एक बार फ़िर से दिखा, सत्ता का घिनौना रूप ..

 

अासाढ ४ गते

कपिलवस्तु

गंगेश मिश्र
नवलपरासी रामग्राम में, राष्ट्रीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में; पुलिस द्वारा किया गया बर्बरतापूर्ण व्यवहार, दुर्भाग्यपूर्ण है। नेपाल के संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हनन करने से, सरकार बाज़ नहीं आ रही। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हक़; देश में रहने वाले सम्पूर्ण नागरिकों को है; जिसका कोई भी सरकार अपहरण नहीं कर सकती। किन्तु नेपाल में सब कुछ सम्भव है; खास कर बात मधेश और मधेशियों के विरोध में हो।
★★★★★★
हर-बार वही गलती;
दुहराई जा रही है;
निहत्थो पे गोली;
चलवाई जा रही है।
यहाँ, हक़ है सभी को;
अधिकार माँगने का;
ऐसे में सर्द-दहशत;
फैलाई जा रही है।
किस ओर जा रहा है;
यह मुल्क़, धीरे-धीरे;
हर-बार, मुँह पे कालिख;
पुतवाई जा रही है।
कैसी है ये, सियासत;
कैसी है ये, अदावत;
भाई की मौत पे भी;
शहनाई गा रही है।
★★★★★
संविधान संशोधन करने में, जिस तरह से सुनियोजित तरीके से सुस्ती दिखाई गई; इससे सरकार की मंशा स्पष्ट दिखाई दे रही है।जिस एकजुटता के साथ; सुशील कोईराला सरकार और अन्य सभी पहाड़वादी दलों ने आनन-फानन; संविधान पास करवाया, संशोधन के लिए वही एकजुटता फ़िर क्यूँ नहीं दिखाते ? ये संशोधन को चुनाव बाद तक आख़िर क्यूँ टालना चाहते हैं ? यह गौर करने वाली बात है; असमान व्यवस्था वाले संविधान पर मधेश विश्वास कैसे करे ?
अब 1 और 5 नम्बर क्षेत्र में, कैसे भी चुनाव करवाने पर उतारू देउवा सरकार ने भी; ओली की तर्ज़ पर राजपा पर दमन का रुक अख़्तियार किया।

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