उपेन्द्र यादव के कथनी और करनी मे फर्क है, मधेशी एकता को कमजोर कररहें हैं : राजेन्द्र महतो

काठमांडू , २३ मई | हिमालिनी के साथ हुई विशेष बातचीत में रा.ज.पा. अध्यक्ष मंडल के सदस्य रजेन्द्र महतो ने कहा कि उपेन्द्र यादव नें जनकपुर में जो कहा तो उनकी कथनी और करनी मे अकाश पताल का फर्क हैं । वे मधेशी एकता की बात तो नहीं किए हैं बल्कि मधेशी एकता के विभाजन के बात किए हैं । उन्होने अपनें काम से प्रमाणित कर दिया हैं । मधेशी मोर्चा एक था हम सभी इक्कठे थें । मधेश के पार्टी एक नहीं थी । अलग अलग रहतें हुए भी हम एक होकर मोर्चा के काम कर रहें थें । कम से कम एक लक्ष्य के साथ आगे तो बढ रहे थें । उस लक्ष्य को भी उन्होने तोड दिया । मधेशी मोर्चा के निर्णय विपरीत, नीति और कार्यक्रम के विपरीत बिना कोई विचार विर्मश और निर्णय के उन्होने चुनाव में सहभागिता जनादी । संविधान संशोधन बिना चुनाव में नहीं जानें का फैसला को नकारतें हुए, मोर्चा के निर्णय के खिलाप वो अकेले चुनाव में चलें गए । वो मोर्चा को समाप्त करके तो खुद चलें गए ही । और फिर वो मधेश केन्द्रित पार्टी से एकता न कर के और मोर्चा न बनाकर अन्य के साथ जाकर मोर्चाबन्दी किया । तो इस बात से यह कह सकतें हैं कि उपेन्द्र जी कहतें क्या हैं और करतें क्या हैं इस में कोई तारतम्य नहीं हैं । आज मधेश का सवाल कमजोर हुवा उपेन्द्र जी के कारण । मोर्चा और गठबन्धन को छोडकर अकेले निर्वाचन मे भाग लेने के फैसला जो किया उस से गठबन्धन और मोर्चा दोने धराप में पड गया । मधेश के सवाल जो था वो भी धराप मे पड गया । और जो मिशन था उसको भी कमजोर करनें का प्रयास हुआ । यही कर्ण है की सरकार मागों को सम्बोधन किए बगैर चुनाव की बातें कर रहीं हैं । प्रथम चरण का चुनाव करा ही ली और अब दुसरें चरण का चुनाव भी कराने में लगी है। संविधान संशोधन को नकारतें हुए चुनाव करानें की ओर लगे हैं । एैसी परिस्थिती हमारी एकता में कमजोरी होने के कारण आयी है । और इस एकता में दरार डालने का काम उपेन्द्र जी ने किया । इस का लाभ राज्य पक्ष उठा रहें हैं । इस लिए उपेन्द्र एकता विरोधी काम किए हैं । मधेश को कमजोर करनें का काम किया हैं । लेकिन किसी व्यक्ति को कमजोर करनें से हमारी एकता कमजोर नहीं होगी । कोई व्यक्ति को बात छोड देने से बात छुटती नहीं हैं । संघर्ष थोरा लम्बा जरुर होता हैं लेकिन समाप्त नहीं होता ।

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राजेन्द्र महतो ने मधेश आन्दोलन का बिगूल फूंका

उपेन्द्र यादव मधेश के प्रति जिम्मेदार और सम्बेदनशिल हैं । वास्तव में वे अगर मधेश की मुक्ति चाहतें हैं तो मधेशी मोर्चा के ६ घटक दल राष्ट्रिय जनता पार्टी मे आकर उपेन्द्र यादव भी शामिल हो जाए । राष्ट्रिय जनता पार्टी के एक अंग वो भी हो जाएगें तो फिर राष्ट्रिय जनता पार्टी के निर्णय के अधार पर हम सभी लोग एक्कठे होकर संघर्ष मे चलेंगे या आन्दोलन में जाना हैं तो साथ चलेंगें । हम आज भी कहतें है उपेन्द्र जी को कि आप भी आ जाए । आप अन्दर आ जाएगें तो आप जितनी भी गल्ती कियें हैं मधेश की जनता आप को एकता के नाम पर माफ करदेगें, ये बात मैं बार बार उपेन्द्र जी कहतें आ रहा हूँ । मोर्चा जो सात पार्टी थी वो एक पार्टी के रुप मे हो जाए । मधेश के एकता में बाधक और व्यवधान कहाँ–कहाँ और कौन–कौन कर रहा हैं इस का सही उत्तर और जवाफ, दण्ड या पुरस्कार जनता देती हैं और देगी । इस लिए उपेन्द्र जी मेरा आग्रह है कि अभी भी कुछ बिगडा नहीं हैं मधेशी मोर्चाको एक पार्टी बनाने का मिशन था मधेशी जनता का उस मे आप ही कमी रह गए हैं बाँकी सब एक हो गए हैं । आप के लिए राजपा के अन्दर हर बक्त दरवाजा खुला हैं । और उस के बाद जो भी करना है एक बैनर एक छाते के निचे करेंगें । तो उपेन्द्र जी के लिए अभी भी अवसर हैं । अपनें भुल को सुधार करें तो उन के लिए दरवाजा बन्द नहीं हैं । विजय यादव

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