Wed. Sep 19th, 2018

उदीयमान सूर्य काे अर्ध्य देने का सही समय अाैर तरीका

२७ अक्टुवर

उदयीमान सूर्य को अर्घ्‍य 
कार्तिक शुक्ल की चतुर्थी को ‘नहाए-खाए’  से छठ पूजा शुरू होती है। पंचमी को खरना और षष्ठी के दि‍न शाम को डूबते सूरज को अर्घ्‍य व अंतिम दिन सप्तमी को उदयीमान यानी कि‍ उगते हुए सूर्य को अर्घ्‍य दि‍या जाता है। अंति‍म दि‍न शुभ मुहूर्त में अर्घ्‍य देने के बाद ही यह व्रत पूरा होता है। शास्‍त्रों में छठ मैया को संतान की रक्षा करने वाला और सूर्य देव को इस संसार में रौशनी और जीवन का प्रमुख स्रोत बताया गया है।

सूर्य को अर्घ्‍य देने का समय

सूर्य देव अर्घ्‍य वि‍धिवत तरीके से देने से वे बहुत जल्‍दी प्रसन्न होते हैं। कल सप्‍तमी को उगते हुए सूर्य को अर्घ्‍य देने का समय सुबह 6 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगा। अंति‍म दि‍न अर्घ्‍य देने के बाद सूर्य देव से और उनकी बहन छठ मइया से हाथ जोड़कर अंजाने में हुई गलति‍यों के लि‍ए क्षमा जरूर मांगे। इसके बाद व्रतधारी को  पहले कच्‍चे दूध का शरबत और फि‍र छठ पूजा के दौरान बना प्रसाद ग्रहण कर व्रत पूरा करना चाहि‍ए।

सुबह अर्घ्‍य देने के फायदे
सुबह के समय सूर्य की आराधना व अर्घ्‍य देने से इंसान निरोग और सेहतमंद रहता है। इतना ही नहीं उससे आर्थिक, सामाजि‍क, मानसिक, शारीरि‍क रूप से होने वाली हर प्रकार की मुसीबतें हमेशा दूर रहती हैं। दोपहर के समय सूर्य की पूजा करने से इंसान का नाम और यश सूर्य के तेज की तरह प्रकाशमान होता है। वहीं शाम के समय सूरज की उपासना करने वाले का जीवन संपन्‍नता व शांतिपूर्ण तरीके से बीतता है।

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