उतर कोरिया द्वारा हाईड्रोजन बम की सफल परीक्षण के दावे से विश्व हुआ तरंगित : मुक्तिनाथ साह

 मुक्तिनाथ साह, जनकपुर, ११ जनवरी ।
प्रजातान्त्रिक जन गणतन्त्र कोरिया ने अपने पहले हाईड्रोजन बम का सफल परीक्षण का दावा किया है।जनवरी ६ को सुवह १०बजे उक्त परीक्षण किया गया और परीक्षण पूर्ण सफल रहा ,ऐसी सूचना उतर कोरियाली संचार माध्यमों द्वारा विश्व समुदाय को जानकारी कराया गया।यह एक ऐसी खबर थी जो पुरे विश्व को तरङ्गीत कर दिया।दुसरी ओर विश्व के कुछ शक्तिशाली राष्ट्र उतर कोरिया के इस दावे को पूर्ण रूप से स्वीकार नही किया है और इसकी प्रमाणीकरण में जुट गया है।जापान ,जो उतर कोरिया के निकट होने के कारण उसकी ऐसी हरकतों के प्रति सदैव संवेदनशील रहता है,बताया है कि हाईड्रोजन बम के बिकिरण का असर जापान में नही देखा गया है।अमेरिका ने तो यहाँ तक अपनी विज्ञप्ति मे कह दिया है कि हो सकता है उतर कोरिया उत्तेजना मे आकर ऐसा अभिव्यक्ति दिया हो।जो भी हो उतर कोरिया कि इस परीक्षण ने पूरे विश्व को सकते में डाल दिया है क्योंकि परीक्षण के कारण ४.९ रेक्टर का भूकम्प मापन किया गया है।इसलिए यह आंकलन किया जा रहा है कि उतर कोरिया द्वारा किया गया परीक्षण छोटा हाईड्रोजन बम था।
        h11सन् 1945 मे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोसिमा और नागासाकी शहरों मे कहर बरपाने वाला बम हाईड्रोजन बम नही बल्की परमाणु बम था जो की हाईड्रोजन बम से बहुत ही कम शक्तिशाली होता है।हाईड्रोजन बम परमाणु बम से हजार गुणा ज्यादा शक्तिशाली होता है।हाईड्रोजन बम का प्रथम सफल परीक्षण अमेरिका द्वारा १नोभेम्बर  १९५२मे किया गया था।इस के बाद रूस,फ्रांस,चीन,यू के,भारत,पाकिस्तान,साउथ अफ्रिका,ईजरायल,उतर कोरिया जैसे देश आणविक तकनिक का सफल परीक्षण वाली देशों मे शामिल हो गया था।कहने का तात्पर्य है कि उतर कोरिया तो परमाणु बम का परीक्षण बहुत पहले ही कर चुका था पर अभी जो परीक्षण किया है वह है भयंकर संहारक क्षमता वाली हाईड्रोजन बम का।इस परीक्षण से उतर कोरिया की गिनती अब उन देशों मे की जा सकती है,जिन्होने भयंकर संहारक क्षमता हासिल कर ली है।खतरा सिर्फ संहारक क्षमता तक ही सीमित नही है बल्कि उसके प्रयोग को लेकर भी है।क्योंकि उतर कोरिया मे ऐसी एक तानाशाह सरकार है जिसका रबैया अंतरराष्ट्रीय मामलों मे कभी जिम्मेदारी भरा नही रहा।संयुक्त राष्ट्र संघ ने कई तरह की पांबदीयाँ लगाकर उतर कोरिया को सही रास्ते पर लाने की कोशिशें की पर हर बार उसने पहले से ज्यादा उदंडता दिखाई है।वैसे तो ऐतिहासिक कारणों से उतर कोरिया कि मुख्य दुश्मनी सिर्फ दक्षिण कोरिया से ही है पर हाईड्रोजन बम की विनाशकारी क्षमता और उतर कोरिया की अंतरराष्ट्रीय मामलों मे गैर जिम्मेदाराना रबैयों के कारण हो सकने वाली अनहोनी को लेकर पुरा विश्व चिन्तीत है।ईस लिए उतर कोरिया की इस कदम को विश्वव्यापी रूप मे निंदा किया गया।अमेरिका,चीन,जापान,दक्षिण कोरिया लगायत नेपाल ने भी विरोध जताया है।संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद् ईस घटना को गम्भीरता से लेते हुए आकष्मिक बैठक बुलाकर उतर कोरिया कोरिया के खिलाफ कडा शब्दो मे विरोध करने के साथ और ज्यादा पांबदीया लगाने का निर्णय लिया है।अमेरिका ने कहा है की विश्व समुदाय निशस्त्रीकरण लिए बार बार आग्रह करने के बावजुद उतर कोरिया द्वारा किया गया यह परीक्षण राष्ट्र संघीय सुरक्षा परिषद् का शांति सम्बन्धी प्रस्ताव का घोर उलङ्घन है।
     उतर कोरिया द्वारा किया गया हाईड्रोजन बम परीक्षण यह भी संदेश देता है कि जब उतर कोरिया जैसा कम विकसित देश यह तकनीक विकसित कर सकती है तो आने वाले कुछ सालों मे दुनिया के कुछ और देश इस तकनीक का विकाश करने मे कामयाव हो जाए।एक दूसरा और  सब से बडा डर यह भी है कि कहीं कोई आतंकी संगठन उतर कोरिया से यह तकनीक न हासिल कर ले।इसलिए अब जरूरी है कि विश्व परमाणु हथियार निशस्त्रीकरण को गम्भीरता से ली जाए ,ता की पुरी दुनिया के परमाणु हथियार नष्ट किए जाऐं और परमाणु तकनीक को विश्व शांति एंव विकाश के लिए ईस्तेमाल का रास्ता तैयार हो सके
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