उत्तराखंड के बाद बिहार में भी मजबूत लोकायुक्त

पटना।।  उत्तराखंड के बाद अब बिहार सरकार भी टीम अन्ना के जनलोकपाल की तर्ज पर राज्य में मजबूत लोकायुक्त कानून लाने जा रही है। बिहार सरकार ने टीम अन्ना से किए वादे के मुताबिक भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और कदम बढ़ाते हुए मजबूत लोकायुक्त बनाने का फैसला किया है। टीम अन्ना ने कहा कि नीतीश सरकार के इस कदम से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अब नए दौर में पहुंच गई है।

बिहार कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को मजबूत लोकायुक्त अधिनियम के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई। इस मामले में 22 नवंबर तक जनता से सुझाव भी मांगे गए हैं। इसके दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति, विधानमंडल के सदस्य और निगमों में कार्यरत कर्मियों के अलावा सभी लोक सेवक आएंगे।

कैबिनेट सचिव रविकांत ने बताया कि प्रारूप के अनुसार नए लोकायुक्त में अध्यक्ष के अलावा दो अन्य सदस्य होंगे। अध्यक्ष को चुनने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में चयन समिति होगी, जिसमें मुख्यमंत्री के अलावे मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत मंत्री, विधानसभा में नेता विपक्ष, हाई कोर्ट के दो वर्तमान जज और वरिष्ठ नागरिक सदस्य होंगे।

लोकायुक्त के दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधानपरिषद के सभापति, विधानमंडल के सदस्य और निगमों में कार्यरत कर्मियों के अलावे सभी लोकसेवक आएंगे। रविकांत ने बताया कि इस बिल को विधानसभा के विंटर सेशन में पारित कराने का फैसला लिया गया है।

बिहार सरकार के इस कदम से अन्ना समर्थक भी काफी खुश हैं। इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बिहार के संयोजक रत्नेश चौधारी कहते हैं कि बिहार में इसका व्यापक असर होगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अब नए दौर में पहुंच गई है। वह कहते हैं कि इसमें मुख्यमंत्री से लेकर लोकसेवक तक दायरे में रहेंगे, इसलिए यह हर तरीके से अच्छा है।

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