ईद की नमाज से पहले अदा करें सदका-ए-फित्र

रमजान माह में आने वाला ईद का त्योहार इंसानी बराबरी का पैगाम देता है। सब एक-दूसरे की खुशी में शरीक हों, इसके लिए जकात, फित्र का प्रावधान दिया

(Photo credit: riyel_picture{})”]eid mubarrak [2]गया। गरीबों, मिसकीनों को इतना माल दे दिया जाए कि वे ईद की खुशियों से वंचित न रहें।

sweet Eid

ैगंबर हजरत मोहम्मद ने ‘सदका-ए-फित्र’ को ‘जकातुल फित्र’ कहा है। यह (दान) रमजान के रोजे पूरे होने के बाद दी जाती है। ‘जकातुल फित्र’ यह सदका रोजे के लिए बे-हयाई और बेकार बातों से पाक होने के लिए गरीबों को दिया जाता है।

रोजे की हालत में इंसान से कुछ भूल-चूक हो जाती है। जबान और निगाह से गलती हो जाती है। इन्हें माफ कराने के लिए सदका दिया जाता है।

Eid Feast

Eid Feast (Photo credit: Farah_A)

हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर रजि. बयान फरमाते हैं कि अल्लाह के रसूल ने रमजान का सदका-ए-फित्र एक साअ (1700 ग्राम के लगभग) खजूर या जौ देना हर मुसलमान पर फर्ज है।

चाहे वह आजाद हो या गुलाम, मर्द हो या औरत। जकात माल पर फर्ज है, वह माल को पाक करती है और सदका-ए-फित्र इंसान पर वाजिब है। यह इंसान को गुनाहों की गंदगी से पाक करता है।

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