उपराष्ट्रपति ने ‘हिन्दी के कारण भोगी हुई अपनी अपमान-गाथा सुनायी

vh-3रामाशीष,काठमांडू, 12 जनवरी (यूनीवार्ता)। नेपाल के उपराष्ट्रपति परमानन्द झा ने हिन्दी के करण आपबीती ‘रोमांचकारी संकट’ गाथा सुनाते हुए ‘हिन्दी को यथाशीघ्र विश्व भाषा के शिखर पर पहुंचने की कामना व्यक्त की है। वह भारतीय राजदूतावास द्वारा आज यहां आयोजित ‘हिन्दी दिवस’ समारोह को संबंोधित कर रहे थे।
उपराष्ट्रपति झा ने इसी सिलसिले में ‘हिन्दी के कारण भोगी हुई अपनी अपमान-गाथा भी सुनायी और बताया कि हिन्दी भाषा में उपराष्ट्रपति पद का शपथ ग्रहण करने के कारण उन्हें छह महीने तक निलम्बित रहना पड़ा था। मालूम हो कि नेपाल के कट्टरपंथी नेपाली भाषा-भाषी शासकों, प्रशासकों, कानूनविदों और नेपाली मीडिया ने उनके द्वारा ‘‘नवस्थापित गणतांत्रिक लोकतंत्र के उपराष्ट्रपति पद’’ का शपथ ग्रहण हिन्दी भाषा में किए जाने के कारण उन्हें लांछित और

उप राष्त्रपति महामहिम परमानन्द झा को भारतीय राजदूत महामहिम रंजीत रे स्वागत करते हुये

उप राष्त्रपति महामहिम परमानन्द झा को भारतीय राजदूत महामहिम रंजीत रे स्वागत करते हुये

प्रताडि़त किया था। और, अन्त में नेपाली भाषा में फिर से शपथ ग्रहण करने के बाद ही उन्हें अपना कार्यभार सम्हालने दिया था । इस पूरी प्रक्रिया में छह महीने तक उन्हें निलम्बित रहना पड़ा था।
श्री झा ने बेलाग शब्दों में कहा ‘‘मेरे पिता जी हिन्दी बोलते थे, मैं हिन्दी बोलता हूं, मेरे घर में मेरी पत्नी और बाल-बच्चे हिन्दी बोलते हैं लेकिन गर्व की बात यह है हमलोगों ने हिन्दी की पढ़ाई नहीं की है फिर भी हमलोग हिन्दी बोलते हैं। यही नहीं नेपाल के दूरदराज के पर्वतीय और पहाड़ी गांवों में भी हिन्दी बोली और समझी जाती। उन सभी स्थानों पर भारतीय टी.वी. चैनेल – आजतक,      जी. टी. वी. , स्टार प्लस आदि के कार्यक्रम देखे सुने जाते हैं।

नेपाली सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश तथा विधिवेत्ता झा ने हिन्दी साहित्य के ईस्वी सन् पूर्व के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए ‘भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा हिन्दी को संयुक्त राष्ट्रसंघ की भाषाओं में स्थान दिलाने के प्रयासों की प्रशंसा की और कहा वह दिन दूर नहीं जब मोदीजी के प्रयास से हिन्दी विश्वभाषा का सर्वोच्च स्थान पाएगा। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री मोदी वह हस्ती हैं जिन्होंने न

त्रि वि वि केन्द्रीय हिन्दी विभाग की अध्यक्ष डा श्वेता दीप्ति द्वारा कार्यपत्र प्रस्तुत

त्रि वि वि केन्द्रीय हिन्दी विभाग की अध्यक्ष डा श्वेता दीप्ति द्वारा कार्यपत्र प्रस्तुत

केवल संयुक्त राष्ट्रसंघ को हिन्दी में संबोधित किया अपितु उनके सम्मान में अमेरिका में आयोजित लगभग सभी कार्यक्रमों को हिन्दी में संबोधित कर विश्व भर में हिन्दी को भारी सम्मान दिलाया। यही नहीं मोदी जी जापान, आस्टेªलिया, भूटान, मैनमार और फिजी आदि, जिन देशों में गए, उन्होंने बोधगम्य भाषा हिन्दी का ही प्रयोग किया। और, नेपाल में तो उन्होंने, संविधान सभा और व्यवस्थापिका संसद को हिन्दी में संबोधित कर नेपाली सांसदों की बेंच थपथपाटों की गड़गड़ाहट से सदन को गंुजायमान करा दिया। हिन्दी को विश्वभर में उच्चतम स्थान दिलाने का मोदी जी का प्रयास सफल हो, यही हमारी कामना है।

इस समारोह का सभापतित्व भारतीय राजदूत रंजीत राय ने किया। समारोह में त्रिभुवन विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, जानेमाने हिन्दी लेखक, साहित्यकार और कवियों के अलावा नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों के जानेमाने व्यक्तित्व भी उपस्थित थे। हिन्दी दिवस कार्यक्रम के सभापति एवं भारतीय राजदूत रंजीत राय ने इस अवसर पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सन्देश पढ़कर सुनाया।
प्रारंभ में उपराष्ट्रपति परमानन्द झा और भारतीय राजदूत रंजीत राय ने दीप प्रज्वलितकर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। कार्यक्रम के दूसरी पाली में एक कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया।  इस अवसर पर त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी विभागाध्यक्षा श्वेता दीप्ति ने एक अनुसन्धान-पत्र पढ़ा जिसमें नेपाल और भारत के बीच हिन्दी को एक अक्षुण्ण कड़ी बताया और कहा कि एक समय था जब नेपाल में नेपाली भाषा का विकास नहीं हुआ था और नेपाल के सभी स्कूल कालेजों में हिन्दी माध्यम से पढ़ाई होती थी, जबकि, बीच के कालखंड में वह परंपरा समाप्त हो गई। लेकिन, अव वह दिन फिर से आ गया है जब हिन्दी की पढ़ाई होने लगी है भले ही वह काॅलेज या विश्वविद्यालय स्तर पर ही क्यों न हो। यूनीवार्ता/रामाशीष   

नेपाल और भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु के रूप में हिन्दी : डा. श्वेता दीप्ति

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