उत्कृष्ट छात्रों के लिए अवसर हमेशा रहता है

एक्सपर्ट टीचर भी हमारे कलेज का आर्कषक पक्ष है । एकेडेमिक उत्कृष्टता, अनुशासन प्रतिबद्धता बच्चों को बिगडने नही देते हैं, ये हमारी सामाजिक जिम्मेदारी के साथ साथ हमारा सब से बडा आर्कषण भी है

हमारे यहाँ नाशा में साइन्स में ही अधिक विद्यार्थी हैं वो इस लिए कि साइन्स में ५०० सीट रखा है हमने तथा मैनेजमेन्ट मे ३०० सीट है और हमारे यहाँ सीट सीमित ही रहती है ।

नाशा इन्टरनेश्नल कालेज स्थापित कालेजों में से एक है । कालेज के प्रिन्सीपल सुधीर कुमार झा जितने विद्वान हैं, अपने विद्यार्थियों के भविष्य

Sudhir Ku Jha

सुधीर कुमार झा

के प्रति उतने ही प्रतिवद्ध भी । अपने कालेज में पढाई के प्रति कटिबद्धता तथा अनुशासन के प्रति प्रतिवद्धता ही इसे एक मुकाम पर ले गई है कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी । प्रोफेसर झा ने मैडम मैरी क्युरी विश्वविद्यालय पेरिस से उच्च शिक्षा हासिल की है । सन् १९९५ से प्राध्यापन मेंं संलग्न झा अपने आप को फिजिक्स का टीचर–प्रोफेसर कहलाना अधिक पसन्द करते है, प्रिन्सीपल के पद को आप दूसरे स्थान पर रखते हैं ।
आइरन गेट मानीे जाने बाली एसएलसी के बाद क्या पढें, कहाँ पढें इन सारी बातो की दुविधा अकसर विद्यार्थियों में देखी जाती है, इन्हीं सन्दर्भ को लेकर तिनकुने स्थित नाशा इन्टरनेश्नल हायर सेकेण्डरी स्कूल–कालेज काठमाण्डू के प्रिन्सीपल सुधीर कुमार झा के साथ विजेता चौधरी से हुई विशेष बातचीत का अंश प्रस्तुत है–

आसाढ में एसएलसी का परिणाम निकलने वाला है, आपके कालेज में ११ कक्षा के लिए नया आर्कषण क्या है ?
नए आर्कषण के तौर पर हमलोगों ने उत्कृष्ट गरीब, दलित विद्यार्थियों को विशेष सहुलियत की व्यवस्था की है । ये हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है । एक्सपर्ट टीचर भी हमारे कलेज का आर्कषक पक्ष है । एकेडेमिक उत्कृष्टता, अनुशासन प्रतिबद्धता बच्चों को बिगडने नही देते हैं, ये हमारी सामाजिक जिम्मेदारी के साथ साथ हमारा सब से बडा आर्कषण भी है ।
गत वर्ष से अलग इस साल कोई नया कोर्स पाठ्यक्रम में समावेश किया गया है ?
गे्रडिंग प्रणाली आने की बात सरकार ने खुलासा की है पर अब तक ११ कक्षा के पाठ्यक्रम में कोई परिवर्तन नही किया गया है । इस बार भी होगा या नही कहा नहीं जा सकता ।
एक प्रिन्सीपल व शिक्षाविद् के नाते एसएलसी के बाद किस विषय का चुनाव करने से विद्यार्थियों के लिए भविष्योपयोगी साबित हो सकता है ?
देखिए, कोई भी फेकल्टी व विषय अपने आप में महान होता है । आप को महानतम व्यक्ति बनने के लिए मेहनत करनी ही पडेगी और अच्छा विद्यार्थी भी हो और कोच भी अच्छा हुआ तो रिजल्ट निसन्देह अच्छा ही होगा । अभी नेपाल के परिवेश में कहा जाए तो मेडिकल साइन्स है, सीए है बीबीए, इन्जिनियरींग का क्रेज है । पर मैं विद्यार्थियों को कहना चाहता हूँ, ज्यादा पैसा कमाने के तरफ ही ना लगे आपकी दिलचस्पी कौन से क्षेत्र में हंै, किस विषय में आप अपना वेस्ट आउटकम दे सकते हंै, आप को वही विषय चुनना चाहिए । अगर आप क्वालीफाइड हंै तो आप के लिए हर जगह हर दिन खाली रहेगा । हरेक क्वालीफाइड के लिए हरेक फिल्ड के टप मोस्ट पोजीशन खाली रहता है ये मेरी मान्यता है ।
क्या विज्ञान व मेडिकल साइन्स पढने के लिए उत्कृष्ट अंक ही मापक हैं ?
एसएलसी में उत्कृष्ट ग्रेड आने से ही आप साइन्स पढ सकते हैं या निम्न अंक आने पर नही पढ पाएँगें ऐसा मैं नही मानता । किसी का लाइफटाइम कैलकुलेशन करने के लिए एसएलसी मात्र काफी नहीं है । अब का ११ तथा १२ कक्षा निर्णय करेगी के वो कितना आगे बढ सकता है । ११ कक्षा में जाने बाले विद्यार्थियों को मेरी सलाह है– अब आने बाले दो वर्षौं मे आप जिन फिल्ड में जाएं उस में जम के मेहनत करें । हाँ मगर साइन्स पढने से आप पीछे वाणिज्य लगायत के विषय पढ सकते हैं ।
अभी तक कौन सी संकाय में विद्यार्थियों की अधिक रुचि व आर्कषण पाया है आपने ?
अभी भी मधेस के अधिकांश विद्यार्थी साइन्स के तरफ ही आकर्षित हंै । कुछ सालाें से मैनेजमेन्ट में भी आकर्षण बढ रहा है । हमारे कालेज में प्लस टू में विज्ञान तथा वाणिज्य है । ग्रेजुएसन में हम लोगो ने अभी तीन विषय बीबीए, बीबीएस, बीबीएस डब्लू रहे है । निकट भविष्य में अन्य विषय भी लाने की हमारी तैयारी चल रही है ।
आजकल प्राविधिक शिक्षा की तरफ विद्यार्थियों का झुकाब अधिक दिख रहा है, क्या यही सिर्फ कैरियर मेकिंग विषय है ?
देखिए टेक्नीकल शिक्षा के तरफ अभी भी अधिक झुकाव है विद्यार्थियों का । ये अभी की माँग व आवश्यकता भी है । यद्यपि पुराने का क्रेज अभी भी वरकरार है । जहाँ तक कैरियर बनाने का सवाल है तो वो विद्यार्थी की रुचि पर निर्भर करता है ।
आपके कालेज में कौन से विषय पढने वाले विद्यार्थी अधिक है ?
हमारे यहाँ नाशा में साइन्स में ही अधिक विद्यार्थी हैं वो इस लिए कि साइन्स में ५०० सीट रखा है हमने तथा मैनेजमेन्ट मे ३०० सीट है और हमारे यहाँ सीट सीमित ही रहती है ।
मैनेजमेन्ट का स्कोप कैसा है ?
अभी मैनेजमेन्ट का भी बहुत आर्कषण है । इस मे लडकियों का उत्साहित भी काफी है । वाणिज्य में बहुत अच्छा स्कोप है ।
चित्रकला, इन्टेरियर डेकोरेशन जैसा विषय प्लस टू के पाठ्यक्रम में समावेश है या नही ? ऐसा विषय पढने के लिए खोजते हुए विद्यार्थी आते हैं ?
देखिए हमारे यहाँ प्लस टू मेें विज्ञान व वाणिज्य ही है । वैसे इन्टरमीडिएट के बाद बहुत अप्सन है चुनने के लिए । मेडिसीन से बाहर का क्षेत्र अभी विस्तार हो रहा है पर ऐसे विषय खोजते हुए हमारे यहाँ कुछ खास विद्यार्थी नही आते है । इन विषय के लिए बहुत ज्यादा निवेश करना पडता है, अभी हम लोग उक्त निवेश के लिए सोच नहीं पाए हैं । हमारा अभी का ध्येय मोन्टेश्वरी से मास्टर तक की योजना है । उसी का प्रयास अभी जारी है ।
बाहर से आए तराई तथा दुर्गम जिलों के विद्यार्थियों के लिए कुछ सहुलियत की व्यवस्था है या नही ?
बिलकुल, अगर आप डिजर्भींग है तो सबकुछ हम लोग प्रोभाइड करते हैं । इन्ट्रान्स के परिणाम के बाद विद्यार्थी टप १० मे आते है तो उन्हें सब कुछ में सहुलियत मिलती है । १० विद्यार्थी प्रत्येक वर्ष स्कालरशिप में ही पढते हैं । एकेडमीकली कुछ पैसा नही लगता है । दुर्गम, पश्चिम व तराई के मध्यमवर्ग के बहुत बच्चे है हमारे यहाँ । और मदद पाँच हजार भी बहुत होते है हम लोग इस बात को समझते है । वैसे बहुत फी लेने से हम बडे कालेज बन जाएँगें ये मान्यता चल रही है, हाँ दूसरी बात ये भी समझने वाली है जो बहुत कम पैसा ले रही है वो आप को शिक्षा का गुणस्तर नहीं दे रहा है । इस बात से सचेत रहना भी जरुरी है । बहरहाल पारिवारिक अवस्था तथा विद्यार्थी के लगन को देखकर सहयोग करते है । हरेक वर्ष तीन चार सौ पश्चिम के विद्यार्थी भी होते है और तराई के भी ।
निजी विद्यालय तथा कालेज ज्यादा पैसा ऐंठ रहें है उस के विरोध में अभी विद्यार्थी संगठन आन्दोलित है, इस विषय पर आप को कुछ कहना है ?
देखिए ज्यादा पैसा ना लिया जाए उसका मैं समर्थक हूँ और ये समर्थन हमेशा रहेगा ।
एसएलसी में ग्रेडिगं प्रणाली का सरकार का नियम कैसा है, क्या पहले का मार्कसीट ही उपयुक्त नही था ?
ग्रेडीगं सरकार का नियम है । ग्रेड और परसेन्टेज से कुछ अंतर नहीं पडेगा । मंै इस को ज्यादा मान्यता नही देता हूँ । इन्टरमीडियट में मेहनत किया है तो आगे भी अच्छा ही करेगा । यद्यपि ग्लोबलाइज करने का सरकार का अच्छा प्रयास है । पर नामके लिए नही, स्तर के लिए ग्लोबलाइज करना कारगर होगा ।
जिला से आए विद्यार्थियों का यहाँ पर कैसा प्रर्दशन रहता है ?
बाहर के विद्यार्थी पहले दिन से अच्छा रहते है । हाँ कुछ को एक महीने विशेष देखभाल करने की जरुरत पडती है, मोटिभेसन क्लास भी देना पडता है तथा अभिभावकीय देखभाल करने की आवश्यकता पडती है । वे या तो बन्द हडताल की वजह से पढाई नही कर पाते या फिर अंग्रेजी की थोडी समस्या रहती है पर एक महीने के अन्दर ही वे विद्यार्थी समायोजित हो जाते हंै ।

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