर रही है ।

सात साल में देश का अर्बों रुंपैया पानी की तरह बहा कर, जो संविधान बन कर आने वाला है वह न तो देश की भलाई के पक्ष का है और न ही जनता की भलाई के पक्ष में है । यह संविधान तीन दल काग्रेंस, एमाले और माओवादी हुक्मरानों के इशाराें पर बन रहा ऐसा बासी और सड़ा हुआ चाट है जिसको खाने के बाद इसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ेगा । देश के लिए यह दुख की बात है कि जिस संविधान में जनता का विचार प्रतिनिधित्व होना चाहिए वह तीन बड़े दलों के हाथ की कठपुतली बन गयी है । जनता हासिए पर चली गई है । तीन बड़े दल मधेश को तो नेपाल का अभिन्न हिस्सा मानते हैं पर मधेशियों को नेपाली नहीं मानते । इसलिए माँ के नाम से नागरिकता देने मे भी कोताही बरत रहे हैं ।

बीरवल की खिचड़ी की तरह लम्बे समय संविधान सभा के चूल्हे में पकने के बाद जो चटपटा संविधान बन कर आया वह देखने मे तो बहुत शानदार है पर इसका जायका काफी खराब है । हो सकता है मधेशी नेताओं को इसी कारण से अपच हो गया हो । क्योंकि जिस संविधान बनाने का कलछुल जनता के पास होना चाहिए वह नेता के पास है । अब जब नेता ही रसोई के महाराज हंै तो संविधान भी उन्हीं के स्वाद के हिसाब से बनेगा । अब सब इस सावन मास के अन्त तक बनकर आनेवाला चटपटा, मसालेदार पर देश के शरीर के लिए हानिकारक संविधान खाने के लिए तैयार हो कर बैठिए । यह चटपटा संविधान इतना तीखा है कि खाने के बाद निश्चित रूप से सब की आँखो में आँसू का आना तो तय है और डर है कि आँसू का यह सैलाब कहीं नेताओं को बहाकर न ले जाए । (व्यंग्य)

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