एक वर्षमें जनता ने क्या खोया, क्या पाया
रमेश झा

संविधान सभा निर्वाचन के बाद बिगत ६ वर्षो में ४ प्रधानमन्त्री बने, लेकिन पिछली बार प्रधानमन्त्री हुए डा. बाबुराम भट्टर्राई के प्रति जनता बहुत आशावादी थी । मगर वह आशा अब निर ाशा में परि वर्तित हो चुकी है । यह बात डा. भर्ट्टर्रइ के नेतृत्ववाली सरकार ने एक वर्षमंे साबित कर दिया है ।
जब डा. भट्टर्राई प्रधानमन्त्री बने, चारों ओर खुशियाँ ही खुशियाँ छा गई । जनता व्यापक भ्रष्टाचार , अनियमितता, अस्थिरता, अराजकता, असुर क्षा से त्रस् त हो गई थी । ऐसी स्थिति में राजनीति में साफ स्वच्छ छवि, आदर्शवान और स्पष्ट विचार से युक्त व्यक्तित्व डा. भट्टर्राई के आने से नागरिकों को अपेक्षा होना स् वाभाविक ही था । पदासीन होते ही शुरुवाती कदम उन्होंने बहुत ही जनपक्षीय रुप में बढÞाया । जिसमें उनकी अपनी ही पार्टर्ीीी नहीं विपक्षी कुछ नेता, कार्यकर्ता तथा आम नागरिक में खुशियाँ छाने लगी । कहा जाने लगा कि डा. भट्टरर् ाई देश और  जनता के लिए कुछ कर ेंगे । जनभावनानुसार  कोई नेता काम कर ने वाला है तो वह भट्टरर् ाई ही है, ऐसी मानसिकता बन गई थी । प्रधानमन्त्री बनने से पहले वे अर्थमन्त्री भी हुए थे । उस काल में उन्होंने आर्थिक सुधार  को अच्छे आसार  दिखाए थे ।
शुरुआती दिनों में डा. भट्टरर् ाई ने आशाअनुरुप कुछ उदाहर णीय कार्याें का शुभार म्भ भी किया । शान्ति स् थापना और  संविधान निर्माण कार्य को पूर ा कर ने का वचन देते हुए उन्होंने जनपक्षीय र ाहत एवं सुविधा देने की योजना भी बनाई । मंहगी गाडÞी के बदले नेपाल में बनी सस् ती गाडी का प्रयोग किया । जनता की समस् या समाधान के लिए ‘हेलो सर कार ’ के माध्यम से जनता के साथ बातचीत कर ने का अभियान भी प्रधानमन्त्री ने चलाया । महीना में एक बार  गाँव में जाकर  र हने और  वहाँ की समस् या सुनने का कार्यक्रम भी उन्होंने शुरु किया । इस क्रम उन्हें अपनी ही पार्टर्ीीथा कार्यकर्ता द्वार ा काला झण्डा, विर ोध स् वरुप देखने को मिला । फिर  भी उन्होंने शान्ति के लिए कन्टेनर  की चाभी हस् तान्तर ण किया, सेना समायोजन प्रक्रिया को आगे बढÞाया । अन्त में समस् या आते देख र ातोर ात सेना परि चालन कर ते हुए शिविर  में स् थापित लडाकुओं को नेपाली सेना के अधीनस् थ किया ।
देश की जनता के लिए कुछ कर ने की ललक र खने वाले प्रधानमन्त्री डा. भट्टरर् ाई पार्टर्ीी तथा विपक्षी र ाजनीति की विषम परि स् िथति में फँस गए । उनके द्वार ा घोषित घोषणाओं के अनुसार  आशावादी जनता को कुछ भी र ाहत नहीं मिलने के आसार  दिखाई देने लगे । उन्ही के समय में अनियन्त्रित मंहगाई बढी, उन्ही के मन्त्रीमंडल ने जम्बो होने का कर्ीर्तिमान स् थापित किया । लाखों खर्च चायपान में किया जाने लगा । असुर क्षा की भयावह स् िथति यथावत र ही । र ाजनीतिक खींचातानी के कार ण देश में भ्रष्टाचार  ने चर म सीमा को छू लिया ।
विषम अवस् था में भी भट्टरर् ाई ने शान्ति, संविधान एवं जनता को र ाहत देने के प्रति प्रतिवद्धता सयम-सयम में दिखाने के साथ साथ काम कर ने और  भाषण देकर  अपने आप को कुछ अलग दिखाने का प्रयास किया ही है । पर  दर्ुभाग्यवश उन्होंने जो बोला, कहा और  शुरु किया, वह भी पूर ा नहीं हुआ । निर्देशन कार्यान्वित नहीं हुआ । डा. भट्टरर् ाई द्वार ा समय-समय में बोले, कहे और  निर्देशित किए गए उदाहर ण इस प्रकार  हैं-
प्रिधानमन्त्री बनने के बाद डा. भट्टरर् ाई ने कहा शान्ति एवं संविधान के पक्ष में एक एक मिनट का हिसाब होना चाहिए । यदि ऐसा नहीं कर  सका तो एक मिनट भी पद पर  नहीं र हूँगा, पर  भट्टरर् ाई मिनट-मिनट का हिसाब कर ते-कर ते हुए कुछ भी पूर ा नहीं किया, फिर  भी पद पर  विर ाजमान है ।
गित वर्षदशहर े के अवसर  पर  काठमांडू से बाहर  जाने वाले गाडी में टिकट का कृत्रिम अभाव दिखाकर  हो र हे कालाबाजार ी को र ोकने का निर्देश दिया, अनुगमन भी हुआ कुछ पर  कार वाई भी हर्ुइ । पर  दशहर ा, दीपावली, त्यौहार  समाप्ति के बाद अनुगमन कार्य भी समाप्त हुआ । यात्रियों के साथ ठगी और  काला बाजार ी अभी भी हो र ही है ।
अिसोज १५ में र ाजमार्ग के होटलों में यात्रियों को बासी, सडे-गले खाना खिलाकर  पैसा वसूलने जैसी शिकायत आने पर  प्रम ने तत्काल अनुगमन, निर ीक्षण कर ने का निर्देशन भी दिया, अनुगमन भी हुआ, पर  बीच में खत्म हो गया । शिकायत यथावत विद्यमान है ।
अिाश्विन महीने में ही प्रम ने र ाजधानी में ट्राफिक व्यवस् था को ठीक कर ने के लिए ट्राफिक प्रहर ी एवं यातायात व्यवस् था मन्त्रालय को कई निर्देशन दिए, दर्ीघकालीन योजना बनाने को कहा, तर्सथ ट्राफिक क्षेत्र में अनुकूल प्रभाव दीख र हा है, सडÞक बिस् तार  भी हुआ । पर  आकाशे पुल सचेतना कार्यक्रम स् थगित है ।
जिनता की समस् या समाधानार्थ ‘हेलो सर कार ’ कार्यक्रम शुरु हुआ । इस के माध्यम से जनपक्षीय समस् यओं का पुलिन्दा पहाडÞ बन चुका पर  अभीतक समस् याओं के प्रति सम्बोधन प्रम ने नहीं किया । अभी यह कार्यक्रम मजाक का विषय बन चुका है ।
अिग्रहण ५ में प्रम ने जनता के साथ प्रत्यक्ष सम्बन्ध र खने वाले सर कार ी संस् थानों एवं मन्त्रालयों के जिम्मेवार  अधिकारि यों को शिकायत तत्काल दूर  कर ने का निर्देश दिया । पर  शिकायत बढी है, घटी नहीं है ।
पिौष में प्रम ने कहा कि सडÞक बिस् तार  का काम बैशाख तक सम्पन्न हो जाएगा । पर  अभी तक गिर ाने का काम भी पूर ा नहीं हुआ है, बनाना तो दूर  की बात है । जगह-जगह पर  धूल और  कीचडÞ से जनता बेहाल है ।
मिाघ २९ गते विद्यार्थी एवं विपन्न वर्ग को गैस, डिजल में ३३ प्रतिशत छूट देने की घोषणा प्रम ने किया, पर  घोषणा में ही सीमित र हा ।
चिैत्र के अन्तिम सप्ताह में काठमांडू को साफ सुथर ा र खने के लिए प्रम ने हाथ में झाडू लिया, बाग्मती में घुसकर  कचर ा निकाला, पर  यह कार्यक्रम भी नौटंकी के रुप में ही साबित हुआ ।
सिंविधानसभा विघटन के बाद प्रम हर ेक महीने किसी गाँव में जाकर  जनता की शिकायत सुनने के क्रम में काठमांडू, भक्तपुर  एवं चितवन जा चुके है । जनता को समय में खाद, शिक्षा, स् वास् थ्य, सिंचाई जैसी समस् या का समाधान कर ने का वचन प्रम ने दिया पर  पूर ा नहीं किया ।
भिाद्र ५ गते बाजार  अनुगमन, मूल्य नियन्त्रण, वस् तु आपर्ूर्ति कर ने का निर्देश प्रम ने सम्बन्धित निकाय को दिया, तदनुसार  यदा कदा अनुगमन किया जा र हा है ।
भागबण्डा का विर ोध कर ने का स् वांग प्रम कर ते है । पर  रि क्त पदों पर  अपने व्यक्तियों को भर ते हैं । नातावाद का विर ोध कर ते हैं, पर  धर्मपत्नी की बडÞी बहन को विभिन्न पदों पर  नियुक्त कर ते हैं । प्रम द्वार ा सुशासन कर ने का प्रयास किया गया दिखता है पर  होता कुछ नहीं । जनता र ाहत महसूस नहीं कर  पाई । तय की गई तिथि में चुनाव न होने से पदीय नैतिकता समाप्त हो चुकी है । फिर  भी पद पर  बने र हने से उनकी साख घट र ही है ।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: