इच्छाशक्ति ही अागे की राह बनाती है

मन में लगन, इच्छाशक्ति और आगे बढ़ने की चाहत हो, तो किसी भी बाधा को आसानी से पार किया जा सकता है।
गंगेश मिश्र

gorky1
अक़्सर बच्चों को पढ़ने-लिखने के लिए बार-बार बोलना पड़ता है; लेकिन एक बच्चा ऐसा था, जिसे पढ़ने के लिए कभी बोलना नहीं पड़ता था।ऐसा इसलिए क्योंकि,  उसे बचपन से ही पढ़ना बहुत पसन्द था।उस बच्चे का नाम था, मैक्सिम गोर्की,  जो बड़ा होकर सोवियत संघ का प्रसिद्ध लेखक हुआ।
मैक्सिम गोर्की का असली नाम एलेक्सी मैक्सिमोविच पेश्कोव था। उनका जन्म निझ्नी नोवगरद नगर में हुआ था। कहते हैं कि उनके पिता बढ़ई थे; उनके घर में पढ़ाई के लायक स्थितियाँ नहीं थीं।फ़िर भी वे पढ़ना चाहते थे; पढ़ने के लिए उन्होंने एक कवाड़ी के यहाँ नौकरी कर ली। कवाड़ी की दुकान में हर रोज़ तरह-तरह की किताबें आती थीं; गोर्की खुशी से झूम उठते थे। किताबों को देखते ही उनके मन में उन्हें पढ़ने के लिए जिज्ञासा जाग उठती थी। काम के बाद जब भी उन्हें समय मिलता था, वे सिर्फ़ किताबें पढ़ते थे। जिस दिन वह कुछ पढ़ नहीं पाते थे; दिन भर खोये-खोये से रहते थे।
हालांकि कई किताबें उनके समझ से परे होती थीं,  फ़िर भी वे उन्हें पढ़ते थे और समझने की कोशिश करते थे।
समय बीतता गया, बीतता गया; उन्होंने दुनियाँ भर की हजारों किताबें पढ़ डालीं।
कुछ समय बाद गोर्की को महसूस हुआ कि उन्हें सिर्फ़ पढ़ने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए,  बल्कि लिखने का भी प्रयास करना चाहिए। एक दिन गोर्की ने एक कहानी लिखकर, उसे समाचार-पत्र में छपने के लिए भेज दिया। कुछ दिनों बाद वह कहानी न सिर्फ़ प्रकाशित हुई, बल्कि एक मशहूर लेखक ने उस कहानी के लिए बधाई पत्र भी भेजा। यह देखकर गोर्की का उत्साह बढ़ गया; अब उन्होंने अपना सारा ध्यान लेखन और अध्ययन पर लगा दिया। वह लगातार लिखने लगे, फ़िर उन्होंने ” माँ ” जैसी महान रचना लिखी। ” माँ ” ने उन्हें दुनियाँ के प्रमुख लेखकों में उनकी जगह पक्की कर दी।मैक्सिम गोर्की ने साबित कर दिखाया कि यदि मन में लगन, इच्छाशक्ति और आगे बढ़ने की चाहत हो, तो किसी भी बाधा को आसानी से पार किया जा सकता है।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz