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इसरो ने अंतरिक्ष में बनाया विश्व रिकॉर्ड,

नई दिल्ली 16_02_2017-isrocrt

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को एक साथ एक ही मिशन में 104 सेटेलाइट कामयाबी के साथ अंतरिक्ष में प्रवेश करा कर एक नया इतिहास बना दिया है। इस मिशन के जरिये इसरो ने अपनी शानदार क्षमता का प्रदर्शन तो किया ही, साथ ही अंतरिक्ष बाजार में अपनी धाक भी जमा ली है,जिसकी अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी जबरदस्त सराहना की है। इसी मिशन के जरिये उसने कार्टोसेट-2 सीरीज की एक महत्वपूर्ण सेटेलाइट को भी लांच किया। इसके जरिये देश को मौसम की सूचना से लेकर सड़कों के हाल तक की जानकारी और जमीन के उपयोग का पता लगाने तक में मदद मिल सकेगी। भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कामयाबी के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी है। चेन्नई से लगभग सौ किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से बुधवार सुबह 9 बज कर 28 मिनट पर यह मिशन लांच किया गया। भारत के विश्वसनीय पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) की यह 39वीं उड़ान थी। उसने तय समय से अपने ठिकाने पर पहुंच कर सबसे पहले 714 किलोग्राम के कार्टोसेट-2 सेटेलाइट को अंतरिक्ष में उतारा। इसके बाद आइएनएस 1ए और 1बी को बारी-बारी से रवाना किया गया।

सरो द्वारा बुधवार को एक रॉकेट से 104 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण के बाद वैश्विक मीडिया ने भारतीय स्पेस कार्यक्रम की जबरदस्त तारीफ करते हुए कहा है कि भारत अंतरिक्ष आधारित सर्वेलंस और संचार के तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनकर उभरा है। अमरीकी समाचार पत्र वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा है, ‘यह प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के लिए एक और उपलब्धि है। कम खर्च में सफल मिशन को लेकर इसरो की साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है।’ न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है, ‘प्रक्षेपण में रिस्क बहुत ज्यादा था क्योंकि 17,000 मील प्रति घंटा की रफ्तार से जा रहे एक रॉकेट से जिस तरह हर कुछ सेंकंड में गोली की रफ्तार से उपग्रहों को उनकी कक्षाओं में स्थापित किया गया, उसे देखते हुए यदि एक भी उपग्रह गलत कक्षा में चला जाता तो वे एक-दूसरे से टकरा सकते थे।’ ब्रिटेन के प्रमुख अखबार द गार्जियन ने इसरो अध्यक्ष किरण कुमार के हवाले से कहा कि भारत ने जो उपलब्धि आज हासिल की है वह प्रत्येक प्रक्षेपण के साथ उसकी क्षमता को बढ़ाने में मदद कर रही है और यह प्रक्षेपण भविष्य में अधिक से अधिक फायदेमंद साबित होंगे। लंदन के टाइम्स अखबार ने अपने लेख में कहा है कि भारत के कई महत्वपूर्ण मिशन का खर्च उनके रूसी, यूरोपीय और अमेरिकी समकक्षों के मुकाबले बहुत कम रहा है। इसरो के मंगल मिशन का खर्च महज 7.3 करोड़ डॉलर था, जबकि के ‘मावेन मार्स लांच’ में 67.1 करोड़ डॉलर का खर्च आया था .

साभार, दैनिक जागरण

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