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इंटरनेशनल वीमन्स डे थीम ‘वीमेन इन द चेंजिंग वर्ल्ड ऑफ वर्क-प्लानेट 50-50 बाय 2030’।

27_02_2017-international_women_day

8 मार्च 2017 का इंटरनेशनल वीमन्स डे एक अलग थीम को लेकर चर्चा में है। इस बार वीमेन्स डे इस बात पर फोकस कर रहा है कि बदलती दुनिया में महिलाओं का एक बहुत बड़ा योगदान है और आने वाले 2030 तक महिलाओं के जुड़ी सारी समस्याओं के हल करने का प्रण लिया गया है। युनाईटेड नेशन के द्वारा इस साल के वीमेन्स डे थीम का नाम दिया गया है ‘वीमेन इन द चेंजिंग वर्ल्ड ऑफ वर्क-प्लानेट 50-50 बाय 2030’।

दुनिया हर क्षेत्र में महिलाओं के लगातार योगदान से सब कुछ बदल रहा है। एक तरफ हम वैश्विक बन रहे हैं, डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ रहे हैं, दूसरी तरफ हमारे मजदूर भी बढ़ रहे हैं, अनियमित जीविका और उनके इनकम, व्यापार के नए नियम और वातावरण पर पड़ते इनके असर। इस वीमेन्स डे पर इन सब मुद्दों को उठाने की बात की जा रही है।

2015 में दुनिया के लीडर्स ने सतत विकास कार्यों को अपनाया। इसके अंतर्गत उन्होंने जेंडर इक्वालिटी को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को भी सशक्त बनाने का प्रण लिया और सतत विकास के क्षेत्र में एजेंडा 2010 के लिए उन्हें भी एक इक्वल रिस्पांसिबिलिटी दी। लेकिन टार्गेट हम कुछ भी बना लें, उन्हें तभी पाया जा सकता है जब हम पूरी तरह से गरीबी समाप्त कर पायेंगे साथ ही सतत आर्थिक विकास में महिलाओं को बराबर का हकदार बनायेंगे। सभी देशों के बीच भेदभाव को समाप्त करके लिंग भेद को खत्म करके उन्हें विकास की प्रक्रिया में अपना बराबर का योगदान देने की आजादी देंगे।

इस साल की थीम जिसका मतलब है दुनिया में बदलाव, एक तरह से लिंग भेद को भरने में काफी अहम भूमिका निभाने वाला है। इसके अलावा इनफॉर्मल इकोनॉमी में भी महिलाओं के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता है। इंटरनेशलन वीमेन्स डे एक तरह से उन्हे रिफ्लैक्ट करती है जिन्होंने साहस का काम किया और एक साधारण सी महिला ने भी अपने असाधारण भूमिका से अपने समाज और देश क नाम रौशन किया।

इस थीम के पीछे का आईडिया ये है कि एजेंडा 2030 तक इन्हें कैसे अचीव किया जा सकता है।
-जेंडर इक्वालिटी को स्थापित करना और सभी महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाना
-क्वालिटी एजुकेशन के प्रति लड़कियों को बढ़ावा देना।
-महिलांओं के मानवाधिकार को लेकर भी बातें होंगी।
-महिलायें जिन्हें 24 घंटे के लिए काम पर रहना होता है। जिनका कोई पेमेंट नहीं होता है घरेलू काम काज जिनमें उन्हें कोई पहचान नहीं मिल पाती है लेकिन अप्रत्यक्ष रुप से कहीं न कहीं वे देश, दुनिया के विकास में भी अहम योगदान दे रही होती हैं। इनके लिए भी उन्हें पहचान मिलनी चाहिए।
-नेतृत्व में लिंग भेद, आंत्रप्रेन्योरशिप में लिंग भेद इन सभी को खत्म किया जाना चाहिए। जॉब क्रियेशन के लिए आर्थिक नीति, गरीबी उन्मूलन और सतत विकास भी जरुरी है।
-नए नए इनोवेटिव तकनीक को महिलाओं के इस्तेमाल के लिए बढ़ावा देना, वर्क प्लेस पर महिलाओं के साथ हिंसा ना होना इन सभी को रोकना भी है।

क्या हैं महत्वपूर्ण लक्ष्य जिन्हें 2030 तक पूरा करने की बात कही गई है-
-2030 तक लड़के और लड़कियों को निशुल्क और क्वालिटी प्राईमरी और सेकेंडरी एजुकेशन मिले।
-2030 तक सभी लड़के और लड़कियों को बचपन से ही अच्छे तरीके से अपने बचपन के विकास करने का अधिकार हो। सही प्री प्राईमरी एजुकेशन मिले ताकि वे प्राईमरी एजुकेशन के लिए अच्छे से तैयार हो सके।
-महिलाओं को लेकर भेदभाव को हर स्तर पर खत्म करने का लक्ष्य।
-पब्लिक प्लेस और प्राईवेट प्लेस पर महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले हिंसा को पूरी तरह से खत्म करना। इसके साथ ही गर्ल ट्रैफिकिंग हो या उनके साथ सैक्शुअल हरासमेंट जैसी शोषण, इन सभी को खत्म करना।
-महिलाओं को लेकर होने वाले सभी गलत प्रथाएं जिनसे उन्हें तकलीफ का सामना करना पड़ता है। चाहे वो शादी के बाद के होने वाले रीती रिवाज हों या बचपन में लड़कियों को खतना करवाने की प्रथा हो। इन सभी को खत्म करना है।

साभार ः जागरण

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